रायपुर, 04 सितंबर 2026। कलिंगा यूनिवर्सिटी, रायपुर में अंतरराष्ट्रीय विद्यार्थियों के लिए “अनसुनी धड़कन सुनें – अफ्रीका में जन्मजात हृदय रोग की देखभाल” विषय पर विशेष संवाद सत्र आयोजित किया गया। कार्यक्रम में बच्चों में जन्मजात हृदय रोग (CHD), समय पर इलाज और वैश्विक स्तर पर स्वास्थ्य सेवाओं की समान पहुंच जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा हुई।
सत्र में डॉ. अतुल सुरेंद्र प्रभु, सीनियर कंसल्टेंट पीडियाट्रिक कार्डियोलॉजिस्ट और को-फाउंडर, ग्लोबल CHD एलायंस ने विद्यार्थियों से संवाद किया। उन्होंने बताया कि जन्मजात हृदय रोग से प्रभावित बच्चों के लिए समय पर पहचान, उचित उपचार और विशेषज्ञ स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच बेहद महत्वपूर्ण है।

डॉ. प्रभु ने चर्चा को केवल चिकित्सा आंकड़ों तक सीमित न रखते हुए बच्चों और उनके परिवारों की वास्तविक चुनौतियों को भी सामने रखा। उन्होंने कहा कि इलाज में देरी गंभीर परिणाम दे सकती है, जबकि समय पर उपचार बच्चे को बेहतर और सामान्य जीवन जीने का अवसर दे सकता है।
उन्होंने भारत, ऑस्ट्रेलिया और ताइवान में अपने पेशेवर अनुभव साझा करते हुए स्वास्थ्य क्षेत्र में वैश्विक सहयोग, विशेषज्ञ प्रशिक्षण, तकनीकी नवाचार और ज्ञान के आदान-प्रदान की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के लिए केवल अल्पकालिक चिकित्सा अभियानों के बजाय स्थानीय स्तर पर विशेषज्ञ तैयार करने और स्थायी स्वास्थ्य व्यवस्था विकसित करने पर ध्यान देना जरूरी है।
तकनीक से दूरदराज के क्षेत्रों तक पहुंचेगी विशेषज्ञ चिकित्सा
कार्यक्रम में टेलीमेडिसिन, AI आधारित डायग्नोसिस, आधुनिक उपचार तकनीकों और मोबाइल कार्डियक केयर जैसी संभावनाओं पर भी चर्चा हुई। वक्ताओं ने बताया कि इन तकनीकों के माध्यम से दूरदराज और संसाधन सीमित क्षेत्रों में विशेषज्ञ हृदय चिकित्सा की पहुंच बढ़ाई जा सकती है।
विद्यार्थियों के लिए यह सत्र केवल अकादमिक चर्चा तक सीमित नहीं रहा। उन्हें यह समझने का अवसर मिला कि अलग-अलग देशों और समुदायों में स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियां किस प्रकार अलग होती हैं और भविष्य के पेशेवरों के रूप में वे अधिक समावेशी, संवेदनशील और प्रभावी स्वास्थ्य व्यवस्था के निर्माण में कैसे योगदान दे सकते हैं।
कलिंगा यूनिवर्सिटी ने कहा कि यह पहल विश्वविद्यालय की वैश्विक exposure, अंतरराष्ट्रीय सहभागिता और सार्थक ज्ञान-विनिमय की प्रतिबद्धता को दर्शाती है। विश्वविद्यालय अपने अंतरराष्ट्रीय विद्यार्थी समुदाय को वैश्विक विशेषज्ञों और महत्वपूर्ण मुद्दों से जोड़ने के लिए लगातार ऐसे संवाद मंच उपलब्ध करा रहा है।
कार्यक्रम का समन्वय अंतर्राष्ट्रीय प्रवेश एवं समन्वय टीम ने किया। इसमें परविंदर शेष, जितेश महंत, यशु रायकर और आयुषी गंगराडे की भूमिका रही।
कार्यक्रम का मुख्य संदेश रहा—हर धड़कन मायने रखती है और हर बच्चे को बेहतर जीवन का अवसर मिलना चाहिए।





