सतीश शर्मा
बलौदाबाजार, 27 मई 2026

बलौदाबाजार वनमण्डल अंतर्गत 16 से 22 मई 2026 तक आयोजित देवपुर समर कैंप 2026 के दौरान देवपुर जंगल में बर्डिंग ट्रेल के समय एक दुर्लभ वन्यजीव का रोमांचक अवलोकन हुआ। कैंप के शुभारंभ दिवस 16 मई को प्रतिभागियों ने जायंट मालाबार स्क्विरल (Indian Giant Squirrel) को देखा, जिससे प्रकृति प्रेमियों और वन्यजीव संरक्षण से जुड़े लोगों में उत्साह बढ़ गया।
इस दुर्लभ वृक्षवासी गिलहरी की पहचान बलौदाबाजार के प्रकृति एवं पक्षी प्रेमी तथा साइबर रिस्क एक्सपर्ट हेमंत वर्मा ने की। उनके अनुसार यह प्रजाति सामान्य गिलहरियों की तुलना में आकार में काफी बड़ी होती है और इसका आकर्षक रंग संयोजन इसे अलग पहचान देता है। देवपुर जंगल में इसकी मौजूदगी क्षेत्र की समृद्ध जैव विविधता और स्वस्थ वन पारिस्थितिकी का सकारात्मक संकेत मानी जा रही है।

जायंट मालाबार स्क्विरल, जिसे वैज्ञानिक रूप से Ratufa indica कहा जाता है, भारत की सबसे बड़ी वृक्षवासी गिलहरियों में शामिल है। इसकी लंबाई पूंछ सहित लगभग तीन फीट तक हो सकती है। इसके शरीर पर गहरे लाल, काले, भूरे और क्रीम रंगों का मिश्रण इसे बेहद आकर्षक बनाता है।
यह गिलहरी पूरी तरह वृक्षवासी स्वभाव की होती है और अपना अधिकांश जीवन ऊंचे पेड़ों पर बिताती है। यह एक पेड़ से दूसरे पेड़ तक करीब 20 फीट लंबी छलांग लगाने में सक्षम होती है और बहुत कम जमीन पर उतरती है।
वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार किसी भी वन क्षेत्र में जायंट मालाबार स्क्विरल की उपस्थिति उस क्षेत्र के स्वस्थ वृक्ष आवरण और समृद्ध जैव विविधता का संकेत मानी जाती है। अंतरराष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण संघ (IUCN Red List) ने इस प्रजाति को “Least Concern” श्रेणी में रखा है, हालांकि जंगलों की कटाई और आवास विखंडन इसके लिए खतरा बने हुए हैं।
भारत में यह प्रजाति वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 की अनुसूची-II के अंतर्गत संरक्षित है। इसके शिकार या व्यापार को दंडनीय अपराध माना गया है।
देवपुर समर कैंप के दौरान इस दुर्लभ प्रजाति का दिखाई देना बच्चों और प्रतिभागियों के लिए भी यादगार अनुभव रहा। वन विभाग का मानना है कि इस तरह के वन्यजीव अवलोकन युवाओं और बच्चों में प्रकृति एवं वन्यजीव संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाने में मददगार साबित होते हैं।
वनमण्डलाधिकारी बलौदाबाजार धम्मशील गणवीर ने कहा कि बारनवापारा अभ्यारण्य और आसपास के वन क्षेत्र जैव विविधता की दृष्टि से बेहद समृद्ध हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे अवलोकन हमें जंगलों के महत्व को समझने और उनके संरक्षण के लिए सामूहिक प्रयास करने की प्रेरणा देते हैं।



