रायपुर, 19 सितम्बर 2026। आत्मनिर्भर छत्तीसगढ़ और स्वदेशी उत्पादों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से ग्रामोद्योग विभाग द्वारा ‘वोकल फॉर लोकल-सेल्फी विथ स्वदेशी’ सोशल अवेयरनेस कैम्पेन का आयोजन 17 सितम्बर को मेट्स यूनिवर्सिटी, रायपुर में किया गया। यह आयोजन मुख्यमंत्री की मंशानुरूप ग्रामोद्योग मंत्री गजेन्द्र यादव के दिशा-निर्देश तथा ग्रामोद्योग विभाग के सचिव सह प्रबंध संचालक राजेश सिंह राणा (IAS) के मार्गदर्शन में किया गया।
कार्यक्रम के दौरान बिलासा हैंडलूम के डिजाइनरों द्वारा तैयार किए गए डिजाइनों से बने हाथकरघा कोसा और कॉटन वस्त्रों के परिधानों का 40 से अधिक छात्र-छात्राओं ने रैंप वॉक किया। इस रैंप वॉक में विदेशी विद्यार्थियों ने भी उत्साहपूर्वक भाग लिया। कार्यक्रम में मेट्स यूनिवर्सिटी के करीब 400 से अधिक छात्र-छात्राएं और फैकल्टी सदस्य मौजूद रहे।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि छत्तीसगढ़ राज्य हाथकरघा संघ के अध्यक्ष भोजराम देवांगन ने प्रदेश के कोसा और कॉटन क्षेत्र के बुनकरों द्वारा तैयार किए जा रहे हाथकरघा वस्त्रों को अधिक से अधिक अपनाने की अपील की। उन्होंने कहा कि हाथकरघा से बने वस्त्र स्वास्थ्य के लिए भी लाभकारी हैं और इनके उपयोग से स्थानीय बुनकरों को रोजगार तथा आर्थिक मजबूती मिलती है।

ग्रामोद्योग विभाग के सचिव सह प्रबंध संचालक राजेश सिंह राणा ने बताया कि राष्ट्रीय हाथकरघा दिवस के अवसर पर 7 अगस्त 2026 को दीनदयाल उपाध्याय ऑडिटोरियम में स्वदेशी फैशन शो आयोजित किया गया था। इसमें सुकमा जिले की आत्मसमर्पित एवं पुनर्वासित 10 महिलाओं ने भाग लिया था, जिसकी राष्ट्रीय स्तर पर सराहना हुई।
उन्होंने बताया कि ग्रामोद्योग विभाग के माध्यम से हाथकरघा, रेशम, हस्तशिल्प, माटीकला और खादी ग्रामोद्योग जैसे क्षेत्रों में राज्य के 3.50 लाख से अधिक बुनकरों और शिल्पियों को स्थानीय स्तर पर रोजगार मिल रहा है। हाथकरघा उत्पादों में वैल्यू एडिशन और बाजार की मांग के अनुरूप डिजाइनर वस्त्र विकसित करने के लिए बिलासा हैंडलूम एम्पोरियम में NIFT डिजाइनर तथा विपणन विकास के लिए मार्केटिंग एग्जीक्यूटिव की नियुक्ति की गई है।
राणा ने बताया कि वर्तमान Gen-Z को छत्तीसगढ़ के स्थानीय उत्पादों के उपयोग के लिए प्रेरित करने के उद्देश्य से ग्रामोद्योग विभाग के Instagram पर QR कोड अपलोड किया गया है। इसके माध्यम से 1 अगस्त 2026 से छत्तीसगढ़ के हाथकरघा, हस्तशिल्प, माटीकला और खादी वस्त्र एवं उत्पादों के साथ सेल्फी या चित्र अपलोड करने तथा ग्रामोद्योग उत्पादों की खरीदी करने वाले प्रतिभागियों में से चयनित 10 ग्राहकों को प्रतिमाह पुरस्कार एवं उपहार दिए जाएंगे।
उन्होंने कहा कि ‘सेल्फी विथ स्वदेशी’ प्रतियोगिता का उद्देश्य स्थानीय बुनकरों और शिल्पियों के उत्पादों का प्रचार-प्रसार करने के साथ उनके विपणन को बढ़ावा देना है, ताकि प्रदेश के लाखों बुनकरों और शिल्पियों को इसका सीधा लाभ मिल सके। हाथकरघा वस्त्रों की खरीद से बुनकरों के रोजगार में वृद्धि के साथ प्रदेश के आर्थिक विकास को भी गति मिलती है।
कार्यक्रम में मेट्स यूनिवर्सिटी के महानिदेशक प्रियेश पगारिया, संचालक के.पी. यादव सहित ग्रामोद्योग विभाग के अधिकारी और अन्य गणमान्य लोग उपस्थित रहे।




