21 Aug 2026, Fri
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‘करंट से मौतें कब रुकेंगी?’ भाड़म हादसे पर हाईकोर्ट ने लिया स्वत: संज्ञान, CSPDCL और ऊर्जा सचिव से मांगा जवाब

बिलासपुर, 07 जुलाई 2026। छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले के कोटा विकासखंड अंतर्गत भाड़म गांव में करंट लगने से तीन लोगों की मौत के मामले में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने स्वत: संज्ञान लिया है। मामले की सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने छत्तीसगढ़ स्टेट पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड (CSPDCL) के प्रबंध संचालक (MD) और ऊर्जा विभाग के सचिव को शपथपत्र प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। मामले की अगली सुनवाई 23 जुलाई को होगी।

चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की खंडपीठ ने कहा कि इलेक्ट्रिक फेंसिंग के कारण लगातार हो रही मौतें गंभीर चिंता का विषय हैं। ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए प्रभावी सुरक्षा उपायों और स्पष्ट नीति की आवश्यकता है।

निरीक्षण और सुरक्षा व्यवस्था पर मांगी रिपोर्ट

हाईकोर्ट ने निर्देश दिया है कि शपथपत्र में प्रदेश के इलेक्ट्रिकल इंफ्रास्ट्रक्चर के निरीक्षण और रखरखाव की वर्तमान व्यवस्था, दुर्घटनाओं की रोकथाम के लिए अपनाए गए सुरक्षा उपाय, लापरवाही तय करने की प्रक्रिया और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने की कार्ययोजना का विस्तृत विवरण प्रस्तुत किया जाए।

 

 

इलेक्ट्रिक फेंसिंग से बढ़ रही दुर्घटनाएं

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि कई लोग अपनी फसलों, मकानों और पशुओं की सुरक्षा के लिए खेतों और परिसरों में अवैध रूप से बिजली की फेंसिंग कर देते हैं। इसकी चपेट में आने से आम नागरिकों के साथ-साथ घरेलू और वन्यजीवों की भी मौत हो रही है। ऐसी घटनाओं में संबंधित लोगों के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज किए जाते हैं, लेकिन केवल कार्रवाई पर्याप्त नहीं है। दुर्घटनाओं को रोकने के लिए ठोस और प्रभावी व्यवस्था जरूरी है।

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नीति और SOP पर मांगा जवाब

खंडपीठ ने पूछा है कि क्या राज्य में इलेक्ट्रिक फेंसिंग जैसी घटनाओं को रोकने के लिए कोई स्पष्ट नीति या स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) लागू है। यदि ऐसी कोई व्यवस्था मौजूद नहीं है, तो सरकार और बिजली कंपनी यह बताएं कि नई नीति कब तक तैयार कर लागू की जाएगी। इसके लिए समयबद्ध कार्ययोजना भी प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।

CSPDCL को बनाया पक्षकार

हाईकोर्ट ने रजिस्ट्री को निर्देश दिया कि छत्तीसगढ़ स्टेट पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड (CSPDCL), रायपुर के प्रबंध संचालक को जनहित याचिका में तत्काल प्रतिवादी बनाया जाए, ताकि मामले में जवाबदेही तय की जा सके।

हाईकोर्ट की इस पहल को प्रदेश में बिजली सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने और भविष्य में इस तरह की दर्दनाक घटनाओं की रोकथाम की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

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