प्रमोद मिश्रा
रायपुर, 06 अगस्त 2025

छत्तीसगढ़ में बहुचर्चित महादेव सट्टा ऐप घोटाले में फंसे आरोपी शेयर ब्रोकर गोविंद केडिया को हाईकोर्ट से करारा झटका लगा है। जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की सिंगल बेंच ने उसकी जमानत याचिका को खारिज कर दिया है। केडिया ने प्रवर्तन निदेशालय (ED) पर झूठे केस में फंसाने का आरोप लगाते हुए कोर्ट से राहत मांगी थी, लेकिन ED ने ब्लैकमनी को वैध करने में उसकी ‘अहम भूमिका’ उजागर कर जमानत का विरोध किया।
याचिकाकर्ता गोविंद केडिया ने वरिष्ठ अधिवक्ता किशोर भादुड़ी के माध्यम से हाईकोर्ट में जमानत याचिका दाखिल की थी। सुनवाई के दौरान केडिया की तरफ से यह दलील दी गई कि उसे बिना ठोस साक्ष्यों के फंसाया गया है और ED ने केवल सहआरोपियों के बयानों के आधार पर उसे आरोपी बनाया है। केडिया की तरफ से यह भी कहा गया कि वह जांच में पूरा सहयोग कर रहा है।
लेकिन ED ने कोर्ट में जोरदार तरीके से जमानत का विरोध किया। ED की तरफ से बताया गया कि गोविंद केडिया महादेव सट्टा ऐप घोटाले के प्रमोटरों में से एक है और केस के मुख्य आरोपी विकास छापरिया से उसके गहरे संबंध हैं। केडिया पर आरोप है कि उसने सट्टा ऐप के जरिए उत्पन्न काले धन को वैध करने (मनी लॉन्ड्रिंग) की पूरी प्लानिंग में सक्रिय भूमिका निभाई है।
गौरतलब है कि 7 दिसंबर 2024 को ED ने केडिया को रायपुर की विशेष पीएमएलए कोर्ट में पेश कर रिमांड पर लिया था। हाईकोर्ट में सुनवाई के बाद कोर्ट ने बीते दिनों फैसला सुरक्षित रखा था, जिस पर 5 अगस्त 2025 को आदेश सुनाया गया।
हाईकोर्ट ने माना कि मामले में केडिया की भूमिका गंभीर है और प्रथम दृष्टया उसके खिलाफ पर्याप्त सामग्री मौजूद है, ऐसे में उसे राहत नहीं दी जा सकती।





