बिलासपुर, 09 सितंबर 2025 छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले से फर्जीवाड़े का सनसनीखेज मामला सामने आया है। यहां की तीन छात्राओं ने फेक EWS (आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग) प्रमाणपत्र बनवाकर NEET-UG की परीक्षा पास की और मेडिकल कॉलेजों में MBBS की सीटें हासिल कर लीं। जांच में फर्जीवाड़ा पकड़ में आने के बाद अब तीनों छात्राओं का एडमिशन निरस्त कर दिया गया है।
फर्जीवाड़े में शामिल छात्राओं की पहचान सुहानी सिंह (पिता सुधीर कुमार सिंह, निवासी सीपत रोड लिंगियाडीह), श्रेयांशी गुप्ता (भाजपा उत्तर मंडल अध्यक्ष सतीश गुप्ता की भतीजी, निवासी सरकंडा) और भाव्या मिश्रा (पिता सूरज कुमार मिश्रा, निवासी सरकंडा) के रूप में हुई है।

बिलासपुर तहसीलदार गरिमा ठाकुर ने पुष्टि की कि छात्राओं के नाम पर पेश किए गए EWS प्रमाणपत्र फर्जी हैं। न तो उनके नाम से कभी आवेदन आया और न ही तहसील कार्यालय से ऐसे किसी प्रमाणपत्र को जारी किया गया। जांच में मिले दस्तावेजों पर हस्ताक्षर और सील भी असली नहीं पाए गए।
NEET एडमिशन प्रक्रिया के दौरान संचालक चिकित्सा शिक्षा (DME) ने दस्तावेजों को वेरिफिकेशन के लिए तहसील भेजा था। तहसील की रिपोर्ट में साफ लिखा गया कि प्रमाणपत्र नियमों के तहत जारी ही नहीं हुए। रिपोर्ट कलेक्टर संजय अग्रवाल को सौंपी गई।
छात्राओं को 8 सितंबर तक सही दस्तावेज पेश करने और स्पष्टीकरण देने का मौका दिया गया, लेकिन वे प्रमाणपत्र जमा नहीं कर सकीं। इसके बाद नियमों के तहत उनका एडमिशन रद्द कर दिया गया। अब तीनों इस साल किसी भी मेडिकल कॉलेज में दाखिला नहीं ले पाएंगी।
छात्राओं के परिजनों का आरोप है कि उन्होंने नियमानुसार ऑनलाइन आवेदन किया था, लेकिन तहसील कार्यालय में कागज गायब कर दिए गए। सील और हस्ताक्षर में हेरफेर वहीं हुआ होगा। इस मामले में तहसील के क्लर्क प्रहलाद सिंह नेताम को नोटिस देकर प्रभार से हटा दिया गया है।
NEET-UG में MBBS समेत मेडिकल कोर्सेस के लिए काउंसलिंग होती है। सामान्य वर्ग के आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों को 10% आरक्षण EWS कोटे के तहत मिलता है। इसी का लाभ उठाने के लिए छात्राओं ने फर्जी सर्टिफिकेट का सहारा लिया था।





