सतीश शर्मा
रायपुर, 9 अप्रैल 2026। राजधानी रायपुर सहित देशभर में सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट के नए नियम लागू हो गए हैं। इसके तहत अब जिन कॉलोनियों, सोसायटी, अस्पताल, मॉल या कमर्शियल संस्थानों से रोजाना 100 किलो या उससे अधिक कचरा निकलता है, उन्हें उसी परिसर में कचरे की प्रोसेसिंग करनी होगी। ऐसा नहीं करने पर नगर निगम द्वारा अलग से शुल्क वसूला जाएगा।

नए नियम अप्रैल 2026 से प्रभावी हो चुके हैं, हालांकि स्थानीय निकायों में इसकी पूरी व्यवस्था अभी विकसित की जा रही है। निगम द्वारा सर्वे और बैठकें शुरू कर दी गई हैं, ताकि बड़े स्तर पर कचरा उत्पन्न करने वाले संस्थानों की पहचान की जा सके।
अब केवल गीला और सूखा कचरा नहीं, बल्कि चार श्रेणियों में कचरे का पृथक्करण अनिवार्य किया गया है—
- गीला कचरा (रसोई व जैविक)
- सूखा कचरा (प्लास्टिक, कागज, धातु आदि)
- सैनेटरी कचरा
- खतरनाक कचरा
गीले कचरे को कंपोस्ट या बायोगैस में बदला जा सकता है, जबकि सूखे कचरे को रिसाइक्लिंग के लिए भेजना होगा।
नियम लागू होने से पहले सभी संस्थानों को केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के ईपीआर (Extended Producer Responsibility) पोर्टल पर पंजीयन कराना होगा। इसमें कचरे की मात्रा, प्रोसेसिंग तकनीक और नियमों के पालन की जानकारी देनी होगी। निगम द्वारा सत्यापन के बाद प्रमाणपत्र जारी किया जाएगा।
आने वाले समय में बड़ी कॉलोनियों और अपार्टमेंट्स को अपने परिसर में ही कचरा प्रोसेसिंग यूनिट स्थापित करनी होगी। इससे शहर में कचरे का बोझ कम होगा और स्थानीय स्तर पर समाधान मिलेगा।
विशेषज्ञों के अनुसार एक व्यक्ति औसतन 500 ग्राम कचरा उत्पन्न करता है। इस हिसाब से 5 सदस्यों के परिवार से करीब 3 किलो कचरा रोज निकलता है। यदि किसी कॉलोनी में 50 परिवार हैं, तो वहां प्रतिदिन लगभग 150 किलो कचरा उत्पन्न होगा, जो इसे ‘बल्क वेस्ट प्रोड्यूसर’ की श्रेणी में लाता है।
नगर निगम द्वारा शहर की कॉलोनियों, अपार्टमेंट्स और संस्थानों की वार्डवार सूची तैयार की जा रही है। इसके जरिए बड़े कचरा उत्पादकों को चिन्हित कर उन्हें नियमों के पालन के लिए प्रेरित किया जाएगा।
नगर निगम के अपर आयुक्त विनोद पांडेय के अनुसार, इस दिशा में तेजी से काम किया जा रहा है और जल्द ही इसे जमीनी स्तर पर लागू किया जाएगा।



