प्रमोद कुमार
रायपुर, 27 फ़रवरी 2026

Chhattisgarh विधानसभा के बजट सत्र के दौरान शुक्रवार को एक अलग ही दृश्य देखने को मिला, जब 120 सरेंडर नक्सली सदन की कार्यवाही देखने पहुंचे। इनमें झीरम घाटी हमले का मास्टरमाइंड चैतू उर्फ श्याम दादा और 1 करोड़ का इनामी पूर्व नक्सली सतीश उर्फ रूपेश भी शामिल थे। सुरक्षा जांच के बाद सभी को दर्शक दीर्घा में बैठाया गया।
बताया गया कि चैतू ने तीन महीने पहले जगदलपुर में आत्मसमर्पण किया था। वहीं सतीश उर्फ रूपेश, जो सेंट्रल कमेटी का सदस्य (CCM) रहा है, ने 210 साथियों के साथ सरेंडर किया था। झीरम घाटी हमला 2013 में हुआ था, जिसमें कई वरिष्ठ नेताओं की जान गई थी।
विधानसभा आने से पहले गुरुवार रात ये सभी सरेंडर नक्सली डिप्टी सीएम Vijay Sharma के निवास पहुंचे थे, जहां उनके स्वागत में रेड कार्पेट बिछाया गया और फूलों से अभिनंदन किया गया। इस आयोजन को लेकर भी राजनीतिक हलकों में चर्चा रही।
सत्ता पक्ष के विधायकों प्रमोद मिंज, अजय चंद्राकर और रिकेश सेन ने परीक्षा केंद्रों की कमी और नकल के मामलों पर ध्यानाकर्षण प्रस्ताव रखा। उन्होंने कहा कि कई छात्रों को 15 किलोमीटर दूर जाकर परीक्षा देनी पड़ रही है। मंत्री गजेंद्र यादव ने आश्वासन दिया कि अगले शिक्षा सत्र से व्यवस्था में सुधार होगा।
कांग्रेस विधायक उमेश पटेल ने रायगढ़ जिले में अवैध फ्लाईऐश डंपिंग के मामलों पर सवाल उठाया।
वित्त मंत्री OP Choudhary ने जवाब देते हुए कहा कि पिछली सरकार की तुलना में 10 गुना अधिक कार्रवाई की गई है।
पूर्व मुख्यमंत्री Bhupesh Baghel ने पलटवार करते हुए कहा कि जिस अवधि की बात हो रही है, उस समय लॉकडाउन लागू था। जवाब के बाद सदन में जोरदार हंगामा हुआ और विपक्ष ने पहला वॉकआउट किया।
विधायक संगीता सिन्हा ने 18 करोड़ रुपए के विकास कार्य की स्वीकृति की मांग की। वित्त मंत्री ने इसे विभागीय प्रक्रिया का विषय बताया। इस पर फिर नारेबाजी हुई और विपक्ष ने दूसरा वॉकआउट किया।
विधायक पुन्नूलाल मोहले ने फसल उत्पादन, खर्च और किसानों को दिए गए प्रशिक्षण की जानकारी मांगी। कृषि मंत्री रामविचार नेताम ने बताया कि 900 किसानों को हाईब्रिड बीज और उन्नत तकनीक की ट्रेनिंग दी गई है।
उन्होंने स्वीकार किया कि जमीनी स्तर पर मूल्यांकन की प्रक्रिया को और मजबूत करने की आवश्यकता है।
इससे पहले बजट सत्र के चौथे दिन भी सदन में कस्टोडियल डेथ का मुद्दा गरमाया था। गृह मंत्री विजय शर्मा ने जानकारी दी थी कि जनवरी 2025 से 31 जनवरी 2026 के बीच राज्य की जेलों में 66 बंदियों की मौत हुई। इस पर भी विपक्ष ने सरकार को घेरा था।
कुल मिलाकर, विधानसभा के भीतर विकास कार्यों और प्रशासनिक जवाबदेही को लेकर तीखी बहस देखने को मिली, जबकि बाहर से मुख्यधारा में लौटे पूर्व नक्सलियों की मौजूदगी ने सियासी और सामाजिक दोनों स्तरों पर नई चर्चा छेड़ दी है।





