9 Sep 2026, Wed
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अंगदान को बढ़ावा देने अस्पतालों की तैयारी जरूरी, डॉक्टरों-नर्सों को मिले विशेष प्रशिक्षण: डॉ. अतुल मलिकराम

भोपाल, 09 सितम्बर 2026। अंगदान को लेकर जागरूकता अभियान चलाने के साथ-साथ अस्पतालों की क्षमता बढ़ाने, डॉक्टरों-नर्सों को विशेष प्रशिक्षण देने और प्रशिक्षित ट्रांसप्लांट कोऑर्डिनेटर की उपलब्धता सुनिश्चित करने की जरूरत है। राजनीतिक रणनीतिकार डॉ. अतुल मलिकराम ने मध्य प्रदेश में अंगदान की स्थिति पर चिंता जताते हुए यह बात कही।

उन्होंने कहा कि अंगदान की चर्चा अक्सर लोगों से संकल्प लेने और जागरूकता बढ़ाने तक सीमित रह जाती है, जबकि इसकी वास्तविक प्रक्रिया अस्पताल में शुरू होती है। जब किसी मरीज को ब्रेन-स्टेम डेथ होती है, तब संभावित अंगदाता की पहचान से लेकर चिकित्सकीय पुष्टि, परिवार से संवाद, सहमति और अंगों के सुरक्षित परिवहन तक अस्पताल की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है।

डॉ. मलिकराम के मुताबिक, 2023 में देश में 16,542 अंग प्रत्यारोपण हुए, लेकिन उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार मध्य प्रदेश की हिस्सेदारी केवल 1.6 प्रतिशत रही। कैडेवरिक यानी मृत व्यक्ति के अंगदान के मामले में स्थिति और चुनौतीपूर्ण है। जनवरी 2018 से जून 2023 के बीच मध्य प्रदेश में केवल 25 कैडेवरिक अंगदान दर्ज किए गए, जबकि इसी अवधि में तेलंगाना में 883 और तमिलनाडु में 713 मामले सामने आए।

 

 

उन्होंने कहा कि इन आंकड़ों को केवल जन-जागरूकता की कमी के तौर पर देखना सही नहीं होगा। गंभीर मरीजों की निगरानी, संभावित ब्रेन-स्टेम डेथ की पहचान और उसकी चिकित्सकीय पुष्टि के लिए अस्पतालों में पर्याप्त प्रशिक्षित मानव संसाधन जरूरी है। डॉक्टरों और आईसीयू टीम को ब्रेन-स्टेम डेथ की पहचान और निर्धारित चिकित्सकीय प्रक्रिया की जानकारी दी जानी चाहिए।

डॉ. मलिकराम ने स्पष्ट किया कि ब्रेन-स्टेम डेथ और कोमा एक जैसी स्थिति नहीं हैं। नेशनल ऑर्गन एंड टिश्यू ट्रांसप्लांट ऑर्गनाइजेशन (NOTTO) के अनुसार ब्रेन-स्टेम डेथ में मस्तिष्क के आवश्यक कार्य, विशेष रूप से ब्रेन-स्टेम के कार्य स्थायी रूप से समाप्त हो जाते हैं। इसकी पुष्टि निर्धारित चिकित्सकीय प्रक्रिया और अधिकृत मेडिकल बोर्ड द्वारा की जाती है।

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परिवार से संवेदनशील संवाद भी अहम

उन्होंने कहा कि अंगदान की प्रक्रिया में परिवार से बातचीत सबसे संवेदनशील चरणों में से एक है। ऐसे समय में परिवार अपने प्रियजन को खोने के सदमे से गुजर रहा होता है। इसलिए अंगदान की जानकारी देने के लिए प्रशिक्षित ट्रांसप्लांट कोऑर्डिनेटर की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है।

डॉ. मलिकराम ने कहा कि कोऑर्डिनेटर को काउंसलिंग, समन्वय, दस्तावेजीकरण और अंगदान की पूरी प्रक्रिया का प्रशिक्षण मिलना चाहिए। इसके साथ ही आईसीयू में कार्यरत नर्सों को भी ब्रेन-स्टेम डेथ, अंगदान की प्रक्रिया, कानूनी प्रावधानों और परिवार के साथ संवेदनशील संवाद के संबंध में विशेष प्रशिक्षण दिया जाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि नर्सों को निर्णय लेने की भूमिका देने के बजाय उन्हें इतनी जानकारी और प्रशिक्षण जरूर मिलना चाहिए कि वे सही समय पर सही जानकारी संबंधित चिकित्सक या कोऑर्डिनेटर तक पहुंचा सकें।

अस्पतालों का नेटवर्क मजबूत करने की जरूरत

डॉ. मलिकराम के अनुसार मध्य प्रदेश में अंगदान बढ़ाने के लिए केवल प्रशिक्षण ही नहीं, बल्कि पूरे अस्पताल नेटवर्क को मजबूत करने की जरूरत है। बड़े सरकारी अस्पतालों और मेडिकल कॉलेजों में नियमित प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाए जाने चाहिए। संभावित ब्रेन-स्टेम डेथ मामलों की पहचान और रिपोर्टिंग की व्यवस्था मजबूत होनी चाहिए।

उन्होंने सुझाव दिया कि अस्पतालों में प्रशिक्षित ट्रांसप्लांट कोऑर्डिनेटर की उपलब्धता सुनिश्चित करने के साथ-साथ उनके प्रदर्शन की नियमित समीक्षा भी की जानी चाहिए। जरूरत के अनुसार अंगों के सुरक्षित परिवहन और ग्रीन कॉरिडोर की व्यवस्था को भी बेहतर बनाया जाना चाहिए।

तमिलनाडु और तेलंगाना की व्यवस्था से सीखने की जरूरत

डॉ. मलिकराम ने कहा कि मध्य प्रदेश के लिए तमिलनाडु और तेलंगाना के अनुभवों से सीखने का मतलब उनकी व्यवस्था की नकल करना नहीं है। इससे यह समझने की जरूरत है कि अंगदान केवल भावनात्मक अपील से नहीं बढ़ता, बल्कि इसके लिए मजबूत संस्थागत व्यवस्था, प्रशिक्षित मानव संसाधन और जवाबदेही आवश्यक है।

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उन्होंने कहा कि जनता को जागरूक करना जरूरी है, लेकिन उस जागरूकता को जीवन बचाने वाली व्यवस्था में बदलने की जिम्मेदारी स्वास्थ्य तंत्र की है। राजनीति का मतलब केवल चुनावी मुद्दे उठाना नहीं, बल्कि ऐसे विषयों को नीति की प्राथमिकता बनाना भी है, जिनका सीधा संबंध लोगों की जिंदगी से है।

डॉ. मलिकराम ने कहा कि यदि प्रशिक्षित डॉक्टर समय पर ब्रेन-स्टेम डेथ की पहचान करे, प्रशिक्षित कोऑर्डिनेटर परिवार से संवेदनशील संवाद करे और अस्पताल की व्यवस्था तत्काल सक्रिय हो जाए, तो एक परिवार का दुख कई दूसरे परिवारों के लिए जीवन की नई उम्मीद बन सकता है। मध्य प्रदेश को अंगदान के क्षेत्र में जागरूकता से आगे बढ़कर व्यवस्था, प्रशिक्षण और जवाबदेही पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है।

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