अंबिकापुर, 01 अक्टूबर 2026। सरगुजा जिले के उदयपुर वन परिक्षेत्र के अलकापुरी जंगल में बुधवार रात झटका तार की चपेट में आने से एक हाथी के बच्चे की मौत हो गई। घटना के बाद हाथियों के दल ने पूरी रात चिंघाड़ लगाई, जिससे आसपास के ग्रामीणों में दहशत फैल गई।
बताया गया कि पिछले कई दिनों से 27 हाथियों का दल उदयपुर क्षेत्र में विचरण कर रहा है। इनमें 15 हाथी पहले से मौजूद थे, जबकि कोरिया जिले से 12 हाथियों का एक और दल यहां पहुंचा है। हाथियों के कारण क्षेत्र में फसलों को नुकसान हो रहा है।

हाथियों से फसल बचाने के लिए अलकापुरी क्षेत्र में किसानों ने खेतों के आसपास एक किलोमीटर से अधिक दूरी तक झटका तार लगाया हुआ है। बुधवार रात करीब 10 बजे दल के साथ चल रहा हाथी का बच्चा इसी तार में उलझ गया। तार उसकी सूंड और पैर में फंस गया, जिसके कारण वह लगातार करंट की चपेट में रहा और मौके पर ही उसकी मौत हो गई।

पूरी रात चिंघाड़ते रहे हाथी
हाथी के बच्चे की मौत के बाद उसके साथ मौजूद हाथियों ने पूरी रात जोर-जोर से चिंघाड़ लगाई। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार रात करीब 10 बजे के बाद हाथियों की आवाज से अलकापुरी मोहल्ला दहल उठा। ग्रामीण डर के कारण अपने घरों में दुबके रहे और पूरी रात इलाके में भय का माहौल बना रहा।
वन विभाग ने शुरू की जांच
घटना की सूचना मिलते ही वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी और वन अमला मौके पर पहुंचा। विभाग ने हाथी के बच्चे के शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम की तैयारी शुरू कर दी है।
वन विभाग इस बात की जांच कर रहा है कि खेत में लगाया गया झटका तार किसने, किस तरीके से और कितनी क्षमता का लगाया था। खेत की पहचान भी कर ली गई है। बताया जा रहा है कि यह भूमि झिरमिटी सरपंच चंदन एक्का के परिवार की है। नियमों के अनुसार कार्रवाई की तैयारी की जा रही है।
दोषी पाए जाने पर संबंधित व्यक्ति के खिलाफ वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत कार्रवाई की जा सकती है।
क्या होता है झटका तार?
झटका तार या सोलर फेंसिंग का इस्तेमाल किसान जंगली जानवरों से फसल बचाने के लिए करते हैं। इसमें सौर ऊर्जा और बैटरी के माध्यम से तार में करंट प्रवाहित किया जाता है। सामान्य स्थिति में करंट रुक-रुककर झटका देता है, जिससे जानवर तार से दूर हो जाता है।
हालांकि, तार में कोई जानवर उलझ जाए या फेंसिंग गलत तरीके से लगाई गई हो तो यह जानलेवा साबित हो सकती है। खेतों के चारों ओर आमतौर पर लोहे या लकड़ी के खंभों पर दो-तीन लेयर में तार लगाए जाते हैं। घटना के बाद वन विभाग अब फेंसिंग की क्षमता और उसके लगाए जाने के तरीके की जांच कर रहा है।



