मुंबई। बॉलीवुड अभिनेता अक्षय कुमार का मानना है कि हॉरर और कॉमेडी का मेल दर्शकों को मनोरंजन का अलग अनुभव देता है। डरावने दृश्यों के बीच अचानक आने वाले मजेदार पल न केवल तनाव को खत्म करते हैं, बल्कि दर्शकों को हंसने पर भी मजबूर कर देते हैं। अपनी फिल्म ‘भूत बंगला’ के वर्ल्ड टेलीविजन प्रीमियर के मौके पर अक्षय कुमार ने फैंटेसी फिल्मों की कहानी, हॉरर-कॉमेडी के आकर्षण और कॉमेडी में टाइमिंग की अहमियत पर अपने विचार साझा किए। फिल्म का प्रीमियर जी सिनेमा पर होने जा रहा है, जिससे दर्शक घर बैठे परिवार के साथ इस मनोरंजक फिल्म का आनंद ले सकेंगे।
फैंटेसी की दुनिया में भी जरूरी है कहानी के पीछे की वजह
अक्षय कुमार के मुताबिक, किसी भी फिल्म की कहानी में घटनाओं और किरदारों के पीछे ठोस वजह होनी चाहिए। फैंटेसी फिल्मों में भले ही असाधारण किरदार और काल्पनिक परिस्थितियां दिखाई जाती हों, लेकिन दर्शकों को यह समझ आना चाहिए कि ऐसा क्यों हो रहा है। उन्होंने कॉमिक बुक का उदाहरण देते हुए कहा कि उसमें भी हर किरदार की ताकत और उसकी विशेषताओं के पीछे कोई न कोई कारण होता है।

अभिनेता का मानना है कि जब किसी किरदार की शक्तियों, उसके बदलाव या असाधारण परिस्थितियों के पीछे की वजह स्पष्ट होती है, तो दर्शकों के लिए उस काल्पनिक दुनिया को समझना और उससे जुड़ना आसान हो जाता है। कहानी में तर्क और कल्पना का संतुलन फिल्म को ज्यादा प्रभावशाली बना सकता है।

हॉरर के बीच कॉमेडी का तड़का बनाता है फिल्म को मजेदार
हॉरर-कॉमेडी फिल्मों की लोकप्रियता पर बात करते हुए अक्षय कुमार ने कहा कि डर और हंसी का एक साथ अनुभव दर्शकों के लिए बेहद दिलचस्प होता है। डरावने दृश्य देखते समय दर्शक तनाव में रहते हैं और आगे क्या होगा, इसका इंतजार करते हैं। इसी बीच अचानक कोई मजेदार घटना या संवाद सामने आता है, जिससे तनाव खत्म हो जाता है और दर्शक हंसने लगते हैं।
उन्होंने कहा कि कॉमेडी को जबरदस्ती कहानी में शामिल नहीं किया जा सकता। हास्य परिस्थितियों और किरदारों के व्यवहार से स्वाभाविक रूप से निकलना चाहिए। ‘भूत बंगला’ में भी यही कोशिश की गई है कि दर्शकों को डर और हंसी, दोनों का अनुभव मिले। फिल्म देखते समय कभी डर महसूस हो और अगले ही पल हंसी छूट जाए, यही इस शैली की खासियत है।
अक्षय कुमार ने दर्शकों को फिल्म के प्रीमियर के दौरान परिवार के साथ बैठकर इसका आनंद लेने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि फिल्म में कुछ ऐसे पल भी हो सकते हैं, जहां दर्शक अपनी हंसी रोक नहीं पाएंगे और उन्हें इसकी उम्मीद भी नहीं होगी।
कॉमेडी में डायलॉग से ज्यादा अहम है सही टाइमिंग
कॉमेडी सीन में अपने अंदाज और अभिनय की भूमिका पर अक्षय कुमार ने कहा कि हास्य काफी हद तक सही समय पर सही प्रतिक्रिया देने और आसपास की चीजों को बारीकी से देखने पर निर्भर करता है। रोजमर्रा की जिंदगी में कई ऐसी परिस्थितियां सामने आती हैं, जिनमें हास्य छिपा होता है, लेकिन उस समय लोगों को इसका एहसास नहीं होता।
एक अभिनेता का काम ऐसी छोटी-छोटी बातों को पर्दे पर प्रभावी ढंग से पेश करना है। कई बार चेहरे का सामान्य हावभाव, किसी बात पर थोड़ी देर रुकना या परिस्थिति के अनुसार दी गई सहज प्रतिक्रिया लंबे संवाद से ज्यादा हंसा सकती है।
उन्होंने बताया कि ‘भूत बंगला’ जैसी फिल्म में परिस्थितियां असामान्य होती हैं, लेकिन किरदार की प्रतिक्रिया सहज और गंभीर होनी चाहिए। जब अभिनेता अपने किरदार को पूरी गंभीरता से निभाता है और दर्शक उस स्थिति पर हंसते हैं, तो कॉमेडी का असर और बढ़ जाता है।
अक्षय कुमार के मुताबिक, हॉरर-कॉमेडी की असली ताकत डर और हंसी के बीच सही संतुलन बनाने में है। कहानी में कल्पना के साथ तर्क, अभिनय में सहजता और कॉमेडी में सही टाइमिंग हो, तो दर्शकों का मनोरंजन और भी यादगार बन सकता है।


