रायपुर, 21 अक्टूबर। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) छत्तीसगढ़ में अपने संगठनात्मक ढांचे में बड़ा बदलाव कर सकता है। प्रदेश को दो संभागों में पुनर्गठित करने की संभावना जताई जा रही है। संघ प्रमुख डॉ. मोहन भागवत 22 अक्टूबर से छत्तीसगढ़ के दो दिवसीय प्रवास पर रहेंगे। इस दौरान बिलासपुर में प्रदेश के संगठन पदाधिकारियों के साथ होने वाली बैठकों में संगठन विस्तार और नई संरचना पर चर्चा होने की संभावना है।
अब तक छत्तीसगढ़ में संघ का संगठन एकल प्रांतीय इकाई के रूप में संचालित होता रहा है। लेकिन देशभर में प्रांत व्यवस्था में बदलाव के बाद भौगोलिक दूरी, मैदानी क्षेत्रों की परिस्थितियों और वनांचल की अलग-अलग चुनौतियों को देखते हुए प्रदेश को दो संभागों में बांटने की योजना पर काम किए जाने की चर्चा है।

बिलासपुर-सरगुजा और रायपुर-दुर्ग-बस्तर का नया समीकरण
प्रस्तावित व्यवस्था के अनुसार, बिलासपुर और सरगुजा संभाग को मिलाकर एक संगठनात्मक संभाग बनाया जा सकता है। वहीं रायपुर, दुर्ग और बस्तर संभाग को दूसरे संभाग में शामिल करने की संभावना है। हालांकि, इस संबंध में अंतिम निर्णय और आधिकारिक घोषणा की पुष्टि होना बाकी है।

संघ की इस संभावित नई व्यवस्था का प्रमुख उद्देश्य दूरस्थ क्षेत्रों तक संगठन की पहुंच मजबूत करना है। खासकर बस्तर और सरगुजा के अंतिम छोर तक शाखाओं का नेटवर्क बढ़ाने और समाज के विभिन्न वर्गों से संपर्क मजबूत करने पर जोर दिया जा सकता है।
युवाओं को जोड़ने पर रहेगा जोर
बिलासपुर में होने वाली बैठकों का एजेंडा केवल संगठनात्मक बदलाव तक सीमित नहीं रहने की संभावना है। संघ की रणनीति में 40 वर्ष से कम उम्र के युवाओं को वैचारिक रूप से जोड़ने और जन-संवाद बढ़ाने पर विशेष ध्यान दिया जा सकता है।
इसके साथ ही आदिवासी बहुल क्षेत्रों में जन-जागरण अभियान तेज करने, समाज के विभिन्न वर्गों तक पहुंच बनाने और घर-घर जाकर वैचारिक साहित्य एवं परिचय सामग्री पहुंचाने जैसे अभियानों की समीक्षा भी चर्चा का हिस्सा हो सकती है।
मोहन भागवत के दौरे पर टिकी नजरें
संघ प्रमुख डॉ. मोहन भागवत का 22 अक्टूबर से शुरू होने वाला छत्तीसगढ़ प्रवास संगठन की आगामी रणनीति के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। बिलासपुर में होने वाली बैठकों के दौरान प्रदेश के संगठनात्मक विस्तार, शाखाओं की सक्रियता और नई संरचना से जुड़े विषयों पर चर्चा की संभावना है।
फिलहाल, प्रदेश को दो संभागों में बांटने की संभावित योजना को लेकर आधिकारिक पुष्टि का इंतजार है। यदि यह बदलाव लागू होता है, तो छत्तीसगढ़ में संघ के संगठनात्मक कामकाज और क्षेत्रीय समन्वय की व्यवस्था में महत्वपूर्ण परिवर्तन देखने को मिल सकता है।


