27 Jun 2026, Sat

1040 विशिष्टजनों ने किए प्रथम ज्योतिर्लिंग के दर्शन: सोमनाथ यात्रा से लौटते ही रायपुर में हुआ भव्य अभिनंदन

सतीश शर्मा 

रायपुर, 26 जून 2026/ भारतीय संस्कृति, राष्ट्रीय स्वाभिमान और आध्यात्मिक चेतना को नई ऊर्जा देने वाली छत्तीसगढ़ शासन की महत्वाकांक्षी “सोमनाथ स्वाभिमान सांस्कृतिक यात्रा” आज सफलता के साथ संपन्न हुई। पांच दिवसीय इस ऐतिहासिक यात्रा के बाद प्रदेश के सभी जिलों से शामिल 1040 विशिष्टजन सकुशल रायपुर लौटे, जहां रायपुर रेलवे स्टेशन पर उनका आत्मीय, गरिमामय एवं भव्य स्वागत किया गया। यात्रियों के चेहरों पर संतोष, श्रद्धा और आत्मिक आनंद की झलक इस अभिनव यात्रा की सफलता का सबसे बड़ा प्रमाण बनी।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में आयोजित इस विशेष सांस्कृतिक यात्रा ने केवल श्रद्धालुओं को भारत के प्रथम ज्योतिर्लिंग भगवान सोमनाथ के दर्शन का अवसर ही नहीं दिया, बल्कि उन्हें देश की गौरवशाली सांस्कृतिक विरासत, आध्यात्मिक परंपरा और राष्ट्रीय एकात्मता का भी जीवंत अनुभव कराया। यात्रा ने यह संदेश भी दिया कि छत्तीसगढ़ सरकार विकास के साथ-साथ सांस्कृतिक चेतना, आध्यात्मिक मूल्यों और राष्ट्रीय गौरव को भी समान प्राथमिकता दे रही है।

 

 

इस यात्रा में प्रदेश के पद्मश्री सम्मान प्राप्त विभूतियों, राष्ट्रीय एवं राज्य सम्मान से सम्मानित कलाकारों, साहित्यकारों, संस्कृति कर्मियों, समाजसेवियों तथा अन्य विशिष्टजनों ने सहभागिता की। इससे छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोक संस्कृति, कला, साहित्य और सांस्कृतिक विरासत को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिली।

संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल के मार्गदर्शन तथा संस्कृति विभाग, छत्तीसगढ़ के सुव्यवस्थित प्रबंधन में आयोजित इस यात्रा की देशभर में सराहना हुई। भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय, गुजरात राज्य सरकार के समन्वय तथा सोमनाथ मंदिर ट्रस्ट के आत्मीय सहयोग से यात्रा का प्रत्येक चरण अत्यंत सुव्यवस्थित, सुरक्षित और गरिमामय वातावरण में संपन्न हुआ।

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यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं ने भगवान सोमनाथ के दिव्य दर्शन-पूजन के साथ मंदिर की ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक विरासत का अवलोकन किया। प्रतिभागियों ने भारत की सनातन परंपरा, सांस्कृतिक पुनर्जागरण और राष्ट्रीय स्वाभिमान के प्रतीक सोमनाथ धाम के महत्व को निकट से अनुभव किया। अनेक प्रतिभागियों ने अपने क्षेत्रों की पावन मिट्टी और नदियों का जल भगवान सोमनाथ को अर्पित कर छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान को राष्ट्रीय एकता के सूत्र से जोड़ने का संदेश दिया। इस अवसर पर श्रद्धालुओं ने सोमनाथ मंदिर के गौरवशाली इतिहास पर आधारित आकर्षक लाइट एंड साउंड शो का भी अवलोकन किया, जिसने मंदिर के पुनर्निर्माण, भारतीय सांस्कृतिक चेतना और राष्ट्रीय स्वाभिमान की प्रेरक गाथा को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया।

पूरी यात्रा के दौरान आवागमन, आवास, भोजन, चिकित्सा, सुरक्षा तथा अन्य सभी व्यवस्थाएं उच्च स्तर पर सुनिश्चित की गईं। संस्कृति एवं राजभाषा विभाग के संचालक डॉ. संजय कन्नौजे स्वयं विभागीय अधिकारियों एवं कर्मचारियों के साथ पूरी यात्रा में उपस्थित रहे और प्रत्येक यात्री की सुविधा का विशेष ध्यान रखा। यात्रियों ने व्यवस्था की सराहना करते हुए कहा कि शासन ने उन्हें परिवार जैसा स्नेह और सम्मान प्रदान किया।

यात्रा से लौटे प्रतिभागियों ने इसे अपने जीवन का अविस्मरणीय अनुभव बताते हुए कहा कि वर्षों से संजोई गई सोमनाथ दर्शन की उनकी इच्छा शासन की इस निःशुल्क और सुव्यवस्थित पहल से पूरी हो सकी। उन्होंने कहा कि भगवान सोमनाथ के दिव्य दर्शन, आध्यात्मिक वातावरण, ऐतिहासिक लाइट एंड साउंड शो तथा उत्कृष्ट यात्रा प्रबंधन ने उन्हें आत्मिक शांति के साथ भारतीय संस्कृति के प्रति नया गर्व प्रदान किया।

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रायपुर रेलवे स्टेशन पर लौटे श्रद्धालुओं का पारंपरिक रीति-रिवाज, पुष्पवर्षा, माल्यार्पण और आत्मीय अभिनंदन के साथ भव्य स्वागत किया गया। स्वागत समारोह के दौरान यात्रियों ने छत्तीसगढ़ शासन के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह यात्रा केवल तीर्थाटन नहीं, बल्कि सांस्कृतिक चेतना, राष्ट्रीय एकता और सामाजिक समरसता का प्रेरक अभियान रही।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की दूरदर्शी सोच के अनुरूप यह यात्रा इस बात का प्रमाण बनी कि छत्तीसगढ़ अपनी समृद्ध लोक संस्कृति, परंपराओं और आध्यात्मिक विरासत के संरक्षण के साथ-साथ राष्ट्र की सांस्कृतिक धरोहर से जन-जन को जोड़ने के लिए प्रतिबद्ध है। संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल के नेतृत्व में संस्कृति विभाग द्वारा किए गए सफल आयोजन ने यह भी सिद्ध किया कि इस तरह के आयोजन समाज में आत्मगौरव, राष्ट्रीय चेतना और सामाजिक सद्भाव को मजबूत करने का प्रभावी माध्यम बन सकते हैं।

सोमनाथ स्वाभिमान सांस्कृतिक यात्रा की सफलता ने छत्तीसगढ़ को राष्ट्रीय सांस्कृतिक परिदृश्य में नई पहचान प्रदान की है। भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय, गुजरात राज्य सरकार, सोमनाथ मंदिर ट्रस्ट तथा छत्तीसगढ़ शासन के समन्वित प्रयासों से संपन्न यह ऐतिहासिक यात्रा आने वाले समय में सांस्कृतिक पुनर्जागरण और राष्ट्रीय एकात्मता के क्षेत्र में एक अनुकरणीय उदाहरण के रूप में याद की जाएगी।

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