कोपरा, 4 अक्टूबर 2026/ स्वास्थ्य विभाग में 37 वर्षों से अधिक समय तक समर्पित सेवाएं देने के बाद अधिवार्षिकी आयु पूर्ण कर सेवानिवृत्त हुए एनएमए दौवा राम चक्रधारी को स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों-कर्मचारियों, जनप्रतिनिधियों, गणमान्य नागरिकों एवं नगरवासियों ने ससम्मान भावभीनी विदाई दी। इस अवसर पर उनके लंबे सेवाकाल, विशेषकर कुष्ठ रोग उन्मूलन के क्षेत्र में किए गए उल्लेखनीय कार्यों को याद करते हुए वक्ताओं ने उनके योगदान की सराहना की और उनके स्वस्थ, सुखी एवं दीर्घायु जीवन की कामना की।

विदाई समारोह को संबोधित करते हुए खंड चिकित्सा अधिकारी डॉ. स्नेहलता हुमने ने कहा कि चक्रधारी ने स्वास्थ्य विभाग में अपने दायित्वों का पूरी निष्ठा, अनुशासन और जिम्मेदारी के साथ निर्वहन किया। कुष्ठ रोग उन्मूलन कार्यक्रम में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही है। क्षेत्र में मरीजों की पहचान, उन्हें उपचार के लिए प्रेरित करने, नियमित उपचार सुनिश्चित कराने तथा बीमारी को लेकर समाज में फैली भ्रांतियों को दूर करने जैसे महत्वपूर्ण कार्यों में उन्होंने पूरे समर्पण के साथ योगदान दिया।

डॉ. हुमने ने कहा कि चक्रधारी की पहचान केवल एक कर्तव्यनिष्ठ कर्मचारी के रूप में ही नहीं, बल्कि सरल, सहज और सहयोगी व्यक्तित्व के रूप में भी रही है। अपनी कार्यकुशलता और व्यवहार के कारण उन्होंने सहकर्मियों के साथ आम लोगों के बीच भी अलग पहचान बनाई। उनकी सेवाएं और कार्यशैली विभाग के अधिकारी-कर्मचारियों के लिए सदैव स्मरणीय और प्रेरणादायी रहेंगी।
उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं में मैदानी कर्मचारियों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। विशेष रूप से कुष्ठ जैसी बीमारी के उन्मूलन के लिए मरीजों तक पहुंचना, उन्हें समय पर उपचार से जोड़ना और समाज में बीमारी के प्रति जागरूकता बढ़ाना बड़ी जिम्मेदारी है। चक्रधारी ने अपने सेवाकाल में इन जिम्मेदारियों को पूरी गंभीरता से निभाया।
लेप्रोसी डायग्नोसिस में थी विशेष दक्षता
डॉ. हुमने ने कहा कि उन्हें व्यक्तिगत रूप से चक्रधारी के साथ लंबे समय तक कार्य करने का अवसर भले ही नहीं मिला,लेकिन उच्चाधिकारियों एवं विभागीय कर्मचारियों से उनके कार्यों की प्रशंसा हमेशा सुनने को मिली। उन्होंने कहा कि चक्रधारी ने इस क्षेत्र में कुष्ठ उन्मूलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। लेप्रोसी डायग्नोसिस में उनकी दक्षता ऐसी थी कि उनके द्वारा चिन्हित किए गए मामलों की पुष्टि और कार्य की सटीकता पर विशेष भरोसा किया जाता था।
उन्होंने कहा कि चक्रधारी और उस दौर में कार्यरत एनएमए कर्मचारियों की पूरी टीम की मेहनत के कारण फिंगेश्वर-राजिम क्षेत्र का नाम प्रदेश में कुष्ठ उन्मूलन अभियान के उल्लेखनीय कार्यों के लिए आज भी लिया जाता है। 1990 के दशक में जब कुष्ठ रोग को लेकर समाज में अनेक भ्रांतियां थीं और इसे अभिशाप की दृष्टि से देखा जाता था, उस दौर में चक्रधारी और उनकी टीम ने गांव-गांव पहुंचकर लोगों को जागरूक किया तथा मरीजों को नियमित दवा लेने और उपचार पूरा करने के लिए प्रेरित किया।
- जन्मभूमि को ही बनाया कर्मभूमि : डॉ. हिरोंदिया
वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी एवं पूर्व खंड चिकित्सा अधिकारी डॉ. हिरोंदिया ने कहा कि चक्रधारी ने 37 वर्षों से अधिक समय तक इसी क्षेत्र में अपनी सेवाएं प्रदान कीं। उनका समर्पण, अनुभव और सेवाभाव आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणादायी एवं अनुकरणीय है। उन्होंने कहा, “किस्मत वालों को ही यह सौभाग्य नसीब होता है कि उनकी जन्मभूमि ही उनकी कर्मभूमि भी बने। चक्रधारी उनमें से एक हैं।”
चक्रधारी 12 दिसंबर 1988 से प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र कोपरा में पदस्थ रहे और 30 सितंबर 2026 को अधिवार्षिकी आयु पूर्ण कर सेवानिवृत्त हुए। डॉ. हिरोंदिया ने उनके सेवाकाल के योगदान को याद करते हुए उनके स्वस्थ, सुखमय और मंगलमय भविष्य की कामना की।
- सामाजिक कार्यों में भी रहा परिवार का योगदान
नगर पंचायत अध्यक्ष रूप कुमार साहू ने कहा कि चक्रधारी एवं उनका परिवार स्वास्थ्य सेवाओं तक ही सीमित नहीं रहा, बल्कि नगर और क्षेत्र के सामाजिक कार्यों में भी हमेशा सहयोग देता आया है। उन्होंने कहा कि सेवाभाव उनके व्यक्तित्व की विशेष पहचान रही है। वरिष्ठ पत्रकार गोरेलाल सिन्हा ने भी कार्यक्रम को संबोधित करते हुए चक्रधारी के सेवाकाल और सामाजिक योगदान को याद किया तथा सेवानिवृत्ति पर उन्हें बधाई एवं स्वस्थ भविष्य के लिए शुभकामनाएं दीं।
- सरलता और आत्मीय व्यवहार ने सभी का दिल जीता : डॉ. चंद्रा
प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र कोपरा के आरएमओ डॉ. चंद्रा ने कहा कि चक्रधारी उनसे सेवाकाल और अनुभव में काफी वरिष्ठ थे, लेकिन उनका व्यवहार हमेशा अत्यंत विनम्र और आत्मीय रहा। वे अस्पताल के कार्यों के साथ व्यक्तिगत स्तर पर भी सहयोग और मार्गदर्शन के लिए सदैव तत्पर रहते थे। उन्होंने कहा कि उनके कार्य में कभी लापरवाही देखने को नहीं मिली। उन्हें जो भी जिम्मेदारी दी जाती थी, उसे वे पूरी कार्यकुशलता और जिम्मेदारी से पूरा करते थे। उनकी यही कार्यशैली हम सभी के लिए अनुकरणीय है। सेवानिवृत्ति के बाद भी विभाग और कर्मचारी समय-समय पर उनसे मार्गदर्शन लेते रहेंगे।
समारोह में उपस्थित अन्य अधिकारी-कर्मचारियों ने भी चक्रधारी के साथ बिताए सेवाकाल के अनुभव साझा किए। सहकर्मियों ने कहा कि वे अपने कार्य के प्रति सजग रहने के साथ जरूरत के समय सहयोग के लिए हमेशा तत्पर रहते थे। वरिष्ठ और कनिष्ठ कर्मचारियों के साथ उनका समान रूप से आत्मीय व्यवहार उनके व्यक्तित्व की विशेषता रही।
- 37 वर्षों की सेवा को याद कर भावुक हुए चक्रधारी
विदाई समारोह में एनएमए दौवा राम चक्रधारी अपने 37 वर्षों से अधिक के सेवाकाल को याद करते हुए भावुक हो गए। उन्होंने कहा कि कुष्ठ और पोलियो जैसी बीमारियों से प्रभावित व्यक्ति और उसके परिवार की पीड़ा को शब्दों में व्यक्त करना आसान नहीं है। यही कारण था कि उन्होंने सेवाकाल में मरीज को केवल एक रोगी के रूप में नहीं, बल्कि संवेदनशीलता और मानवीय दृष्टिकोण से देखने का प्रयास किया। उन्होंने अपने एनएमए साथियों, वरिष्ठ अधिकारियों, सहकर्मियों तथा विशेष रूप से अपनी धर्मपत्नी सरोज चक्रधारी के सहयोग को याद करते हुए सभी के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि लंबे सेवाकाल में परिवार और सहकर्मियों के सहयोग ने उन्हें हर जिम्मेदारी को पूरी निष्ठा से निभाने की शक्ति दी।
- कई महत्वपूर्ण उपलब्धियां रहीं सेवाकाल का हिस्सा
चक्रधारी के सेवाकाल में कुष्ठ रोग उन्मूलन और स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़ी कई महत्वपूर्ण उपलब्धियां रहीं। इनमें क्षेत्र में यूरोपियन कमीशन के प्रतिनिधिमंडल का भ्रमण, तत्कालीन मध्यप्रदेश में एमडीटी (मल्टी ड्रग थेरेपी) के शुरुआती प्रायोगिक उपयोग से जुड़ा कार्य, विद्यालयों में स्वास्थ्य परीक्षण जैसे महत्वपूर्ण प्रयास तथा व्यापक सर्वे अभियान शामिल रहे।
विशेष रूप से एक महत्वपूर्ण सर्वे अभियान के दौरान एक ही दिन में 37 कुष्ठ रोगियों की पहचान उनके सेवाकाल की उल्लेखनीय उपलब्धियों में शामिल रही। विद्यालयों में स्वास्थ्य परीक्षण की पहल भी आगे चलकर व्यापक स्तर पर अपनाई गई। इन प्रयासों ने क्षेत्र में रोगों की समय पर पहचान और उपचार के प्रति जागरूकता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
- परिवार ने भी साझा किए सेवाकाल से जुड़े संस्मरण
इस अवसर पर चक्रधारी की धर्मपत्नी सरोज चक्रधारी, उनके छोटे भाई एवं स्वास्थ्य विभाग में नेत्र सहायक के पद पर कार्यरत योगानंद चक्रधारी, भतीजे एवं फार्मासिस्ट कमलेश चक्रधारी तथा पुत्र एवं मुख्यमंत्री प्रेस प्रकोष्ठ में पदस्थ जनसंपर्क अधिकारी नितेश चक्रधारी ने भी उनके सेवाकाल और पारिवारिक जीवन से जुड़े अनुभव साझा किए। परिजनों ने कहा कि स्वास्थ्य विभाग की जिम्मेदारियों को निभाते हुए चक्रधारी ने सेवा और परिवार के बीच हमेशा संतुलन बनाए रखा। कठिन परिस्थितियों में भी कर्तव्य को प्राथमिकता देना उनकी कार्यशैली का हिस्सा रहा। कार्यक्रम के अंत में स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों-कर्मचारियों ने चक्रधारी को पुष्पगुच्छ एवं स्मृति-चिह्न भेंट कर सम्मानित किया और उनके स्वस्थ, सुखी एवं दीर्घायु जीवन की कामना करते हुए भावभीनी विदाई दी।
इस अवसर पर सहायक संचालक वित्त नीलिमा भोई, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र कोपरा के समस्त अधिकारी-कर्मचारी, केंद्र से संबद्ध उपस्वास्थ्य केंद्रों के कर्मचारी, परिवार के सदस्य, नगर के जनप्रतिनिधि एवं बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।



