नई दिल्ली/चेन्नई, 05 जून 2026। तमिलनाडु भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष के. अन्नामलाई ने भारतीय जनता पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन ने उनका इस्तीफा तत्काल प्रभाव से स्वीकार कर लिया है। इस फैसले के बाद तमिलनाडु की राजनीति में नई चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है और अन्नामलाई की अगली राजनीतिक पारी को लेकर अटकलें तेज हो गई हैं।
पार्टी की ओर से जारी आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति में बताया गया कि के. अन्नामलाई ने भाजपा की प्राथमिक सदस्यता छोड़ने का फैसला किया है। भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव एवं मुख्यालय प्रभारी अरुण सिंह के हस्ताक्षर से जारी पत्र में स्पष्ट किया गया है कि राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन ने उनका इस्तीफा स्वीकार कर लिया है।

बताया जा रहा है कि पिछले कुछ समय से अन्नामलाई पार्टी में सक्रिय भूमिका को लेकर असहज महसूस कर रहे थे। हाल ही में उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और भाजपा अध्यक्ष नितिन नबीन से मुलाकात भी की थी। हालांकि इन मुलाकातों के बावजूद उन्होंने पार्टी छोड़ने का फैसला कर लिया।
2020 में भाजपा में हुए थे शामिल
पूर्व आईपीएस अधिकारी के. अन्नामलाई वर्ष 2020 में भाजपा में शामिल हुए थे। महज 10 महीनों के भीतर उन्हें तमिलनाडु भाजपा का प्रदेश अध्यक्ष बना दिया गया था। अपनी आक्रामक राजनीतिक शैली और बेबाक बयानों के कारण उन्होंने जल्द ही राज्य की राजनीति में अलग पहचान बना ली।
अन्नामलाई की प्रमुख उपलब्धियां
- 2020 में भाजपा में शामिल हुए।
- 10 महीने के भीतर तमिलनाडु भाजपा के सबसे युवा प्रदेश अध्यक्ष बने।
- 2021 विधानसभा चुनाव में खुद चुनाव हार गए, लेकिन भाजपा को 4 सीटें दिलाने में सफल रहे।
- लगभग 20 वर्षों बाद तमिलनाडु विधानसभा में भाजपा की वापसी हुई।
- 2024 लोकसभा चुनाव में राज्य में भाजपा का वोट शेयर 3.66% से बढ़कर 11.24% तक पहुंचा।
पोस्टरों से तेज हुई थीं अटकलें
इस्तीफे से पहले मदुरै में अन्नामलाई के समर्थकों द्वारा लगाए गए पोस्टरों ने राजनीतिक हलकों में चर्चाओं को हवा दे दी थी। इन पोस्टरों में अन्नामलाई को दक्षिण भारतीय सुपरस्टार रजनीकांत और अजित कुमार के साथ दिखाया गया था। पोस्टरों को लेकर कयास लगाए जा रहे थे कि अन्नामलाई भाजपा से अलग राजनीतिक रास्ता चुन सकते हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अन्नामलाई का भाजपा छोड़ना तमिलनाडु में पार्टी के लिए बड़ा झटका साबित हो सकता है। वहीं अब सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि वह भविष्य में किसी अन्य राजनीतिक दल से जुड़ते हैं या अपनी नई राजनीतिक पार्टी की शुरुआत करते हैं।



