वाराणसी, 15 जून 2026
सनातन धर्म की गरिमा, मंदिरों की स्वायत्तता और श्रद्धालुओं के सम्मान को लेकर काशी में आयोजित एक संगोष्ठी में देशभर से आए संत-महात्माओं, धर्माचार्यों और सनातन चिंतकों ने मंदिरों को सरकारी नियंत्रण से मुक्त कर संत समाज के नेतृत्व में संचालित किए जाने की मांग उठाई।

कार्यक्रम का आयोजन चिन्मयभारत न्यास के तत्वावधान में किया गया। संगोष्ठी में वक्ताओं ने कहा कि मंदिर केवल पूजा-अर्चना के केंद्र नहीं, बल्कि सनातन संस्कृति, राष्ट्र चेतना और सामाजिक समरसता के प्रमुख केंद्र हैं। उनकी पवित्रता और स्वतंत्रता बनाए रखना पूरे समाज की जिम्मेदारी है।
संगोष्ठी के मुख्य वक्ता पंडित अजीत मिश्रा ने कहा कि देश के कई प्रमुख मंदिरों में अव्यवस्था, भ्रष्टाचार और श्रद्धालुओं के साथ दुर्व्यवहार जैसी घटनाएं सामने आ रही हैं, जिससे समाज में चिंता बढ़ी है। उन्होंने हाल में काशी के काल भैरव मंदिर में श्रद्धालुओं के साथ कथित मारपीट तथा अयोध्या में चोरी की घटनाओं का उल्लेख करते हुए ऐसी घटनाओं पर रोक लगाने की आवश्यकता बताई।
उन्होंने कहा कि देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु काशी, अयोध्या और अन्य तीर्थस्थलों पर दर्शन और आध्यात्मिक शांति की भावना से पहुंचते हैं, लेकिन कई स्थानों पर उन्हें असुविधाओं और अव्यवस्था का सामना करना पड़ता है। मंदिरों का संचालन राजनीतिक या प्रशासनिक हस्तक्षेप से मुक्त होकर धर्माचार्यों, मठाधीशों और संतों के मार्गदर्शन में होना चाहिए।
कार्यक्रम में शांभवी पीठाधीश्वर स्वामी आनंद स्वरूप जी महाराज, गोवर्धन पीठ एवं द्वारका शारदा पीठ के प्रतिनिधि प्रेम झा, भाजपा प्रवक्ता गौरव मिश्रा, सनातन चिंतक अजय शर्मा, डॉ. ब्रह्मदेव चतुर्वेदी, प्रमोद कुमार दीक्षित, सदानंद तिवारी, पीयूष और राजेंद्र वैद्य सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
संगोष्ठी के अंत में मंदिरों की गरिमा, श्रद्धालुओं की सुरक्षा, पारदर्शी व्यवस्था तथा सनातन मूल्यों के संरक्षण के लिए व्यापक जनजागरण अभियान चलाने का संकल्प लिया गया। वक्ताओं ने कहा कि संत समाज के मार्गदर्शन में मंदिरों का संचालन होने से श्रद्धालुओं को बेहतर व्यवस्थाएं मिलेंगी और सनातन संस्कृति की प्रतिष्ठा और मजबूत होगी।




