1 Sep 2026, Tue
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CSMCL घोटाले में बड़ा एक्शन: 172 करोड़ के फर्जी भुगतान केस में पूर्व MD अरुणपति त्रिपाठी गिरफ्तार, EOW बोली—कमीशन का खेल बेनकाब

सतीश शर्मा

रायपुर, 18 जुलाई 2026। छत्तीसगढ़ स्टेट मार्केटिंग कॉर्पोरेशन लिमिटेड (CSMCL) के बहुचर्चित ओवरटाइम भुगतान घोटाले में आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (EOW) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए तत्कालीन प्रबंध संचालक (MD) अरुणपति त्रिपाठी को गिरफ्तार कर लिया है। उन पर कर्मचारियों के ओवरटाइम, बोनस और अतिरिक्त कार्यदिवसों के नाम पर करोड़ों रुपये के कथित फर्जी भुगतान में कमीशन लेने का आरोप है।

EOW के अनुसार, अरुणपति त्रिपाठी को 17 जुलाई को गिरफ्तार किया गया था। शनिवार को उन्हें रायपुर की विशेष अदालत में पेश किया गया, जहां से कोर्ट ने 20 जुलाई तक पुलिस रिमांड पर भेज दिया। जांच एजेंसी अब उनसे पूछताछ कर घोटाले से जुड़े अन्य लोगों और वित्तीय लेनदेन की जानकारी जुटा रही है।

जांच की शुरुआत उस समय हुई जब प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने 29 नवंबर 2023 को कार्रवाई के दौरान 28.80 लाख रुपये नकद जब्त किए थे। इस मामले की सूचना राज्य शासन को भेजे जाने के बाद EOW ने एफआईआर दर्ज कर विस्तृत जांच शुरू की।

 

 

जांच में सामने आया कि वर्ष 2019-20 से 2023-24 के बीच कर्मचारियों के ओवरटाइम, चार अतिरिक्त कार्यदिवस, बोनस और सर्विस चार्ज के नाम पर विभिन्न मैनपावर एजेंसियों को 172 करोड़ रुपये से अधिक का अवैध भुगतान किया गया। एजेंसी का आरोप है कि इस राशि का बड़ा हिस्सा कथित सिंडिकेट के माध्यम से नकद कमीशन के रूप में वापस लिया गया।

इस मामले में EOW पहले ही 12 आरोपियों के खिलाफ आरोप पत्र न्यायालय में पेश कर चुकी है। अब अरुणपति त्रिपाठी की गिरफ्तारी के बाद जांच एजेंसी को उम्मीद है कि घोटाले से जुड़े अन्य अहम साक्ष्य और नए आरोपियों की जानकारी सामने आ सकती है।

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जांच में सुमित फैसिलिटीज, प्राइमवन वर्कफोर्स, ए-टू-जेड इंफ्रासर्विसेज, अलर्ट कमांडोज और ईगल हंटर सॉल्यूशंस जैसी मैनपावर एजेंसियों की भूमिका भी सामने आई है। आरोप है कि इन एजेंसियों को कर्मचारियों के नाम पर बड़े पैमाने पर अतिरिक्त भुगतान किया गया।

EOW के अनुसार, कथित अनियमितताओं में ओवरटाइम के नाम पर 101.20 करोड़ रुपये, बोनस के रूप में 12.21 करोड़ रुपये, चार अतिरिक्त कार्यदिवसों के भुगतान में 54.46 करोड़ रुपये और सर्विस चार्ज के रूप में 15.11 करोड़ रुपये का भुगतान शामिल है। इस तरह कुल करीब 182.98 करोड़ रुपये का अतिरिक्त भुगतान विभिन्न एजेंसियों को किए जाने का दावा जांच एजेंसी ने किया है। फिलहाल मामले की विस्तृत जांच जारी है।

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