1 Sep 2026, Tue
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भारत ने रचा इतिहास: निजी रॉकेट ‘विक्रम-1’ की सफल लॉन्चिंग, PM मोदी ने दी बधाई; अमेरिका-चीन के बाद तीसरा देश बना भारत

नई दिल्ली/श्रीहरिकोटा। भारत ने अंतरिक्ष क्षेत्र में एक नया इतिहास रच दिया है। हैदराबाद स्थित निजी कंपनी स्काईरूट एयरोस्पेस ने शनिवार को अपने पहले ऑर्बिटल लॉन्च व्हीकल ‘विक्रम-1’ का आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र (SDSC-SHAR) से सफल प्रक्षेपण किया। रॉकेट ने लगभग 450 किलोमीटर ऊंचाई वाली लो अर्थ ऑर्बिट (LEO) में अपने पेलोड को सफलतापूर्वक स्थापित किया। इस उपलब्धि के साथ भारत अमेरिका और चीन के बाद दुनिया का तीसरा देश बन गया है, जहां किसी निजी कंपनी ने सफलतापूर्वक ऑर्बिटल रॉकेट लॉन्च किया है।

इस ऐतिहासिक मिशन को ‘आगमन’ नाम दिया गया था। लॉन्च के दौरान रॉकेट ने अपने तीनों सॉलिड-फ्यूल चरण और अंतिम ऑर्बिटल एडजस्टमेंट मॉड्यूल का संचालन सफलतापूर्वक पूरा किया। करीब 24 मीटर लंबे इस रॉकेट को पूरी तरह हल्के कार्बन कॉम्पोजिट स्ट्रक्चर से तैयार किया गया है और यह 350 किलोग्राम तक का पेलोड 450 किलोमीटर की कक्षा में पहुंचाने में सक्षम है।

इस मिशन में बेंगलुरु की कंपनी कॉसमॉस डायमंड्स द्वारा लैब में तैयार किया गया ‘डायमंड लोटस’ भी पेलोड के रूप में भेजा गया। यह मिशन वर्ष 2022 में स्काईरूट के सफल सब-ऑर्बिटल मिशन ‘विक्रम-S’ के बाद अगला बड़ा कदम माना जा रहा है और भारत के निजी अंतरिक्ष उद्योग के लिए नई संभावनाओं का रास्ता खोलेगा।

 

 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस सफलता पर स्काईरूट एयरोस्पेस की पूरी टीम को फोन कर बधाई दी। उन्होंने कहा कि विक्रम-1 भारत की अंतरिक्ष यात्रा का नया अध्याय है और यह देश के युवाओं की प्रतिभा, नवाचार तथा उद्यमशीलता का प्रतीक है। प्रधानमंत्री ने कहा कि 2020 में अंतरिक्ष क्षेत्र में किए गए सुधारों का यह सकारात्मक परिणाम है, जिससे निजी कंपनियों को वैश्विक स्तर पर नई पहचान मिली है।

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इसरो के पूर्व अध्यक्ष डॉ. एस. सोमनाथ ने भी मिशन को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि यह केवल एक रॉकेट की उड़ान नहीं, बल्कि भारत की निजी रॉकेट निर्माण क्षमता के नए युग की शुरुआत है। उनके अनुसार यह सफलता भारतीय स्टार्टअप, उद्योग और वैश्विक अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था में भारत की मजबूत भागीदारी सुनिश्चित करेगी।

लॉन्च से पहले तकनीकी कारणों से कुछ देर के लिए काउंटडाउन रोका गया था, लेकिन सभी परीक्षण सफल रहने के बाद दोपहर में रॉकेट ने उड़ान भरी और तय मिशन को सफलतापूर्वक पूरा किया। इस सफलता के साथ भारत का निजी अंतरिक्ष क्षेत्र अब वैश्विक लॉन्च मार्केट में नई पहचान बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम आगे बढ़ चुका है।

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