बिलासपुर, 26 मार्च 2026: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने कर्मचारियों के प्रमोशन को लेकर अहम फैसला सुनाया है। जस्टिस संजय अग्रवाल और जस्टिस अरविंद कुमार वर्मा की डिवीजन बेंच ने स्पष्ट किया कि कर्मचारियों के लिए पदोन्नति कोई मौलिक अधिकार नहीं है।

कोर्ट ने राज्य के नगरीय प्रशासन विभाग के 2017 के भर्ती नियमों को चुनौती देने वाली याचिकाएं खारिज कर दीं। इसके साथ ही यह साफ कर दिया कि राजस्व निरीक्षक (RI) को मुख्य नगर पालिका अधिकारी (CMO) क्लास-बी पद पर प्रमोट करना पूरी तरह संवैधानिक है और किसी भी कर्मचारी के मौलिक अधिकार का उल्लंघन नहीं करता।
हाईकोर्ट ने कहा कि पदोन्नति का निर्णय सरकार और प्रशासन के नीतिगत दायरे में आता है, किसी कर्मचारी को प्रमोशन पाने का निहित अधिकार नहीं होता। केवल नियमों के अनुसार पदोन्नति के लिए विचार किए जाने का अधिकार कर्मचारी के पास होता है।
साथ ही कोर्ट ने राज्य सरकार के आदेश को भी सही ठहराया, जिसमें राजस्व निरीक्षकों के अनुभव की अनिवार्य अवधि 6 साल से घटाकर 5 साल कर दी गई थी। यह वन टाइम रियायत जनहित में दी गई थी और इसे अवैध नहीं ठहराया जा सकता।
इस फैसले के साथ ही CMO पद पर राजस्व निरीक्षकों के लिए पदोन्नति की प्रक्रिया पूरी तरह से साफ हो गई है, और याचिकाकर्ता यह साबित नहीं कर पाए कि उनके अधिकारों का उल्लंघन हुआ है।



