रायपुर, 24 अगस्त 2026
सोशल मीडिया पर अभिव्यक्ति की आजादी की आड़ में अमर्यादित भाषा के इस्तेमाल का मामला एक बार फिर गरमा गया है। इस बार निशाने पर छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और उपमुख्यमंत्री अरुण साव व विजय शर्मा हैं। इंस्टाग्राम पर सागर निर्मलकर नाम की आईडी से तीनों नेताओं के खिलाफ कथित तौर पर आपत्तिजनक और अमर्यादित शब्दों का इस्तेमाल किए जाने का आरोप है।

वीडियो सामने आने के बाद छत्तीसगढ़ राष्ट्रवादी संघ के संयोजक वीरेंद्र दुबे ने सिविल लाइन थाने में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत के बाद मामले में दो लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज किए जाने की जानकारी सामने आई है।
वीरेंद्र दुबे ने आरोप लगाया कि नई दिल्ली में हुए आंदोलन के बाद छत्तीसगढ़ में नेताओं के खिलाफ सोशल मीडिया पर लगातार आपत्तिजनक टिप्पणियों के मामले सामने आ रहे हैं। उनका कहना है कि खासतौर पर सरकार से जुड़े नेताओं को निशाना बनाकर अमर्यादित भाषा का इस्तेमाल किया जा रहा है।

दुबे ने दो टूक कहा कि मुख्यमंत्री और दोनों उपमुख्यमंत्रियों के खिलाफ इस तरह की बयानबाजी दोबारा हुई तो राष्ट्रवादी युवा शांत नहीं बैठेंगे। ऐसे लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई के लिए हर स्तर पर आवाज उठाई जाएगी।

आलोचना की आजादी या अमर्यादित भाषा?
लोकतंत्र में सरकार और नेताओं की आलोचना करने का अधिकार सभी को है, लेकिन सवाल यह है कि क्या आलोचना की आड़ में व्यक्तिगत टिप्पणी और अभद्र भाषा को भी स्वीकार किया जा सकता है? सोशल मीडिया पर बढ़ती ऐसी घटनाओं ने भाषा की मर्यादा और कानूनी जिम्मेदारी को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं।
अब मामला पुलिस तक पहुंच चुका है। एफआईआर के बाद पुलिस की जांच और आगे की कार्रवाई पर नजर है। सवाल सिर्फ एक पोस्ट का नहीं, बल्कि सोशल मीडिया पर कानून और मर्यादा की सीमा तय करने का है।





