रायपुर, 19 सितंबर 2026। कलिंगा विश्वविद्यालय के विधि संकाय ने कानूनी सहायता प्रकोष्ठ के सहयोग से 11 सितंबर को पलौद गांव में ‘उपभोक्ता जागरूकता एवं कानूनी अधिकार’ विषय पर कानूनी सहायता जागरूकता शिविर का आयोजन किया। शिविर का उद्देश्य ग्रामीणों को उपभोक्ता अधिकारों, कर्तव्यों, अनुचित व्यापार प्रथाओं, धोखाधड़ी से बचाव और कानूनी सहायता प्राप्त करने की प्रक्रिया की जानकारी देना था।
विधि संकाय के अधिष्ठाता प्रो. डॉ. अज़ीमखान बी. पठान के मार्गदर्शन में आयोजित कार्यक्रम में संयोजिका सुश्री एकता चंद्राकर तथा संकाय समन्वयक सुश्री वंशिका कपूर, श्री प्रसून दुबे और श्री सौम्यदीप चक्रवर्ती के नेतृत्व में कानून के छात्रों ने ग्रामीण स्तर पर जागरूकता गतिविधियां संचालित कीं।

अभियान के तहत छात्रों ने घर-घर जाकर ग्रामीणों से संवाद किया और उपभोक्ता अधिकारों से संबंधित पर्चे वितरित किए। ग्रामीणों को अनुचित व्यापार प्रथाओं की पहचान करने, खरीदारी के बिल सुरक्षित रखने, शिकायत दर्ज कराने और जरूरत पड़ने पर कानूनी सहायता लेने के बारे में जानकारी दी गई।

इसके अलावा स्थानीय स्कूल में विद्यार्थियों के लिए उपभोक्ता संरक्षण और जिम्मेदार नागरिकता विषय पर संवादात्मक कानूनी साक्षरता सत्र आयोजित किए गए। छात्रों को कम उम्र से ही अपने अधिकारों और जिम्मेदारियों के प्रति जागरूक करने का प्रयास किया गया।
शिविर में अधिवक्ता कृष्णा कुमार सिन्हा ने भी हिस्सा लिया। उन्होंने ग्रामीणों को उपभोक्ता शिकायतों के निवारण और औपचारिक कानूनी उपचार प्राप्त करने की प्रक्रिया के संबंध में व्यावहारिक मार्गदर्शन दिया।
कार्यक्रम के दौरान कानून के छात्रों ने सामुदायिक कानूनी सर्वेक्षण भी किया। इसके माध्यम से ग्रामीणों के सामने आने वाली विभिन्न कानूनी समस्याओं को समझने का प्रयास किया गया, ताकि भविष्य में कानूनी सहायता और जागरूकता कार्यक्रमों को उनकी जरूरतों के अनुरूप संचालित किया जा सके।
कलिंगा विश्वविद्यालय के विधि संकाय ने कहा कि इस पहल का उद्देश्य कानूनी ज्ञान और जमीनी जरूरतों के बीच की दूरी कम करना तथा ग्रामीण समुदाय को न्याय तक पहुंच के लिए सशक्त बनाना है। कार्यक्रम के समापन पर समुदाय के हित में कानूनी सहायता और जागरूकता गतिविधियों को आगे भी जारी रखने की प्रतिबद्धता दोहराई गई।




