25 Aug 2026, Tue
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स्वामी हरिगिर महाराज का 58वां वर्सी महोत्सव आज से: 3 दिन होंगे धार्मिक आयोजन, देशभर से पहुंचेंगे श्रद्धालु

रायपुर, 25 अगस्त 2026। स्वामी हरिगिर महाराज का 58वां वर्सी महोत्सव 26 से 28 अगस्त तक शताब्दी नगर तेलीबांधा स्थित स्वामी हरिगिर महाराज धर्मशाला, जय शक्तिधाम समिति में श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जाएगा। आयोजन साईं आनंदगिर महाराज, बाबा झंगलदास वाधवा परिवार के सानिध्य में होगा। महोत्सव में देशभर से श्रद्धालु शामिल होंगे।

महोत्सव के प्रथम दिन 26 अगस्त को सुबह 9 बजे दुर्गा माता पाठ, सुबह 11 बजे अम्मा मीरा देवी दरबार के सानिध्य में भाई गोविंद सिंह द्वारा अखंड पाठ साहेब का शुभारंभ होगा। दोपहर 1 बजे ब्राह्मण भोजन और 2 बजे भंडारा होगा। शाम 4 बजे बाबा झंगलदास वाधवा परिवार की ओर से स्वामी हरिगिर महाराज की स्मृति में अनाज वितरण किया जाएगा। शाम 7 बजे दुर्गा माता मंदिर में आरती, 7:30 बजे पाठ साहेब आरती एवं कीर्तन होगा। रात 9 बजे एसएसडी महिला मंडल का कार्यक्रम और रात 10 बजे पूज्य वसण शाह दरबार, उल्हासनगर के साईं कालीराम एवं साईं लालदास जी द्वारा भजन एवं प्रवचन संध्या होगी।

27 अगस्त को सुबह 8:30 बजे दुर्गा माता मंदिर में आरती और 9 बजे पाठ साहेब आरती होगी। दोपहर 1 बजे भंडारा, शाम 7 बजे मंदिर में आरती तथा रात 7:30 बजे पाठ साहेब आरती एवं भाई गोविंद सिंह द्वारा कीर्तन होगा। रात 9 बजे अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त मयूर अलवानी भजन प्रस्तुत करेंगे। रात 10 बजे झूलेलाल मंदिर चकरभाटा में भजन संध्या का आयोजन होगा।

 

 

महोत्सव के अंतिम दिन 28 अगस्त, शुक्रवार यानी रक्षाबंधन को सुबह 8:30 बजे दुर्गा माता मंदिर में आरती, 9 बजे दुर्गा माता पाठ का समापन एवं हवन होगा। सुबह 10 बजे तेलीबांधा से पूज्य समाधि साहेब तक शोभायात्रा निकाली जाएगी। सुबह 11 बजे समाधि साहेब में पूजा-अर्चना एवं बच्चों का मुंडन संस्कार होगा। दोपहर 12 बजे शदाणी दरबार तीर्थ के संत युधिष्ठिर लाल जी के सानिध्य में भाई गोविंद सिंह द्वारा अखंड पाठ भोग साहेब संपन्न कराया जाएगा।

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जय शक्तिधाम समिति के कोषाध्यक्ष सीए चेतन तारवानी ने बताया कि स्वामी हरिगिर महाराज के श्रद्धालु देश के विभिन्न शहरों से रायपुर पहुंच रहे हैं। इनमें कल्याण, मुंबई, बड़ोदरा, अहमदाबाद, आनंद, भुसावल, खंडवा, जालना, भोपाल, बालाघाट, सूरत, बुरहानपुर, विदिशा, नागपुर, बिलासपुर, इंदौर, ग्वालियर, जलगांव, कवर्धा, गोंदिया, दिल्ली, वाशीम, अकोला, अमरावती, मुंगेली, चंद्रपुर, भिलाई और कटनी सहित अन्य शहरों के श्रद्धालु शामिल हैं।

उन्होंने बताया कि बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए लाने-ले जाने, ठहरने और भोजन की व्यवस्था समिति द्वारा की गई है। समिति अध्यक्ष मोहनलाल तेजवानी सहित अन्य सदस्य श्रद्धालुओं के स्वागत एवं व्यवस्थाओं में जुटे हैं।

स्वामी हरिगिर महाराज का जीवन और आध्यात्मिक यात्रा

स्वामी हरिगिर महाराज बचपन से ही धार्मिक एवं संवेदनशील प्रवृत्ति के थे। वर्ष 1930 में वे परिवार छोड़कर सन्यास की ओर अग्रसर हुए। पंजाब के माता उपासक श्री शिवगिरि महाराज से उनकी मुलाकात हुई और कठिन परीक्षाओं के बाद उन्होंने उन्हें अपना शिष्य स्वीकार कर दीक्षा प्रदान की। इसके बाद स्वामी हरिगिर महाराज ने गुरु की सेवा करते हुए देश के विभिन्न हिस्सों में भ्रमण किया।

वर्ष 1951 में गुरु शिवगिरि महाराज के ब्रह्मलीन होने के बाद स्वामी हरिगिर महाराज को उनका उत्तराधिकारी बनाया गया। उन्होंने देशभर में भ्रमण कर माता की महिमा और गुरु का संदेश लोगों तक पहुंचाया।

1954 में रायपुर के तेलीपारा क्षेत्र में उन्होंने एक छोटी सी कुटिया में रहकर माता की सेवा शुरू की। प्रकृति और आयुर्वेद में रुचि के चलते उन्होंने विभिन्न जड़ी-बूटियों से औषधियां तैयार कर लोगों की सेवा की। आजीविका के लिए वे अपने बनाए स्नो और नेलपॉलिश का व्यवसाय करते थे तथा शेष समय पूजा, माता की सेवा और मानव सेवा में लगाते थे।

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वर्ष 1955 में उनके परिवार को रायपुर में उनके होने की जानकारी मिली और परिवार ने उन्हें वापस घर चलने का आग्रह किया, लेकिन उन्होंने सांसारिक मोह-माया से स्वयं को अलग रखा। उन्होंने अपने दूसरे पुत्र झंगलदास वाधवा को अपना शिष्य स्वीकार किया और उनका नाम बालकगिर रखा।

8 अगस्त 1968, रक्षाबंधन के दिन पूजा-पाठ के बाद स्वामी हरिगिर महाराज ने अपने स्नेहजनों से अंतिम मुलाकात की और दोपहर में समाधि ली। उनके अंतिम संस्कार से जुड़े कई प्रसंगों को श्रद्धालु आज भी चमत्कार के रूप में स्मरण करते हैं।

ब्रह्मलीन होने के बाद उनके पुत्र बाबा झंगलदास ने बालकगिर के रूप में गुरु की वर्सी मनाने की परंपरा जारी रखी। बाबा झंगलदास के ब्रह्मलीन होने के बाद उनके द्वितीय पुत्र एवं वर्तमान पीठाधीश साईं रामचंद के सानिध्य में वर्सी महोत्सव मनाया जा रहा है।

संपर्क: चेतन तारवानी — 98261-22115

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