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बिलासपुर में अपराधियों की खैर नहीं: ‘एक गुंडा-एक जवान’ नीति लागू, हर बदमाश पर रहेगी 24 घंटे नजर

बिलासपुर, 22 जुलाई 2026

बिलासपुर रेंज में कानून-व्यवस्था को और अधिक मजबूत बनाने तथा अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण के लिए पुलिस ने नई रणनीति लागू करने का फैसला किया है। आईजी राम गोपाल गर्ग के निर्देश पर अब ‘एक गुंडा-एक जवान’ नीति लागू की जाएगी। इसके तहत हर गुंडा और निगरानी बदमाश की जिम्मेदारी एक निर्धारित पुलिस जवान को सौंपी जाएगी, जो उसकी गतिविधियों पर लगातार नजर रखेगा।

मंगलवार को आयोजित उच्च स्तरीय ऑनलाइन कार्यशाला में बिलासपुर रेंज के करीब 200 पुलिस अधिकारी, एसडीओपी और थाना प्रभारी शामिल हुए। इस दौरान सक्ती एसपी प्रफुल्ल ठाकुर ने प्रिवेंटिव पुलिसिंग और बेसिक पुलिसिंग को लेकर विस्तृत प्रस्तुतीकरण दिया।

आईजी ने निर्देश दिए कि जमानत पर छूटने के बाद दोबारा अपराध करने वाले आरोपियों के खिलाफ बीएनएसएस की धारा 480 के तहत तत्काल जमानत निरस्तीकरण की कार्रवाई की जाए। वहीं, गुंडा और निगरानी बदमाशों की सरप्राइज चेकिंग का समय पूरी तरह गोपनीय और अनिश्चित रखा जाएगा, ताकि पुलिस कार्रवाई अधिक प्रभावी हो सके।

बैठक में यह भी स्पष्ट किया गया कि पुलिस कार्रवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों का पूरी तरह पालन किया जाएगा। विमुक्त जनजातियों, पिछड़े वर्गों और नाबालिगों के खिलाफ किसी भी प्रकार की मनमानी कार्रवाई नहीं होगी तथा नागरिकों की निजता का सम्मान सुनिश्चित किया जाएगा। जो लोग वर्षों से अपराध छोड़कर सामान्य जीवन जी रहे हैं, उन्हें निगरानी सूची से हटाया जाएगा, ताकि पुलिस का पूरा फोकस सक्रिय अपराधियों पर रहे।

अपराधियों की निगरानी के लिए CRI-App, नेटग्रिड और CDR जैसी डिजिटल तकनीकों का उपयोग किया जाएगा। त्योहारों से पहले थानों में बदमाशों की परेड आयोजित होगी और फरार आरोपियों की तलाश के लिए तकनीकी इंटेलिजेंस का सहारा लिया जाएगा।

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बैठक में दिए गए प्रमुख निर्देश

  • हर गुंडा और निगरानी बदमाश के लिए एक जिम्मेदार पुलिस जवान नियुक्त होगा।
  • दोबारा अपराध करने पर BNSS की धारा 480 के तहत जमानत निरस्त कराने की कार्रवाई।
  • धारा 110 BNSS, 20 से 50 हजार रुपये के बाउंड ओवर, जिला बदर और PIT NDPS जैसी सख्त कानूनी कार्रवाई।
  • अपराधियों का A-Class और B-Class में वर्गीकरण कर डिजिटल रिकॉर्ड अपडेट रखना।
  • रोजनामचा, रजिस्टर और डिजिटल रिकॉर्ड का बेहतर समन्वय सुनिश्चित करना।

 

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