सतीश शर्मा
रायपुर, 28 अप्रैल 2026/ ग्रामोदय बुनकर सहकारी समिति ने अपने सामूहिक प्रयास, मेहनत और दूरदृष्टि के बल पर ऐसी सफलता की कहानी रची है, जो न केवल आर्थिक उन्नति का प्रतीक है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि ग्रामीण महिलाएँ यदि अवसर और सहयोग प्राप्त करें, तो वे किसी भी क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धियाँ हासिल कर सकती हैं। धमतरी जिले के छोटे से ग्राम नारी में आज आत्मनिर्भरता, परंपरा और नवाचार का अद्भुत संगम देखने को मिलता है।

नारी गाँव में पहले बुनाई प्रमुख आजीविका नहीं थी, लेकिन पड़ोसी राज्य ओडिशा में संबलपुरी साड़ियों की बढ़ती मांग को देखते हुए समिति ने इस क्षेत्र में कदम रखा। संबलपुरी साड़ियाँ अपनी विशेष इकत डिजाइन और आकर्षक रंगों के लिए जानी जाती हैं, जिन्हें बनाने के लिए उच्च कौशल और धैर्य की आवश्यकता होती है।
छत्तीसगढ़ शासन द्वारा समिति को आत्मनिर्भर बनाने के लिए शासकीय वस्त्र उत्पादन कार्यक्रम के अंतर्गत नियमित रूप से धागा प्रदाय किया जा रहा है। इससे बुनकरों को नियमित रोजगार और समितियों को आर्थिक सहायता मिल रही है। साथ ही नवीन बुनाई प्रशिक्षण और नए करघों के वितरण से उत्पादन क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।
आज समिति द्वारा तैयार की गई साड़ियों की बिक्री मुख्य रूप से ओडिशा के बाजारों में होती है। वर्तमान में समिति हर महीने 300-400 साड़ियों का उत्पादन कर रही है, जिससे मासिक कारोबार 3 से 4 लाख रुपये तक पहुँच चुका है—जो ग्रामीण स्तर पर एक बड़ी उपलब्धि है।
इस पहल ने न केवल आय के स्रोत बढ़ाए हैं, बल्कि महिलाओं को आर्थिक स्वतंत्रता और सामूहिक निर्णय लेने की क्षमता भी दी है। जो महिलाएँ पहले इस कार्य से अनभिज्ञ थीं, वे आज कुशल बुनकर बन चुकी हैं। पहले जहाँ वे 300-350 रुपये प्रतिदिन कमाती थीं, वहीं अब उनकी आय बढ़कर 550-600 रुपये प्रतिदिन हो गई है। भविष्य में कौशल उन्नयन के बाद यह आय 1000-1200 रुपये प्रतिदिन तक पहुँचने की संभावना है।
ग्राम नारी की सहकारी समिति आज मजबूती से आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रही है। यदि इसे ब्रांडिंग, डिजिटल मार्केटिंग और नए बाजारों तक पहुँच का सहयोग मिले, तो यह और बड़े स्तर पर अपनी पहचान बना सकती है। यह कहानी साबित करती है कि जब सरकारी सहयोग और समुदाय की मेहनत साथ आते हैं, तो छोटे गाँव भी बड़ी सफलता की मिसाल बन जाते हैं।



