रायपुर, 11 अक्टूबर। शारदीय नवरात्र का पावन पर्व आज रविवार से शुरू हो गया है। अगले नौ दिनों तक देशभर में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की विधि-विधान से पूजा-अर्चना की जाएगी। नवरात्र के दौरान भक्त व्रत रखकर माता की आराधना करते हैं और परिवार में सुख-शांति, समृद्धि, खुशहाली तथा जीवन में सफलता की कामना करते हैं। हिंदू धर्म में नवरात्र को शक्ति की उपासना और साधना का विशेष पर्व माना जाता है। प्रत्येक दिन मां दुर्गा के एक विशेष स्वरूप की पूजा की जाती है।
पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा
नवरात्र के पहले दिन मां शैलपुत्री की आराधना की जाती है। मां शैलपुत्री को पर्वतराज हिमालय की पुत्री माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, उनकी पूजा करने से भक्तों को शक्ति, स्थिरता और आत्मविश्वास का आशीर्वाद मिलता है। भक्त नवरात्र की शुरुआत कलश स्थापना और मां शैलपुत्री की पूजा के साथ करते हैं।

दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की आराधना
नवरात्र के दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की पूजा की जाती है। उनका स्वरूप तप, त्याग, संयम और साधना का प्रतीक माना जाता है। मान्यता है कि उनकी आराधना से व्यक्ति को धैर्य, आत्मबल और कठिन परिस्थितियों का सामना करने की शक्ति प्राप्त होती है।

तीसरे दिन मां चंद्रघंटा की पूजा
तीसरे दिन मां चंद्रघंटा की उपासना की जाती है। उनके मस्तक पर अर्धचंद्र सुशोभित होने के कारण उन्हें चंद्रघंटा कहा जाता है। धार्मिक मान्यताओं में मां का यह स्वरूप साहस और पराक्रम का प्रतीक है। भक्त उनकी पूजा कर भय और परेशानियों से मुक्ति की कामना करते हैं।
चौथे दिन मां कूष्मांडा की आराधना
नवरात्र के चौथे दिन मां कूष्मांडा की पूजा होती है। उन्हें सृष्टि की रचनात्मक ऊर्जा और शक्ति का स्वरूप माना जाता है। मान्यता है कि उनकी आराधना से जीवन में सकारात्मकता, सुख-समृद्धि और खुशहाली आती है।
पांचवें दिन मां स्कंदमाता की पूजा
पांचवें दिन मां स्कंदमाता की उपासना की जाती है। उन्हें भगवान कार्तिकेय की माता माना जाता है। मां का यह स्वरूप ममता और वात्सल्य का प्रतीक है। भक्त उनसे बुद्धि, शांति, संतान सुख और परिवार की खुशहाली का आशीर्वाद मांगते हैं।
छठे दिन मां कात्यायनी की आराधना
नवरात्र के छठे दिन मां कात्यायनी की पूजा की जाती है। उन्हें शक्ति, साहस और पराक्रम की देवी माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, उनकी उपासना से भक्तों को आत्मबल और मनोकामनाओं की पूर्ति का आशीर्वाद मिलता है। कई श्रद्धालु वैवाहिक जीवन में सुख-शांति की कामना से भी मां की पूजा करते हैं।
सातवें दिन मां कालरात्रि की पूजा
सातवें दिन मां कालरात्रि की आराधना की जाती है। मां का स्वरूप उग्र माना जाता है, लेकिन उन्हें भक्तों का कल्याण करने वाली देवी भी कहा जाता है। मान्यता है कि उनकी पूजा से भय दूर होता है और जीवन में साहस तथा आत्मविश्वास बढ़ता है।
अष्टमी पर मां महागौरी की उपासना
नवरात्र के आठवें दिन मां महागौरी की पूजा की जाती है। उन्हें शांति, पवित्रता और सौम्यता का प्रतीक माना जाता है। इस दिन अनेक घरों और मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना के साथ कन्या पूजन भी किया जाता है। श्रद्धालु मां से परिवार की सुख-शांति और समृद्धि की प्रार्थना करते हैं।
नवमी पर मां सिद्धिदात्री की पूजा, कन्या पूजन और हवन का महत्व
नवरात्र के नौवें और अंतिम दिन मां सिद्धिदात्री की आराधना की जाती है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, मां सिद्धिदात्री भक्तों को सिद्धियां और आध्यात्मिक शक्ति प्रदान करती हैं। नवमी के अवसर पर कई परिवारों में कन्या पूजन और हवन किया जाता है। भक्त पूजा-अर्चना के माध्यम से जीवन में सफलता, सुख-समृद्धि और शांति की कामना करते हैं।
शक्ति, साधना और आस्था का पर्व है नवरात्र
शारदीय नवरात्र के नौ दिन मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की उपासना के लिए विशेष माने जाते हैं। प्रत्येक स्वरूप अपने भीतर साहस, धैर्य, संयम, ममता, शक्ति और सकारात्मकता का संदेश समेटे हुए है। भक्त इन नौ दिनों में पूजा-पाठ, व्रत और साधना के माध्यम से मां दुर्गा का आशीर्वाद प्राप्त करने की कामना करते हैं।
(इनपुट: आईएएनएस)



