3 Nov 2026, Tue
Breaking

रायगढ़ में 41वें चक्रधर समारोह की शुरुआत: राज्यपाल रमेन डेका ने कहा- नई पीढ़ी तक पहुंच रही महाराजा चक्रधर की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत

रायगढ़, 15 सितम्बर 2026। संगीत, नृत्य और कला की समृद्ध परंपरा के लिए देशभर में पहचान रखने वाले रायगढ़ में सोमवार को 41वें अंतर्राष्ट्रीय चक्रधर समारोह का भव्य शुभारंभ हुआ। राज्यपाल रमेन डेका ने महाराजा चक्रधर सिंह के तैलचित्र के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित कर समारोह की शुरुआत की। रामलीला मैदान में आयोजित यह समारोह 14 से 23 सितंबर तक चलेगा। इसमें देश-प्रदेश के नामचीन कलाकारों के साथ स्थानीय कलाकार भी गायन, वादन, नृत्य और लोककला की प्रस्तुतियां देंगे।

राज्यपाल रमेन डेका ने कहा कि चक्रधर समारोह केवल कला प्रस्तुतियों का मंच नहीं है, बल्कि यह महाराजा चक्रधर सिंह की कला-साधना और सांस्कृतिक विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण माध्यम है। उन्होंने कहा कि महाराजा चक्रधर सिंह ने राजसिंहासन से अधिक महत्व कला को दिया और कलाकारों को संरक्षण देकर संगीत, नृत्य एवं साहित्य को आमजन के जीवन से जोड़ने का काम किया।

रायगढ़ घराने को मिली अंतरराष्ट्रीय पहचान

राज्यपाल ने कहा कि रायगढ़ भारतीय शास्त्रीय कलाओं की महत्वपूर्ण धरोहर भूमि है। रायगढ़ घराने के कथक ने देश ही नहीं, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी विशिष्ट पहचान बनाई है। महाराजा चक्रधर सिंह की रचनाएं ‘नर्तन सर्वस्व’, ‘तालतोय निधि’ और ‘राग रत्न मंजूषा’ आज भी कला और साहित्य के क्षेत्र में महत्वपूर्ण धरोहर हैं।

उन्होंने कहा कि चक्रधर समारोह अब केवल शासकीय या संस्थागत आयोजन नहीं रहा, बल्कि यह रायगढ़ की सांस्कृतिक धड़कन बन चुका है। देश के प्रतिष्ठित कलाकारों के साथ स्थानीय प्रतिभाओं को मंच मिलना इसकी खासियत है। पंथी, राउत नाचा, भरथरी, सुआ और करमा जैसे लोकनृत्य एवं लोकगीत छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विविधता की पहचान हैं।

पढ़ें   गौवंशों की तस्करी कर रहे थे शमताज, नसीम, मुस्तकीम, जिशान..पुलिस ने जान जोखिम में डालकर गौ-वंश को मुक्त कराया

विकास के साथ विरासत बचाना भी जरूरी

राज्यपाल ने कहा कि विकास के साथ सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित रखना भी जरूरी है। रायगढ़ औद्योगिक विकास के साथ अपनी कला और संस्कृति के लिए भी जाना जाता है। 41वां चक्रधर समारोह नई ऊर्जा और नई ऊंचाइयों की ओर बढ़ रहा है।

उन्होंने कहा कि कला और संस्कृति केवल पहचान का माध्यम नहीं, बल्कि पर्यटन और आर्थिक गतिविधियों को भी बढ़ावा देती है। डिजिटल युग में नई पीढ़ी का अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ाव जरूरी है। अपनी जड़ों से जुड़े रहना पिछड़ापन नहीं, बल्कि हमारी पहचान और ताकत है।

चक्रधर सिंह के ग्रंथों के संरक्षण पर जोर

राज्यसभा सांसद देवेंद्र प्रताप सिंह ने कहा कि महाराजा चक्रधर सिंह केवल शासक नहीं, बल्कि भारतीय कला और संस्कृति के महान संरक्षक थे। उन्होंने भारतीय संगीत और कला की परंपराओं को संरक्षित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

उन्होंने कहा कि महाराजा चक्रधर सिंह की रचनाएं और उनके द्वारा सृजित ग्रंथ भारतीय संगीत एवं कला जगत की अमूल्य धरोहर हैं। इनका संरक्षण, अध्ययन और प्रचार-प्रसार जरूरी है, ताकि आने वाली पीढ़ियां भी इस विरासत से परिचित हो सकें।

देवेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि उन्होंने महाराजा चक्रधर सिंह की महत्वपूर्ण रचनाओं और ग्रंथों के संरक्षण एवं प्रकाशन का विषय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सामने भी रखा है। उन्होंने उम्मीद जताई कि आने वाले समय में इन ग्रंथों के प्रकाशन की दिशा में केंद्र सरकार महत्वपूर्ण पहल करेगी।

चक्रधर समारोह रायगढ़ की पहचान: राधेश्याम राठिया

लोकसभा सांसद राधेश्याम राठिया ने कहा कि चक्रधर समारोह रायगढ़ की गौरवशाली सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक है। महाराजा चक्रधर सिंह ने संगीत और नृत्य के क्षेत्र में रायगढ़ को जो समृद्ध विरासत दी, उसे आगे बढ़ाने में समारोह की महत्वपूर्ण भूमिका है।

पढ़ें   ऑपरेशन ब्लैक फॉरेस्ट में जवानों के शौर्य को अमित शाह ने बताया स्वर्णिम अध्याय : कहा- गर्मी, ऊँचाई और IED के खतरे के बावजूद सुरक्षाबलों ने नक्सलियों का बेस कैंप किया ध्वस्त, मोदी सरकार का संकल्प 31 मार्च 2026 तक देश को नक्सलवाद से मुक्त करना

नगर निगम महापौर जीवर्धन चौहान ने अतिथियों और कलाकारों का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि चक्रधर समारोह रायगढ़ की कला-संस्कृति की विशिष्ट पहचान है और इसे नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने के लिए सभी का सहयोग जरूरी है।

कलेक्टर मयंक चतुर्वेदी ने कहा कि संस्कृति किसी समाज की आत्मा होती है और कला उसकी जीवंत अभिव्यक्ति। चक्रधर समारोह रायगढ़ की गौरवशाली सांस्कृतिक परंपरा को आगे बढ़ाने वाला महत्वपूर्ण आयोजन है।

गणेश वंदना से हुई पहली शाम की शुरुआत

समारोह की पहली शाम की शुरुआत गणेश वंदना से हुई। कला गुरु स्वर्गीय वेदमणि सिंह ठाकुर के शिष्यों ने प्रस्तुति देकर माहौल को भक्तिमय बना दिया। इसके बाद गायन और वादन की प्रस्तुतियों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।

प्रियंका साहू ने हारमोनियम पर संगत की, जबकि सुनीता तिवारी, ईश्वरी गुप्ता, शुभांगी साहू, चवल कुमार पटेल, वेदप्रकाश आदित्य और बसंत यादव ने गायन प्रस्तुत किया। वाद्य संगीत में देवलाल देवांगन ने पखावज, शान्तनु पटेल ने तबला, किशोर बारीक ने बाँसुरी और शगुफ्ता बानो ने वायलिन वादन किया। आनन्ददास महंत ने घुंघरू वादन से प्रस्तुति को और आकर्षक बनाया।

कलाकारों की प्रस्तुतियों को रामलीला मैदान में मौजूद दर्शकों ने तालियों की गड़गड़ाहट के साथ उत्साहपूर्वक सराहा। समारोह में जनप्रतिनिधियों, प्रशासनिक अधिकारियों, कलाकारों और बड़ी संख्या में कला प्रेमियों की मौजूदगी रही।

Share

 

 

 

 

 

You Missed