नई दिल्ली, 5 अक्टूबर। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति समिति (MPC) की तीन दिवसीय बैठक आज से शुरू हो रही है। बैठक में रेपो रेट को लेकर बड़ा फैसला होने की संभावना है। MPC के फैसलों की घोषणा 7 अक्टूबर को की जाएगी।
कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और महंगाई के दबाव के बीच RBI के सामने ब्याज दरों को लेकर चुनौती बढ़ गई है। बाजार में चर्चा है कि केंद्रीय बैंक रेपो रेट में 25 बेसिस पॉइंट यानी 0.25 फीसदी की बढ़ोतरी कर सकता है। ऐसा होने पर रेपो रेट 5.25 फीसदी से बढ़कर 5.50 फीसदी हो सकता है।

महंगे कच्चे तेल ने बढ़ाई चिंता
अगस्त में हुई पिछली MPC बैठक के बाद से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में काफी तेजी आई है। सितंबर की शुरुआत में क्रूड ऑयल 100 डॉलर प्रति बैरल के पार चला गया था और 9 सितंबर को यह करीब 113 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया। सितंबर के अंत में ब्रेंट क्रूड करीब 103 डॉलर प्रति बैरल पर रहा।

यह स्तर RBI के करीब 85 डॉलर प्रति बैरल के अनुमान से काफी अधिक है। इसके अलावा कमजोर मानसूनी बारिश से कृषि क्षेत्र पर भी असर पड़ा है। ऐसे में महंगाई को लेकर चिंता बढ़ी हुई है।
SBI ने दो बार रेट बढ़ाने की दी सलाह
देश के सबसे बड़े सरकारी बैंक SBI ने भी RBI को रेपो रेट बढ़ाने की सलाह दी है। SBI रिसर्च ने अक्टूबर और दिसंबर में 25-25 बेसिस पॉइंट की दो बढ़ोतरी की सिफारिश की है।
रिपोर्ट में कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और बाहरी आर्थिक झटकों को महंगाई के लिए जोखिम बताया गया है। SBI के एक स्ट्रेस मॉडल के मुताबिक अगले 15 दिनों में क्रूड ऑयल की कीमत 123 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती है, हालांकि इसे सामान्य अनुमान नहीं बल्कि तनावपूर्ण स्थिति का आकलन बताया गया है। दूसरे मॉडल में औसत कीमत करीब 105 डॉलर प्रति बैरल रहने का अनुमान है।
बढ़ी तो EMI पर पड़ेगा सीधा असर
अगर RBI रेपो रेट बढ़ाता है तो बैंकों के लिए कर्ज की लागत बढ़ सकती है। इसका असर नए होम लोन, कार लोन और अन्य कर्ज पर पड़ने के साथ-साथ EMI पर भी पड़ सकता है। त्योहारी सीजन में ब्याज दर बढ़ने से घर और वाहन खरीदने वालों की जेब पर अतिरिक्त बोझ पड़ने की आशंका है।
हालांकि, RBI ने अभी रेपो रेट बढ़ाने का कोई आधिकारिक फैसला नहीं किया है। फिलहाल रेपो रेट 5.25 फीसदी पर स्थिर है और अगस्त की बैठक में लगातार चौथी बार इसमें बदलाव नहीं किया गया था।



