रायपुर, 20 अक्टूबर 2026। राजधानी रायपुर के पुरानी बस्ती स्थित ऐतिहासिक कंकाली मठ के कपाट विजयादशमी के अवसर पर मंगलवार सुबह 6 बजे श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए। साल में केवल एक दिन खुलने वाले मठ के कपाट के साथ ही यहां भक्तों की भीड़ जुटने लगी। बड़ी संख्या में श्रद्धालु कतार में खड़े होकर मठ में रखी प्राचीन वस्तुओं के दर्शन कर रहे हैं। श्रद्धालुओं को मंगलवार रात 12 बजे तक दर्शन का अवसर मिलेगा। इसके बाद मठ के कपाट फिर बंद कर दिए जाएंगे।
कंकाली मठ में नागा साधुओं से जुड़ी करीब 1000 साल पुरानी वस्तुएं रखी हुई हैं। इनमें कमंडल, कपड़े, चिमटा, त्रिशूल, ढाल, कुल्हाड़ी सहित कई प्राचीन अस्त्र-शस्त्र और साधना में उपयोग की जाने वाली सामग्री शामिल हैं। विजयादशमी के दिन इन वस्तुओं के दर्शन के लिए मठ खोला जाता है और विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। साल में सिर्फ एक बार यह अवसर मिलने के कारण श्रद्धालुओं में खास उत्साह रहता है।

विजयादशमी पर ही क्यों खुलते हैं मठ के कपाट?
कंकाली मठ से जुड़ी मान्यता के अनुसार, माता कंकाली ने एक बार स्वप्न में महंत कृपाल गिरी महाराज को तालाब के किनारे मंदिर बनवाकर अपनी प्रतिमा स्थापित करने का निर्देश दिया था। इसके बाद माता की प्रतिमा को मठ से मंदिर में स्थापित किया गया। बताया जाता है कि प्रतिमा की स्थापना के बाद महंत कृपाल गिरी महाराज दुखी रहने लगे। तब माता ने उन्हें दर्शन देकर कहा कि वे विजयादशमी के दिन अपने पुराने घर यानी मठ में विराजमान होंगी।

इसी धार्मिक मान्यता के चलते हर साल दशहरे पर कंकाली मठ के कपाट खोले जाते हैं। इस दिन मठ में रखी प्राचीन वस्तुओं की पूजा की जाती है और श्रद्धालु माता के दर्शन के साथ नागा साधुओं की परंपरा से जुड़ी वस्तुओं को देखते हैं। मठ की देखरेख महंत कृपाल गिरी महाराज की 12वीं पीढ़ी कर रही है।
तांत्रिक साधना का प्रमुख केंद्र रहा है कंकाली मठ
कंकाली मठ का निर्माण श्मशान घाट पर हुआ था। इसे नागा साधुओं की तांत्रिक साधना के प्रमुख केंद्रों में गिना जाता है। मठ के आसपास नागा साधुओं की समाधियां भी स्थित हैं। इसके आसपास कई अन्य मंदिर भी हैं। यहां रखी प्राचीन वस्तुओं को साधुओं की साधना, परंपरा और धार्मिक जीवन से जुड़ा माना जाता है।
मठ की ऐतिहासिक और धार्मिक पहचान के कारण विजयादशमी के दिन यहां दूर-दूर से श्रद्धालु पहुंचते हैं। प्राचीन अस्त्र-शस्त्रों और साधना में इस्तेमाल होने वाली वस्तुओं को देखने के लिए सुबह से ही भक्तों की कतारें लग जाती हैं।
650 साल पुराने कंकाली तालाब का भी विशेष महत्व
कंकाली मठ के साथ कंकाली तालाब और मंदिर का भी विशेष धार्मिक महत्व है। बताया जाता है कि तालाब करीब 650 साल पुराना है और पहले इसे कंकाली कुंड के नाम से जाना जाता था। मान्यता के अनुसार, महंत कृपाल गिरी महाराज ने मंदिर और तालाब का निर्माण कराया था। माता के भक्त अपनी मनोकामनाएं लेकर यहां पहुंचते हैं।
नवरात्र में ज्योत-जवारा विसर्जन की परंपरा
कंकाली मंदिर और तालाब में चैत्र और शारदीय नवरात्र के दौरान भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। परंपरा के अनुसार, नवमी और दशमी के अवसर पर तालाब में ज्योत और जवारा का विसर्जन किया जाता है। धार्मिक मान्यताओं और सदियों पुरानी परंपराओं के कारण कंकाली मंदिर और मठ रायपुर के प्रमुख आस्था केंद्रों में शामिल हैं।
दर्शन का समय: विजयादशमी के दिन सुबह 6 बजे से रात 12 बजे तक। इसके बाद मठ के कपाट बंद कर दिए जाएंगे।

