नेशनल डेस्क
नई दिल्ली, 21 मई 2026। राजधानी दिल्ली के कमला नगर स्थित आर्य समाज मंदिर और भारतीय हिंदू शुद्धि सभा एक बार फिर चर्चा में हैं। संस्था का दावा है कि यहां हर सप्ताह 400 से 500 लोगों की “घर वापसी” कराई जा रही है। शुद्धि सभा के पदाधिकारियों के अनुसार, मुस्लिम और ईसाई समुदाय से जुड़े लोग वैदिक रीति-रिवाजों के जरिए हिंदू धर्म स्वीकार कर रहे हैं।

कमला नगर की बिरला लेन में स्थित छोटे से कार्यालय में वर्षों पुराने रिकॉर्ड सुरक्षित रखे गए हैं। संस्था से जुड़े लोगों का कहना है कि सुरक्षा कारणों से इस अभियान को सार्वजनिक रूप से प्रचारित नहीं किया जाता। हाल ही में एक मुस्लिम युवती ने हिंदू युवक से विवाह की इच्छा जताते हुए वैदिक विधि से धर्म परिवर्तन किया। हवन, पूजा और वैदिक मंत्रोच्चार के बाद उसे नया हिंदू नाम दिया गया।
भारतीय हिंदू शुद्धि सभा के महामंत्री सुभाष चंद्र दुआ का दावा है कि यह आंदोलन आर्य समाज और स्वामी श्रद्धानंद की परंपरा से जुड़ा है। उनके मुताबिक, 1923 में आगरा के रायभा गांव में बड़े स्तर पर मलकाना राजपूतों की “घर वापसी” कराई गई थी। संस्था का दावा है कि वर्तमान में हर साल करीब ढाई लाख लोग हिंदू धर्म में वापसी कर रहे हैं।
सभा का यह भी कहना है कि उनका नेटवर्क विदेशों तक फैला है। अमेरिका के टेक्सास में रहने वाले अनवर रजा और उनकी पत्नी जारा खान ने भी वैदिक रीति से हिंदू धर्म अपनाया। शुद्धिकरण के बाद उनके नाम नरेश सिंह राजपूत और जारा सिंह रखे गए। नरेश का दावा है कि उन्होंने वर्षों पहले नमाज और मांसाहार छोड़ दिया था और धीरे-धीरे सनातन परंपराओं की ओर लौटे।
संस्था के पदाधिकारियों का कहना है कि धर्म परिवर्तन की पूरी प्रक्रिया कानूनी तरीके से होती है। आवेदन, आयु प्रमाण और सहमति पत्र के बाद ही वैदिक रीति से शुद्धिकरण कराया जाता है। साथ ही, सुरक्षा कारणों से धर्म परिवर्तन करने वालों की पहचान गोपनीय रखी जाती है।



