भोपाल, 25 जून 2026। राजनीतिक रणनीतिकार डॉ. अतुल मलिकराम ने युवाओं से लोकतांत्रिक मूल्यों, सकारात्मक सोच और उत्कृष्ट आचरण के साथ राजनीति में सक्रिय भागीदारी निभाने का आह्वान किया है। उन्होंने कहा कि भारत दुनिया के सबसे युवा देशों में शामिल है और देश की बड़ी आबादी 18 से 35 वर्ष आयु वर्ग की है। ऐसे में युवाओं की राजनीति में भागीदारी लोकतंत्र को मजबूत बनाने के लिए बेहद आवश्यक है।
डॉ. मलिकराम ने कहा कि राजनीति केवल पद या सत्ता प्राप्त करने का माध्यम नहीं, बल्कि समाज और राष्ट्र निर्माण का सबसे प्रभावी मंच है। हालांकि पिछले कुछ वर्षों में राजनीति की नकारात्मक छवि, बढ़ती कटुता, व्यक्तिगत आरोप-प्रत्यारोप और अनावश्यक टकराव की घटनाओं ने कई प्रतिभाशाली युवाओं को इस क्षेत्र से दूर रखा है। उन्होंने कहा कि किसी भी व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए अच्छे और योग्य लोगों का उसमें प्रवेश जरूरी है।

उन्होंने कहा कि शिक्षा, रोजगार, स्वास्थ्य, तकनीक, पर्यावरण और उद्यमिता जैसे विषय सीधे तौर पर युवाओं के जीवन को प्रभावित करते हैं। ऐसे में इन क्षेत्रों से जुड़ी नीतियां बनाने वाले मंचों पर युवाओं की भागीदारी बढ़नी चाहिए, ताकि निर्णय अधिक प्रभावी और जनहितकारी बन सकें।
डॉ. मलिकराम के अनुसार युवा नई सोच, नई ऊर्जा और नवाचार की क्षमता लेकर आते हैं। वे समस्याओं के समाधान के लिए नए दृष्टिकोण प्रस्तुत करते हैं। यही कारण है कि दुनिया के कई लोकतांत्रिक देशों में युवाओं की राजनीतिक भागीदारी को प्रोत्साहित किया जा रहा है। भारत में भी समय की मांग है कि युवा केवल मतदाता बनकर न रहें, बल्कि नीति-निर्माण की प्रक्रिया में भी सक्रिय भूमिका निभाएं।
उन्होंने कहा कि राजनीति में सफलता का आधार केवल लोकप्रियता नहीं, बल्कि विश्वसनीयता होती है। किसी भी नेता की पहचान उसके चरित्र, व्यवहार और जनता के प्रति प्रतिबद्धता से बनती है। सम्मान, संवाद और सेवा के मार्ग पर चलने वाला व्यक्ति ही लंबे समय तक लोगों का विश्वास बनाए रख सकता है।
डॉ. मलिकराम ने महात्मा गांधी, सरदार वल्लभभाई पटेल और डॉ. भीमराव अंबेडकर का उदाहरण देते हुए कहा कि इन महान नेताओं ने सिद्धांतों, नैतिकता और जनसेवा के बल पर समाज को नई दिशा दी। उन्होंने युवाओं को सलाह दी कि राजनीति में आने से पहले जमीनी स्तर पर कार्य करें, क्षेत्र की समस्याओं को समझें, लोगों से संवाद स्थापित करें और समाजहित के कार्यों में सक्रिय भागीदारी निभाएं। उन्होंने कहा कि जनता का विश्वास भाषणों से नहीं, बल्कि निरंतर कार्य, संवेदनशीलता और समर्पण से अर्जित किया जाता है।




