28 Aug 2026, Fri
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शिक्षा, रोजगार और आदिवासी विकास पर सरकार का बड़ा फोकस: मंत्री रामविचार नेताम ने गिनाईं विभाग की उपलब्धियां, भविष्य का रोडमैप भी बताया

सतीश शर्मा

रायपुर, 13 जुलाई 2026। आदिम जाति विकास मंत्री रामविचार नेताम ने सोमवार को आयोजित प्रेसवार्ता में विभाग की उपलब्धियों और भविष्य की योजनाओं की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार अनुसूचित जनजातियों के शैक्षणिक विकास, आर्थिक आत्मनिर्भरता, रोजगार सृजन और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण के लिए योजनाबद्ध तरीके से कार्य कर रही है। विभाग का उद्देश्य आदिवासी समाज को शिक्षा, कौशल विकास और आजीविका से जोड़कर समावेशी विकास सुनिश्चित करना है।

मंत्री नेताम ने बताया कि छत्तीसगढ़ में 43 अनुसूचित जनजातियां और उनके उपसमूह निवास करते हैं, जिनकी आबादी राज्य की कुल जनसंख्या का 30.62 प्रतिशत है। प्रदेश का 60 प्रतिशत से अधिक क्षेत्र अनुसूचित क्षेत्र तथा 65 प्रतिशत से अधिक हिस्सा आदिवासी उपयोजना क्षेत्र में शामिल है। इन क्षेत्रों के समग्र विकास के लिए शिक्षा, रोजगार, स्वरोजगार, अधोसंरचना और सामाजिक सशक्तिकरण से जुड़ी कई योजनाएं संचालित की जा रही हैं।

उन्होंने कहा कि सरकार आदिवासी युवाओं को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और कौशल प्रशिक्षण उपलब्ध कराने के साथ-साथ रोजगार के अवसर बढ़ाने पर विशेष ध्यान दे रही है। इसके सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं और जनजातीय प्रतिभाएं शिक्षा, खेल तथा आजीविका के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल कर रही हैं।

 

 

मंत्री ने बताया कि आदिवासी उपयोजना के माध्यम से बस्तर विकास प्राधिकरण, सरगुजा विकास प्राधिकरण और नवगठित मध्य क्षेत्र आदिवासी विकास प्राधिकरण के जरिए स्थानीय विकास कार्यों और आधारभूत संरचना को गति दी जा रही है। इन प्रयासों से आदिवासी क्षेत्रों में विकास को नई दिशा मिली है।

रामविचार नेताम ने कहा कि सरकार आदिवासी समाज की अस्मिता और सांस्कृतिक पहचान के संरक्षण के लिए भी प्रतिबद्ध है। इसी उद्देश्य से नवा रायपुर में छत्तीसगढ़ आदिवासी संग्रहालय तथा महान आदिवासी स्वतंत्रता सेनानियों के योगदान को समर्पित स्मारक-सह-संग्रहालय की स्थापना की गई है। उन्होंने कहा कि जनजातीय सलाहकार परिषद, स्वशासी समितियों और विकास परियोजनाओं के सहयोग से विभाग लगातार नवाचार करते हुए नई योजनाओं का संचालन कर रहा है।

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सरकार का लक्ष्य आदिवासी समाज को शिक्षा, रोजगार, सांस्कृतिक संरक्षण और सामाजिक न्याय के माध्यम से आत्मनिर्भर बनाते हुए प्रदेश के समग्र विकास में उनकी भागीदारी को और मजबूत करना है।

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