रायपुर, 14 अक्टूबर। महिलाओं को स्तन संबंधी बीमारियों की समय पर पहचान और बेहतर उपचार की सुविधा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से रामकृष्ण केयर कैंसर इंस्टीट्यूट ने रायपुर में समर्पित ‘ब्रेस्ट केयर क्लिनिक’ की शुरुआत की है। यहां ब्रेस्ट सर्जरी, मेडिकल ऑन्कोलॉजी और रेडिएशन ऑन्कोलॉजी की विशेषज्ञ सेवाएं एक ही स्थान पर उपलब्ध होंगी। क्लिनिक प्रत्येक गुरुवार को संचालित होगी।
अंतरराष्ट्रीय बॉक्सर एवं रायपुर स्थित RUSH Fitness की संस्थापक आकांक्षा मिश्रा ने मुख्य अतिथि के रूप में क्लिनिक का उद्घाटन किया। इस अवसर पर रामकृष्ण केयर हॉस्पिटल्स के मेडिकल एवं मैनेजिंग डायरेक्टर डॉ. संदीप दवे सहित अस्पताल के वरिष्ठ चिकित्सक, ब्रेस्ट कैंसर से उबर चुकी महिलाएं और अन्य गणमान्य अतिथि मौजूद रहे।

₹1,499 में ब्रेस्ट हेल्थ स्क्रीनिंग पैकेज
महिलाओं को स्तन स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करने और समय पर चिकित्सकीय सलाह लेने के लिए प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से अस्पताल ने ₹1,499 का ब्रेस्ट हेल्थ स्क्रीनिंग पैकेज उपलब्ध कराया है। इसमें क्लिनिकल ब्रेस्ट एग्जामिनेशन, सोनामैमोग्राफी और स्त्री रोग विशेषज्ञ या कैंसर विशेषज्ञ से परामर्श शामिल है।

जांच और इमेजिंग की आवश्यकता महिला की उम्र, लक्षणों, व्यक्तिगत जोखिम और चिकित्सकीय स्थिति के आधार पर निर्धारित की जाएगी। अस्पताल का उद्देश्य स्तन संबंधी समस्याओं की पहचान के लिए जांच को सुलभ बनाना और महिलाओं को समय पर उपचार तक पहुंचने में मदद करना है।
‘पिंक टॉक्स’ में स्तन की गांठ की जांच पर चर्चा
क्लिनिक के शुभारंभ के अवसर पर रायपुर ऑब्स्टेट्रिक्स एंड गायनेकोलॉजी सोसाइटी (ROGS) और रायपुर मेनोपॉज सोसाइटी के सहयोग से ‘पिंक टॉक्स’ नामक पैनल चर्चा आयोजित की गई। इसमें ‘ट्रिपल असेसमेंट ऑफ ब्रेस्ट लम्प्स’ यानी स्तन में गांठ की तीन चरणों में समग्र जांच और निदान पर विशेषज्ञों ने विचार साझा किए।
चिकित्सकों ने बताया कि सही निदान के लिए क्लिनिकल जांच, उपयुक्त ब्रेस्ट इमेजिंग और जरूरत पड़ने पर बायोप्सी महत्वपूर्ण हैं। चर्चा में डॉ. मौ रॉय, डॉ. गौरव गुप्ता और डॉ. रवि जायसवाल ने संचालन किया। इसमें रायपुर और आसपास के क्षेत्रों के स्त्री रोग विशेषज्ञों तथा अन्य चिकित्सा विशेषज्ञों ने भाग लिया।
हर मरीज को पूरी ब्रेस्ट निकालने की जरूरत नहीं : डॉ. मौ रॉय
अस्पताल की क्लिनिकल डायरेक्टर एवं सीनियर सर्जिकल ऑन्कोलॉजिस्ट डॉ. मौ रॉय ने कहा कि ब्रेस्ट कैंसर का निदान होने का अर्थ यह नहीं है कि हर मरीज की पूरी ब्रेस्ट निकालनी पड़ेगी। उपयुक्त मरीजों में ब्रेस्ट कंजर्वेशन और ऑनकोप्लास्टिक सर्जरी के जरिए कैंसर का उपचार करते हुए स्तन के आकार को सुरक्षित रखा जा सकता है।
उन्होंने बताया कि जिन मरीजों के लिए मास्टेक्टॉमी यानी पूरी ब्रेस्ट निकालने की सर्जरी आवश्यक होती है, उनके साथ ब्रेस्ट रिकंस्ट्रक्शन के विकल्पों पर भी चर्चा की जानी चाहिए। हालांकि, सर्जरी का चुनाव बीमारी की प्रकृति, मरीज की स्थिति और कैंसर पर प्रभावी नियंत्रण की जरूरत के आधार पर किया जाता है।
20 वर्ष की उम्र से ब्रेस्ट हेल्थ के प्रति जागरूक रहने की सलाह
विशेषज्ञों ने महिलाओं को 20 वर्ष की उम्र से ही अपने स्तनों के सामान्य आकार और बनावट के प्रति जागरूक रहने तथा किसी भी असामान्य बदलाव पर ध्यान देने की सलाह दी। स्तन या बगल में नई गांठ, त्वचा में गड्ढा पड़ना, निप्पल में बदलाव या असामान्य स्राव जैसे लक्षण दिखाई देने पर चिकित्सकीय परामर्श लेना चाहिए। ऐसे लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए, भले ही दर्द न हो।
डॉक्टरों के अनुसार, उम्र बढ़ने के साथ ब्रेस्ट कैंसर का जोखिम बढ़ता है, विशेषकर 40 वर्ष के बाद। हालांकि, कम उम्र की महिलाओं में भी यह बीमारी हो सकती है। इसलिए स्क्रीनिंग और आगे की जांच का निर्णय व्यक्तिगत जोखिम, लक्षणों और चिकित्सकीय सलाह के आधार पर लिया जाना चाहिए।
22 वर्षों के अनुभव के साथ उन्नत उपचार सुविधाएं
रामकृष्ण केयर कैंसर इंस्टीट्यूट में ब्रेस्ट ऑन्कोलॉजी के क्षेत्र में 22 वर्षों के अनुभव के आधार पर विभिन्न विशेषज्ञ सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। इनमें ब्रेस्ट कंजर्वेशन सर्जरी, वायर-गाइडेड ब्रेस्ट सर्जरी, सेंटिनल लिम्फ नोड मैपिंग, ऑनकोप्लास्टिक ब्रेस्ट सर्जरी, ब्रेस्ट रिकंस्ट्रक्शन और जोखिम कम करने के उद्देश्य से की जाने वाली सर्जरी शामिल हैं।
मेडिकल ऑन्कोलॉजी विभाग के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. रवि जायसवाल ने बताया कि प्रत्येक मरीज की उपचार योजना ट्यूमर की विशेषताओं, बीमारी के चरण और मरीज के समग्र स्वास्थ्य को ध्यान में रखकर बनाई जाती है। उपचार के संभावित दुष्प्रभावों, उनके प्रबंधन और निर्धारित उपचार पूरा करने के महत्व के बारे में मरीजों और उनके परिवारों को स्पष्ट जानकारी देना भी जरूरी है।
वहीं, रेडिएशन ऑन्कोलॉजी विभाग के प्रमुख डॉ. गौरव गुप्ता ने बताया कि अस्पताल में एक्टिव ब्रीद कोऑर्डिनेटर (ABC) तकनीक का उपयोग किया जाता है। यह नियंत्रित तरीके से सांस रोककर रेडिएशन थेरेपी देने में सहायता करती है। उपयुक्त मरीजों में, विशेषकर बाईं ओर के स्तन कैंसर के उपचार के दौरान, इससे हृदय पर पड़ने वाले रेडिएशन के प्रभाव को कम करने में मदद मिल सकती है।
सर्वाइवर्स ने साझा किए अनुभव, समय पर जांच का दिया संदेश
कार्यक्रम में ब्रेस्ट कैंसर से उबर चुकी दो महिलाओं ने बीमारी के दौरान आई भावनात्मक चुनौतियों, परिवार के सहयोग और समय पर उपचार के महत्व पर अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने महिलाओं से डर और सामाजिक झिझक दूर कर स्तन संबंधी समस्याओं पर खुलकर बात करने तथा बिना देरी चिकित्सकीय सलाह लेने की अपील की।
अंतरराष्ट्रीय बॉक्सर और RUSH Fitness की संस्थापक आकांक्षा मिश्रा ने कहा कि महिलाओं की वास्तविक ताकत अच्छे स्वास्थ्य से शुरू होती है। फिट और सक्रिय रहने के साथ शरीर में होने वाले बदलावों को समझना भी जरूरी है। उन्होंने कहा कि डर या सामाजिक झिझक के कारण स्तन संबंधी समस्याओं पर चुप रहने के बजाय समय पर डॉक्टर से सलाह लेना साहस की निशानी है।
रामकृष्ण केयर हॉस्पिटल्स के मेडिकल एवं मैनेजिंग डायरेक्टर डॉ. संदीप दवे ने कहा कि जागरूकता, बीमारी के निदान और उपचार के बीच की बाधाओं को दूर करना जरूरी है। स्वास्थ्य संस्थानों की जिम्मेदारी है कि वे विशेषज्ञ सेवाएं, स्पष्ट मार्गदर्शन और मरीजों के सहयोग की सुविधा एक साथ उपलब्ध कराएं।
अस्पताल प्रबंधन के अनुसार, नई ब्रेस्ट केयर क्लिनिक का उद्देश्य महिलाओं को एक ही स्थान पर समन्वित विशेषज्ञ सेवाएं उपलब्ध कराना और स्तन संबंधी बीमारियों की समय पर पहचान एवं उपचार को प्रोत्साहित करना है।


