मुंबई, 10 जुलाई 2026
साल 2007 में आई धमाल ने दर्शकों को हंसी से लोटपोट कर दिया था, लेकिन फ्रेंचाइजी की चौथी फिल्म ‘धमाल 4’ उस जादू को दोहराने में नाकाम साबित हुई है। फिल्म को दर्शकों से मिली-जुली प्रतिक्रिया मिल रही है। कमजोर कहानी, पुराने अंदाज का स्क्रीनप्ले और औसत विजुअल इफेक्ट्स (VFX) फिल्म की सबसे बड़ी कमजोरियां बनकर सामने आए हैं।

फिल्म की कहानी एक बार फिर छिपे हुए खजाने की तलाश के इर्द-गिर्द घूमती है। सौ साल पहले समुद्री लुटेरे शैतान सिंह द्वारा छिपाए गए खजाने का नक्शा पृथ्वी (उपेंद्र लिमये) के हाथ लगता है। हालांकि नक्शा जल जाता है, लेकिन मरने से पहले वह खजाने का सुराग गुड्डू (अजय देवगन), लल्लन (रितेश देशमुख), आदी (अरशद वारसी), मानव (जावेद जाफरी) और अन्य लोगों को बता देता है। इसके बाद सभी खजाने की तलाश में निकल पड़ते हैं।
फिल्म का स्क्रीनप्ले और संवाद पारितोष पेंटर, बलविंदर सिंह सूरी, बंटी राठौड़ और वेद प्रकाश ने लिखे हैं, लेकिन कहानी में नयापन और दम नजर नहीं आता। कई दृश्य पुराने और दोहराव वाले लगते हैं, जिससे फिल्म अपनी पकड़ खो देती है।
निर्देशक इंद्र कुमार भी इस बार दर्शकों को हंसाने में पूरी तरह सफल नहीं हो पाए हैं। फिल्म के अधिकांश मजेदार सीन ट्रेलर में पहले ही दिखाए जा चुके हैं। वहीं, अजय देवगन की VFX कंपनी द्वारा तैयार किए गए विजुअल इफेक्ट्स भी उम्मीदों पर खरे नहीं उतरते।
अभिनय की बात करें तो अजय देवगन, रितेश देशमुख, अरशद वारसी, जावेद जाफरी, रवि किशन, संजय मिश्रा और उपेंद्र लिमये जैसे अनुभवी कलाकार अपनी भूमिकाओं के साथ न्याय करते हैं। खासकर आदी और मानव की जोड़ी कुछ जगहों पर दर्शकों को हंसाने में सफल रहती है। हालांकि ईशा गुप्ता का किरदार प्रभाव छोड़ने में असफल रहता है, जबकि अंजलि आनंद के हिस्से आए कुछ बॉडी शेमिंग वाले दृश्य आलोचना का कारण बन सकते हैं।
संगीत भी फिल्म की खास ताकत नहीं बन पाया। रीक्रिएट किए गए गानों के अलावा कोई भी गीत लंबे समय तक याद नहीं रहता। हालांकि अमर मोहिले का बैकग्राउंड स्कोर और सुधीर कुमार चौधरी की सिनेमैटोग्राफी फिल्म को कुछ हद तक संभालने का प्रयास करती है।
फिल्म के अंत में ‘धमाल 5’ का संकेत दिया गया है, लेकिन मौजूदा फिल्म को देखते हुए दर्शकों की उम्मीद होगी कि अगली कड़ी तभी बने, जब उसके पास एक मजबूत और नई कहानी हो। ‘धमाल 4’ अपनी लोकप्रिय फ्रेंचाइजी का पूरा फायदा नहीं उठा पाती और मनोरंजन के मामले में औसत फिल्म बनकर रह जाती है।




