बस्तर/रायपुर, 19 अगस्त 2026
बस्तर में कोसा और टसर से जुड़े ग्रामीणों की आय बढ़ाने के लिए ग्रामोद्योग विभाग ने बड़ा कदम उठाया है। विभाग के सचिव सह संचालक राजेश सिंह राणा ने बस्तर के ककून बैंक, धागाकरण केंद्र धरमपुरा और केंद्रीय रेशम बोर्ड के रिसर्च सेंटर का निरीक्षण कर जमीनी हालात का जायजा लिया।


निरीक्षण के दौरान सचिव राणा ने कोसा कृमिपालन, धागाकरण, उत्पादन, गुणवत्ता और बाजार में बिक्री की स्थिति की जानकारी ली। धागाकरण केंद्र में काम कर रहीं 43 महिला हितग्राहियों से चर्चा कर उन्होंने उनकी आय और विपणन व्यवस्था को समझा। बाजार में रिल्ड यार्न करीब 6,800 रुपये प्रति किलो और स्पन यार्न 3,400 से 3,500 रुपये प्रति किलो तक बिकने की जानकारी दी गई।
सचिव राणा ने बस्तर संभाग के सभी जिलों से 25 हितग्राहियों को टसर कृमिपालन और 25 हितग्राहियों को धागाकरण का प्रशिक्षण देने के निर्देश दिए हैं। प्रशिक्षण केंद्रीय रेशम बोर्ड के माध्यम से कराया जाएगा। खास बात यह है कि नक्सल प्रभावित इलाकों के हितग्राहियों को प्राथमिकता देकर स्थानीय स्तर पर रोजगार और आय के अवसर बढ़ाने पर जोर दिया गया है।

सुकमा और दंतेवाड़ा में भी धागाकरण प्रशिक्षण शुरू करने के निर्देश दिए गए हैं। वहीं कांकेर के बाबूकोहका स्थित ककून बैंक का निरीक्षण कर टसर और मल्बरी ककून की कीमत, टसर धागाकरण और बस्तर में रैली कोसा की आवक को लेकर आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए।
हितग्रियों की आमदनी बढ़ाने के लिए केवल कोसा पर निर्भर रहने के बजाय केंद्रों में हल्दी, गेंदा, पपीता, फलदार पौधों और साग-सब्जियों की अंतरफसल लगाने के निर्देश भी दिए गए हैं।

यानी सरकार का फोकस साफ है—कोसा से रोजगार, प्रशिक्षण से हुनर और स्थानीय उत्पादन से ग्रामीणों की आय में इजाफा। बस्तर के नक्सल प्रभावित इलाकों में आजीविका के नए रास्ते खोलने की यह पहल ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में अहम मानी जा रही है।





