18 Aug 2026, Tue
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अंबिकापुर में स्टील कारोबारी हत्याकांड का फैसला: कंपनी के पूर्व कर्मचारी को उम्रकैद, खुद की हत्या की सुपारी देने का दावा नहीं हुआ साबित

अंबिकापुर, 18 अगस्त 2026। छत्तीसगढ़ के अंबिकापुर में करीब दो साल पहले हुए स्टील कारोबारी के बेटे अक्षत अग्रवाल हत्याकांड में कोर्ट ने आरोपी कंपनी के पूर्व कर्मचारी संजीव मंडल उर्फ भानू को दोषी ठहराते हुए आजीवन सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने आरोपी को आर्म्स एक्ट के तहत भी 5 साल की सजा दी है।

मामला गांधीनगर थाना क्षेत्र का है। 21 अगस्त 2024 को अंबिका स्टील इंडस्ट्रीज के मालिक महेश केडिया के बेटे अक्षत अग्रवाल का शव कार की ड्राइवर सीट पर मिला था। उनके सीने में गोली लगी थी। मामले में पुलिस ने अगले ही दिन कंपनी के पूर्व कर्मचारी संजीव मंडल को गिरफ्तार किया था।

आरोपी ने किया था चौंकाने वाला दावा

गिरफ्तारी के बाद संजीव मंडल ने पुलिस के सामने दावा किया था कि अक्षत ने खुद अपनी हत्या की सुपारी दी थी। आरोपी के मुताबिक, अक्षत ही तीन पिस्टल और 31 कारतूस लेकर आया था और उसने खुद को गोली मारने के लिए कहा था।

 

 

संजीव ने दावा किया था कि उसने अक्षत पर पिस्टल तानी, लेकिन गोली नहीं चला पाया। इसके बाद अक्षत ने खुद ट्रिगर दबाया और गोली उसके सीने में लगी। आरोपी ने यह भी कहा था कि इसके बाद उसने दो फायर किए।

हालांकि, बाद में आरोपी कोर्ट में अपने पुलिस बयान से मुकर गया और खुद को निर्दोष बताया।

3 पिस्टल और 31 कारतूस हुए थे बरामद

पुलिस ने आरोपी के कब्जे से 3 पिस्टल, 31 कारतूस, 50 हजार रुपए नकद के अलावा अक्षत की सोने की चेन, ब्रेसलेट और अंगूठी बरामद की थी।

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पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में अक्षत को तीन गोलियां पास से मारे जाने की बात सामने आई थी। पुलिस ने परिस्थितिजन्य और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों के आधार पर घटना के समय अक्षत और संजीव की घटनास्थल पर मौजूदगी की पुष्टि की।

नार्को और पॉलीग्राफ टेस्ट भी कराया गया

मामले की जांच के दौरान पुलिस ने कोर्ट की अनुमति से आरोपी का नार्को टेस्ट और पॉलीग्राफ टेस्ट भी कराया था। हालांकि, इन जांचों से हत्या में किसी अन्य व्यक्ति की संलिप्तता को लेकर कोई नया निर्णायक तथ्य सामने नहीं आया।

33 गवाहों के बयान के बाद आया फैसला

मामले की सुनवाई जिला कोर्ट के सप्तम अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश महेश कुमार राज की अदालत में हुई। करीब दो साल चली सुनवाई के दौरान पुलिस अधिकारियों और जवानों, डॉक्टर, फॉरेंसिक टीम, परिजनों और दोस्तों समेत 33 गवाहों के बयान दर्ज किए गए।

अदालत ने संजीव मंडल को हत्या और आर्म्स एक्ट के तहत दोषी माना। उसे भारतीय न्याय संहिता की धारा 103(1) के तहत आजीवन सश्रम कारावास तथा आर्म्स एक्ट की धारा 25 और 27 के तहत 5 साल के कारावास की सजा सुनाई गई।

इस मामले में आरोपी का यह दावा कि कारोबारी ने खुद अपनी हत्या की सुपारी दी थी, जांच और अदालत की कार्यवाही में साबित नहीं हो सका।

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