बिलासपुर, 24 सितम्बर 2026। छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने वैवाहिक विवाद से जुड़े एक मामले में अहम फैसला सुनाते हुए कहा कि पत्नी और उसकी बहनों को लगातार अभद्र वॉट्सऐप संदेश भेजना मानसिक क्रूरता की श्रेणी में आता है। कोर्ट ने अंबिकापुर कुटुंब न्यायालय के तलाक की अर्जी खारिज करने के आदेश को रद्द करते हुए पत्नी की अपील स्वीकार कर ली।
जस्टिस पार्थ प्रतीम साहू और जस्टिस सुषमा सावंत की युगलपीठ ने अर्चना सिंह और आनंद कुमार गुप्ता के विवाह को भंग करते हुए तलाक की डिक्री जारी की। दोनों का विवाह 5 दिसंबर 2021 को हुआ था।

दहेज में एयर कंडीशनर मांगने का आरोप
अर्चना सिंह ने आरोप लगाया था कि शादी के बाद पति उसके साथ मारपीट और गाली-गलौज करता था। साथ ही दहेज में एयर कंडीशनर की मांग की गई। मांग पूरी नहीं होने पर गहने बेचने और जान से मारने की धमकी देने का भी आरोप लगाया गया।

परेशान होकर अर्चना अपने मायके अंबिकापुर आ गई। इसके बाद भी पति ने उसके मोबाइल और उसकी दो छोटी बहनों के मोबाइल पर वॉट्सऐप के जरिए अभद्र संदेश भेजे।
वॉट्सऐप चैट को माना महत्वपूर्ण साक्ष्य
अर्चना ने तलाक के लिए अंबिकापुर कुटुंब न्यायालय में याचिका दायर की थी, लेकिन फैमिली कोर्ट ने इसे खारिज कर दिया। इसके बाद उसने हाई कोर्ट में अपील की। सुनवाई के दौरान पति न्यायालय में उपस्थित नहीं हुआ।
हाई कोर्ट ने वॉट्सऐप चैट को महत्वपूर्ण साक्ष्य माना और पति के लगातार अभद्र व्यवहार को पत्नी के लिए गंभीर मानसिक पीड़ा का कारण बताया। कोर्ट ने इसे मानसिक क्रूरता माना और विवाह विच्छेद की डिक्री जारी कर दी।
कोर्ट ने अर्चना को स्थायी भरण-पोषण के लिए अलग से आवेदन प्रस्तुत करने की स्वतंत्रता भी दी है।




