रायपुर, 06 अगस्त 2026

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने 2021 CGPSC भर्ती परीक्षा घोटाला और पेपर लीक मामले में आरोपी सेवानिवृत्त IAS अधिकारी एवं पूर्व छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC) सचिव जीवन किशोर ध्रुव की जमानत याचिका खारिज कर दी है।
न्यायमूर्ति बीडी गुरु की एकलपीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि परीक्षा का प्रश्नपत्र लीक कर लाखों युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ करना हत्या से भी बड़ा अपराध है। अदालत ने टिप्पणी की कि हत्या से एक परिवार प्रभावित होता है, जबकि परीक्षा घोटाला पूरे समाज के विश्वास को तोड़ देता है।
इस मामले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) कर रही है। जांच में पूर्व CGPSC अध्यक्ष टामन सिंह सोनवानी, जीवन किशोर ध्रुव और अन्य अधिकारियों पर रिश्तेदारों व चुनिंदा अभ्यर्थियों को अनुचित लाभ पहुंचाने के आरोप हैं। CBI के अनुसार, ध्रुव ने 6 अक्टूबर 2020 को CGPSC सचिव का पदभार संभाला था और 2021 भर्ती परीक्षा का विज्ञापन अपने हस्ताक्षर से जारी किया था।
जांच में आरोप है कि ध्रुव ने अपने पद का दुरुपयोग कर मुख्य परीक्षा के गोपनीय प्रश्नपत्र परीक्षा से पहले हासिल किए और उन्हें अपने बेटे सुमित ध्रुव को उपलब्ध कराया। बाद में सुमित ध्रुव का चयन डिप्टी कलेक्टर पद पर हुआ। भिलाई स्थित ध्रुव के घर पर छापेमारी के दौरान CBI ने कई आपत्तिजनक दस्तावेज बरामद किए।
जांच एजेंसी को मुख्य परीक्षा के पेपर-7 (सामान्य अध्ययन) के 47 में से 42 प्रश्नों के लिखित उत्तर तथा पेपर-2 (निबंध) की उत्तर पुस्तिकाएं मिलीं। जांच में यह भी सामने आया कि सुमित ध्रुव द्वारा परीक्षा से पहले तैयार किए गए चार निबंध विषय—क्रिप्टोकरेंसी, रूस-यूक्रेन युद्ध, दंतेवाड़ा जिले का विकास और छत्तीसगढ़ टोनही अत्याचार निवारण अधिनियम—आधिकारिक प्रश्नपत्र में शामिल थे।
बचाव पक्ष ने दलील दी कि ध्रुव को केवल उनके प्रशासनिक पद के कारण झूठा फंसाया गया है। उनका नाम प्राथमिकी (FIR) में भी नहीं था। बचाव पक्ष ने यह भी कहा कि ध्रुव ने आयोग को पहले ही अपने बेटों के परीक्षा में शामिल होने की जानकारी दे दी थी और वे गोपनीय प्रक्रिया से दूर रहे। साथ ही बताया कि CBI की चार्जशीट दाखिल होने के बाद से वह 18 सितंबर 2025 से न्यायिक हिरासत में हैं।
वहीं CBI ने जमानत का विरोध करते हुए कहा कि आरोपी एक संवैधानिक पद पर रहते हुए परीक्षा की निष्पक्षता बनाए रखने के लिए जिम्मेदार था। एजेंसी के अनुसार, बरामद साक्ष्य और गवाहों के बयान एक सुनियोजित आपराधिक साजिश की पुष्टि करते हैं।
यह CGPSC भर्ती घोटाला 2020 से 2022 के बीच हुई भर्ती प्रक्रियाओं से जुड़ा है। आरोप है कि भर्ती नियमों और साक्षात्कार प्रक्रिया की पारदर्शिता को दरकिनार कर राजनीतिक और प्रशासनिक रूप से प्रभावशाली परिवारों के अभ्यर्थियों का चयन डिप्टी कलेक्टर और डिप्टी एसपी जैसे पदों पर किया गया।
171 पदों वाली 2021 CGPSC भर्ती को लेकर विवाद बढ़ने के बाद छत्तीसगढ़ सरकार ने जांच CBI को सौंपी थी। प्रारंभिक परीक्षा 13 फरवरी 2022 को हुई थी, जिसमें 2,565 अभ्यर्थी सफल हुए। इसके बाद 26 से 29 मई 2022 तक मुख्य परीक्षा आयोजित हुई, जिसमें 509 अभ्यर्थी सफल हुए और अंततः 11 मई 2023 को 170 चयनित अभ्यर्थियों की अंतिम सूची जारी की गई।





