24 Oct 2026, Sat
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खाद-बीज पर सख्ती: CM विष्णुदेव साय के निर्देश के बाद कालाबाजारी करने वालों पर बड़ा एक्शन, 97 लाइसेंस सस्पेंड

सतीश शर्मा 

रायपुर, 23 जुलाई 2026/ खरीफ 2026 के दौरान डीएपी की राष्ट्रीय स्तर पर सीमित उपलब्धता के बावजूद मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार किसानों के हितों की रक्षा के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। मुख्यमंत्री के स्पष्ट निर्देश हैं कि प्रदेश के प्रत्येक किसान को समय पर खाद-बीज उपलब्ध हो, किसी भी किसान को अनावश्यक परेशानी का सामना न करना पड़े और उर्वरकों की कालाबाजारी अथवा निर्धारित मूल्य से अधिक वसूली करने वालों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। इसी के अनुरूप कृषि विभाग द्वारा पूरे प्रदेश में उर्वरकों की उपलब्धता, वितरण एवं मूल्य नियंत्रण पर लगातार निगरानी रखी जा रही है।

कृषि विभाग के अधिकारियों ने बताया कि खरीफ सीजन 2026 के लिए डीएपी का लक्ष्य 3 लाख मीट्रिक टन निर्धारित किया गया है। जबकि 21 जुलाई 2026 की स्थिति में प्रदेश में 1 लाख 84 हजार 413 मीट्रिक टन डीएपी का भंडारण किया गया है। वहीं भंडारण के विरुद्ध किसानों को 1 लाख 26 हजार 360 मीट्रिक टन का वितरण किया जा चुका है। इसके बाद भी समितियों एवं गोदामों में 58 हजार 054 मीट्रिक टन डीएपी उपलब्ध है। उल्लेखनीय है कि खरीफ 2025 की इसी अवधि में 37 हजार 535 मीट्रिक टन डीएपी शेष था।

कृषि विभाग के अधिकारियों ने बताया कि कृषि वैज्ञानिकों की अनुशंसा के अनुरूप किसानों को डीएपी के साथ-साथ एनपीके एवं अन्य संतुलित उर्वरकों के उपयोग के लिए भी प्रोत्साहित किया जा रहा है, जिससे फसलों की पोषण आवश्यकताओं की पूर्ति हो सके तथा डीएपी पर अत्यधिक निर्भरता कम हो।

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देश में डीएपी का लगभग 70 से 80 प्रतिशत तथा एनपीके का 30 से 40 प्रतिशत आयात विदेशों से किया जाता है। वैश्विक परिस्थितियों एवं अंतरराष्ट्रीय बाजार में आपूर्ति प्रभावित होने के कारण डीएपी और एनपीके की उपलब्धता तथा कीमतों पर प्रभाव पड़ा है। इसी कारण उर्वरक आपूर्तिकर्ता कंपनियों द्वारा भारत सरकार की प्रचलित नीति एवं बाजार परिस्थितियों के अनुरूप एनपीके के अधिकतम खुदरा मूल्य (एमआरपी) में वृद्धि की गई है।

कृषि विभाग ने स्पष्ट किया है कि उर्वरकों के मूल्य निर्धारित करना राज्य सरकार के अधिकार क्षेत्र में नहीं है, फिर भी किसानों से निर्धारित एमआरपी से अधिक मूल्य वसूला न जाए, इसके लिए विभाग लगातार निरीक्षण कर रहा है। अधिक मूल्य वसूली, कालाबाजारी तथा कृत्रिम अभाव उत्पन्न करने वालों के विरुद्ध उर्वरक नियंत्रण आदेश, 1985 एवं आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 के तहत सख्त कार्रवाई की जा रही है।

अधिकारियों ने बताया कि अब तक प्रदेश में 4,878 उर्वरक विक्रय केन्द्रों का निरीक्षण किया गया है। कार्रवाई के दौरान 625 नोटिस जारी किए गए, 183 केन्द्रों पर विक्रय प्रतिबंध लगाए गए तथा 98 केन्द्रों से उर्वरक जब्त किए गए। वहीं 97 केन्द्रों का लाइसेंस निलंबित और 11 विक्रय केन्द्रों का लाइसेंस निरस्त किया गया। साथ ही 56 प्रकरण न्यायालय में प्रस्तुत किए गए तथा 7 प्रकरणों में एफआईआर दर्ज की गई हैं।

इधर, भारी वर्षा से जिन क्षेत्रों में बोनी प्रभावित हुई है अथवा किसानों को पुनः बुआई (डबल बोनी) करनी पड़ रही है, वहां जिला प्रशासन एवं कृषि विभाग द्वारा लगातार निगरानी रखी जा रही है। प्रभावित किसानों को तकनीकी मार्गदर्शन, बीज एवं उर्वरक उपलब्ध कराने तथा शासन के प्रावधानों के अनुरूप आवश्यक सहायता उपलब्ध कराने की कार्रवाई की जा रही है।

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मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व एवं कृषि मंत्री रामविचार नेताम के मार्गदर्शन में राज्य सरकार किसानों के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए कार्य कर रही है। विभाग द्वारा उर्वरकों की उपलब्धता, वितरण व्यवस्था, मूल्य नियंत्रण एवं कालाबाजारी पर प्रभावी निगरानी रखी जा रही है, ताकि प्रत्येक पात्र किसान को समय पर आवश्यक कृषि आदान उपलब्ध हो सके।

राज्य शासन ने किसानों से अपील की है कि वे केवल अधिकृत विक्रेताओं एवं सहकारी समितियों से ही निर्धारित मूल्य पर उर्वरक खरीदें। यदि कहीं भी अधिक मूल्य वसूली, कालाबाजारी अथवा किसी अन्य प्रकार की अनियमितता की जानकारी मिले तो तत्काल कृषि विभाग अथवा जिला प्रशासन को सूचित करें, ताकि दोषियों के विरुद्ध शीघ्र एवं प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।

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