रायपुर, 28 अक्टूबर 2026। दीपावली प्रकाश, प्रेम, उल्लास और समृद्धि का पर्व है। इस अवसर पर घरों में मां लक्ष्मी की पूजा-अर्चना कर सुख-समृद्धि की कामना की जाती है। लेकिन दीपावली की वास्तविक सार्थकता केवल पूजा-पाठ और घरों को रोशन करने तक सीमित नहीं है, बल्कि महिलाओं को सम्मान, समानता और स्वतंत्र पहचान देने में भी है। यह विचार उर्मिला फाउंडेशन, रायपुर की निदेशक नम्रता सिंह ने अपने लेख में व्यक्त किए हैं। उन्होंने कहा कि नारी का सम्मान ही सच्ची लक्ष्मी पूजा का आधार है।
परिवार की आधारशिला हैं महिलाएं
नम्रता सिंह के अनुसार, महिला परिवार की आधारशिला होती है। मां के रूप में वह बच्चों को संस्कार देती है, बेटी के रूप में परिवार की आशा बनती है, बहन के रूप में स्नेह बांटती है और पत्नी के रूप में जीवन के संघर्षों में अपने साथी का संबल बनती है। परिवार की खुशियों और जिम्मेदारियों में महिलाओं की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। इसके बावजूद कई बार उनके त्याग, परिश्रम और भावनाओं को वह महत्व नहीं मिल पाता, जिसकी वे हकदार हैं।

महिलाओं के प्रति भेदभाव दूर करना जरूरी
लेख में कहा गया है कि दीपावली पर लोग अपने घरों की साफ-सफाई और सजावट करते हैं, लेकिन समाज की सोच को सकारात्मक बनाना भी उतना ही जरूरी है। महिलाओं के प्रति भेदभाव, बेटियों को कमतर समझने की प्रवृत्ति और उनके सपनों की अनदेखी जैसी सामाजिक चुनौतियों को दूर करने की आवश्यकता है।

बेटियों को शिक्षा, रोजगार और आगे बढ़ने के समान अवसर देना तथा महिलाओं की भावनाओं और निर्णयों का सम्मान करना एक बेहतर समाज के निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं।
नारी सम्मान को बनाएं जीवन का संस्कार
नम्रता सिंह ने अपने लेख में जोर दिया है कि नारी सम्मान केवल किसी विशेष अवसर पर व्यक्त की जाने वाली भावना नहीं, बल्कि दैनिक जीवन में अपनाया जाने वाला संस्कार होना चाहिए। परिवार में महिलाओं को सुरक्षा, सम्मान और स्वतंत्र पहचान मिलनी चाहिए। उन्हें अपनी प्रतिभा विकसित करने, आत्मनिर्भर बनने और अपने सपनों को साकार करने के पर्याप्त अवसर मिलने चाहिए।
उन्होंने कहा कि महिलाओं के योगदान को स्वीकार करना और उनके विचारों को महत्व देना परिवार और समाज, दोनों को मजबूत बनाता है।
बदलाव की शुरुआत अपने घर से हो
लेखिका का मानना है कि किसी भी समाज की वास्तविक प्रगति तभी संभव है, जब महिलाओं को समान अधिकार और सम्मान मिले। बेटियों को आगे बढ़ने का अवसर देना, महिलाओं की भावनाओं को समझना और उनके आत्मसम्मान की रक्षा करना समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। इसके लिए बदलाव की शुरुआत अपने घर और अपने व्यवहार से करनी होगी।
सम्मान और समानता का संकल्प लें
दीपावली के अवसर पर नम्रता सिंह ने महिलाओं के जीवन में सम्मान, समानता और अवसरों का उजाला फैलाने का संकल्प लेने का संदेश दिया। उनके अनुसार, सच्ची समृद्धि केवल धन-संपत्ति में नहीं, बल्कि सम्मानपूर्ण रिश्तों, समान अधिकारों और खुशहाल परिवारों में निहित है।
उन्होंने संदेश दिया कि जब महिलाओं को परिवार और समाज में उचित सम्मान मिलेगा, तभी त्योहार की खुशियां वास्तविक अर्थों में सार्थक होंगी।
लेखिका: नम्रता सिंह, निदेशक, उर्मिला फाउंडेशन, रायपुर
नोट: यह लेखिका की व्यक्तिगत राय है।


