प्रमोद कुमार
रायपुर, 27 फरवरी 2026।
छत्तीसगढ़ शासन की महत्वाकांक्षी चिरायु योजना (राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम) आज बस्तर के दुर्गम वनांचल में उन मासूमों के लिए जीवनदायिनी साबित हो रही है, जिनके परिवार आर्थिक और सामाजिक कठिनाइयों से जूझ रहे हैं।

बस्तर के ग्राम भोंड की 6 वर्षीय अंजलि कश्यप का जन्मजात नाक का बाहरी ट्यूमर उसके और उसके परिवार के लिए दर्द और चिंता का कारण बना। इस कठिन घड़ी में परिवार पर तब दुखों का पहाड़ टूट पड़ा जब इलाज की प्रारंभिक प्रक्रिया के दौरान ही उसके पिता का निधन हो गया। आर्थिक तंगी और घर की बिगड़ती स्थिति ने अंजलि की माँ देवकी कश्यप को उपचार छोड़ने पर मजबूर कर दिया।
ऐसे समय में चिरायु टीम ने उम्मीद की किरण जलाई। डॉ. गौरव चौरसिया और डॉ. रेखा जैन के नेतृत्व में टीम ने बार-बार अंजलि के घर जाकर परिवार को भावनात्मक संबल दिया और बीमारी की गंभीरता समझाते हुए उपचार के लिए प्रेरित किया। कलेक्टर के मार्गदर्शन और स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के समन्वय में न केवल निःशुल्क इलाज की गारंटी दी गई, बल्कि दुर्गम इलाके होने के बावजूद चिरायु वाहन से अंजलि को जिला अस्पताल महारानी जगदलपुर तक पहुँचाया गया। टीम ने बालिका का आयुष्मान कार्ड बनवाने में भी मार्गदर्शन किया।
अंततः 12 मई 2024 को रायपुर के नवकार हॉस्पिटल में प्रसिद्ध चिकित्सक डॉ. रमेश जैन ने सफल सर्जरी कर अंजलि को नया जीवन और नया चेहरा दिया।
इस पूरी प्रक्रिया में स्वास्थ्य विभाग के मैदानी अमले की भूमिका अहम रही। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. संजय बसाक और राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की जिला कार्यक्रम प्रबंधक रीना लक्ष्मी के समन्वय से योजना का लाभ समय पर सुनिश्चित हुआ। जिला प्रारंभिक हस्तक्षेप केंद्र प्रबंधक शिवम पाराशर, खंड चिकित्सा अधिकारी डॉ. नारायण सिंह नाग, और बीपीएम राजेन्द्र कुमार बघेल ने जमीनी स्तर पर हर बाधा दूर कर केस की निगरानी सुनिश्चित की।
आज अंजलि पूरी तरह स्वस्थ है और उसकी मुस्कान चिरायु योजना की सार्थकता का प्रतीक बन गई है। अंजलि की माँ और ग्रामीणों ने शासन की इस कल्याणकारी पहल की सराहना करते हुए इसे बस्तर के वनांचल में उम्मीद की नई किरण बताया है।





