26 Aug 2026, Wed
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कृषि यंत्रीकरण योजना बनी सहारा: 4 लाख के अनुदान से किसान ने खरीदा ट्रैक्टर, समय पर होगी खेती और बढ़ेगा मुनाफा

सतीश शर्मा

रायपुर, 12 जुलाई 2026/
आधुनिक दौर में खेती-किसानी को उन्नत और मुनाफे का सौदा बनाने में कृषि यंत्रों की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण हो चुकी है। राज्य शासन की कृषि यंत्रीकरण योजना आज छोटे और मझोले किसानों के लिए वरदान साबित हो रही है। इसका एक जीवंत उदाहरण विकासखंड बिलाईगढ़ के ग्राम गधाभाटा में देखने को मिला है, जहां के प्रगतिशील कृषक तिहारूराम चंद्रा (पिता जगनथिया) का खुद का ट्रैक्टर खरीदने का सपना साकार हुआ है।

ग्राम झुमका में आयोजित भव्य सुशासन शिविर में प्रभारी मंत्री टंकराम वर्मा के करकमलों से तिहारूराम को उनके नए ट्रैक्टर की चाबी सौंपी गई। 9.40 लाख रुपए की कुल लागत वाले ट्रैक्टर पर राज्य शासन की ओर से 4 लाख रुपए का शासकीय अनुदान मिला। इस पर तिहारूराम ने कहा कि कम जमीन और सीमित साधनों के कारण पहले समय पर खेती का काम पूरा करना बड़ी चुनौती थी। भारी-भरकम किराए पर ट्रैक्टर लेना पड़ता था, लेकिन सरकार की कृषि यंत्रीकरण योजना और 4 लाख रुपए की अनुदान राशि ने उनकी राह आसान कर दी। अब वे न सिर्फ समय पर खेती कर सकेंगे, बल्कि आधुनिक और लाभकारी खेती भी कर पाएंगे।

‘वन स्टॉप सेंटर’ से किसानों को मिला तत्काल लाभ

सुशासन तिहार के अंतर्गत आयोजित इन शिविरों में कृषि विभाग द्वारा ‘वन स्टॉप सेंटर’ के रूप में स्टॉल लगाए गए थे। यहां आमजन की समस्याओं के त्वरित निराकरण के साथ-साथ शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ सीधे पात्र हितग्राहियों तक पहुंचाया गया।

 

 

शिविर के दौरान विभाग को कुल 575 आवेदन प्राप्त हुए, जिनमें 545 मांग और 30 शिकायत संबंधी मामले थे। विभाग ने संवेदनशीलता और मुस्तैदी दिखाते हुए 572 आवेदनों (544 मांग और 28 शिकायत) का रिकॉर्ड समय में सफलतापूर्वक निराकरण कर सुशासन की मिसाल पेश की।

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उन्नत कृषि और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा

ट्रैक्टर वितरण के साथ ही विभाग ने शिविर में उपस्थित किसानों को उन्नत एवं वैज्ञानिक खेती से जोड़ने के लिए नीम आधारित कीटनाशक, हरित खाद, प्रमाणित बीज और विभिन्न लघु कृषि यंत्रों का वितरण भी किया।

उप संचालक कृषि, वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारियों और ग्रामीण कृषि विकास अधिकारियों की टीम ने चौपाल लगाकर किसानों को केंद्र और राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी योजनाओं की विस्तृत जानकारी दी। इनमें प्रमुख रूप से प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना, प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना, सॉइल हेल्थ कार्ड योजना, एग्री स्टैक पंजीयन, प्राकृतिक एवं जैविक खेती मिशन, परंपरागत कृषि विकास योजना, दलहन-तिलहन प्रोत्साहन कार्यक्रम तथा हरित खाद के उपयोग की जानकारी शामिल रही।

जिला सारंगढ़-बिलाईगढ़ में कृषि विभाग का यह महाअभियान न केवल किसानों की समस्याओं के प्रभावी समाधान का जरिया बना, बल्कि उन्हें आधुनिक तकनीकों, आत्मनिर्भरता और समृद्ध खेती की दिशा में आगे बढ़ाने वाला एक महत्वपूर्ण कदम भी साबित हुआ। यह पूरी मुहिम सुशासन, जनभागीदारी और किसान कल्याण का उत्कृष्ट उदाहरण बनकर उभरी है।

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