बिलासपुर, 21 अगस्त 2026। गुरु घासीदास केंद्रीय विश्वविद्यालय में एमएसडब्ल्यू की छात्रा के हाथ पर मिले कथित लिखे निशानों को नकल का आधार मानकर पूरा सेकंड सेमेस्टर रद्द करने के मामले में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने गंभीर सवाल उठाए हैं। कोर्ट ने कहा कि केवल हाथ पर कोई सामग्री मौजूद होना और परीक्षा में उसका इस्तेमाल करना, दोनों अलग-अलग बातें हैं।
जस्टिस अमितेंद्र किशोर प्रसाद ने कहा कि पूरे सेमेस्टर की परीक्षा रद्द करने का असर छात्रा की पढ़ाई पर गंभीर रूप से पड़ता है। इसलिए कथित अनुचित साधन, उसके प्रमाण, वास्तविक इस्तेमाल और दी गई सजा की अनुपातिकता पर विचार किया जाना जरूरी है।

छात्रा ने कहा- निशान सिर्फ याद रखने के लिए थे
बिलासपुर निवासी छात्रा कनक सोनी एमएसडब्ल्यू सेकंड सेमेस्टर में अध्ययनरत हैं। विश्वविद्यालय ने 6 जुलाई 2026 के आदेश में हाथ पर मिले कथित निशानों के आधार पर उसे नकल के मामले में श्रेणी 9(आई)(सी) में रखा और पूरे सेकंड सेमेस्टर की परीक्षा निरस्त कर दी। साथ ही अगले सत्र में पूरी परीक्षा दोबारा देने का निर्देश दिया गया।
छात्रा ने हाईकोर्ट में कहा कि हाथ पर कुछ स्मरणात्मक अक्षर लिखे थे, लेकिन परीक्षा में उत्तर लिखने के लिए उनका इस्तेमाल नहीं किया गया। इसके बावजूद विश्वविद्यालय ने इसे अनुचित साधन का मामला मान लिया।
हाईकोर्ट ने इस्तेमाल की जांच पर दिया जोर
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यह जांचना जरूरी है कि हाथ पर मिले निशान केवल मौजूद थे या छात्रा ने वास्तव में परीक्षा के दौरान उनका उपयोग भी किया था। विश्वविद्यालय की सक्षम अपीलीय प्राधिकारी को इस पहलू पर स्पष्ट और कारणयुक्त फैसला लेने का निर्देश दिया गया है।
सात दिन में अपील, 15 दिन में फैसला
हाईकोर्ट ने छात्रा को केंद्रीय विश्वविद्यालय अधिनियम, 2009 की धारा 35 के तहत उपलब्ध वैधानिक अपील का रास्ता अपनाने को कहा है। छात्रा को सात कार्यदिवस के भीतर अपील दाखिल करनी होगी। इसके बाद सक्षम प्राधिकारी को 15 दिनों के भीतर फैसला करना होगा।
अपीलीय प्राधिकारी को यह भी देखना होगा कि छात्रा को संबंधित श्रेणी में रखने का तथ्यात्मक और साक्ष्यगत आधार क्या था, हाथ पर मिले निशानों का वास्तव में परीक्षा में इस्तेमाल हुआ या नहीं और छात्रा की सफाई सहित विभागाध्यक्ष की सिफारिशों पर उचित विचार किया गया या नहीं।
कोर्ट ने सभी पहलुओं पर विचार करते हुए स्पष्ट और कारणयुक्त आदेश पारित करने के निर्देश दिए हैं। इसके साथ ही हाईकोर्ट ने छात्रा की याचिका का निराकरण कर दिया।





