28 Oct 2026, Wed
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धान के कटोरे में चावल महंगा: जीरा राइस 120 रुपए किलो पहुंचा, श्रीराम में 38 और अब्बा हुजूर में 40 रुपए तक की बढ़ोतरी

भिलाई, 28 अक्टूबर। छत्तीसगढ़ में चावल की बढ़ती कीमतों ने आम लोगों और मध्यमवर्गीय परिवारों का घरेलू बजट बिगाड़ दिया है। धान के कटोरे के नाम से मशहूर प्रदेश में दूसरे राज्यों से आने वाले लोकप्रिय और खुशबूदार चावल की कीमतों में 20 से 40 रुपये प्रति किलो तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। भिलाई और दुर्ग के बाजारों में चावल के दाम बढ़ने से उपभोक्ताओं की परेशानी बढ़ गई है।

बाजार में जीरा राइस, काली मूंछ, जय श्रीराम और अब्बा हुजूर जैसी लोकप्रिय किस्मों की कीमतों में बड़ा उछाल आया है। कुछ सप्ताह पहले तक 90 रुपये प्रति किलो बिकने वाला जीरा राइस अब 120 रुपये तक पहुंच गया है। इसी तरह काली मूंछ चावल 65 से बढ़कर 85 रुपये, जय श्रीराम ब्रांड का चावल 62 से बढ़कर 100 रुपये और अब्बा हुजूर चावल 70 से बढ़कर 110 रुपये प्रति किलो तक बिक रहा है।

दूसरे राज्यों से आवक प्रभावित, कीमतों पर असर

व्यापारियों और थोक डीलरों के अनुसार, छत्तीसगढ़ में मोटे और मध्यम धान का उत्पादन बड़े पैमाने पर होता है, लेकिन बारीक और सुगंधित चावल की कई किस्मों के लिए प्रदेश को दूसरे राज्यों पर निर्भर रहना पड़ता है। कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र और केरल से चावल की आपूर्ति होती है।

बताया जा रहा है कि हालिया बेमौसम बारिश और बाढ़ के कारण कुछ उत्पादक राज्यों में धान की फसलों को नुकसान पहुंचा है। इससे आपूर्ति प्रभावित हुई है और बाजार में मांग के मुकाबले उपलब्धता कम होने से कीमतों में तेजी आई है।

हर महीने 750 रुपये तक बढ़ सकता है घरेलू खर्च

चावल हर परिवार की रोजमर्रा की जरूरत है। ऐसे में कीमतों में बढ़ोतरी का सीधा असर रसोई के बजट पर पड़ रहा है। यदि कोई परिवार हर महीने 25 किलो चावल खरीदता है और कीमत औसतन 30 रुपये प्रति किलो बढ़ जाती है, तो उसे पहले की तुलना में 750 रुपये अतिरिक्त खर्च करने पड़ेंगे। कम आय वाले परिवारों के लिए यह बढ़ोतरी आर्थिक परेशानी बढ़ा सकती है।

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स्थानीय किसानों को बारीक धान की खेती के लिए प्रोत्साहन देने की मांग

छत्तीसगढ़ में धान का पर्याप्त उत्पादन होने के बावजूद उपभोक्ताओं की पसंद की सभी किस्में स्थानीय बाजार में उपलब्ध नहीं हैं। अलग-अलग राज्यों के चावल की खुशबू, स्वाद और पकने की विशेषताओं के कारण उनकी मांग बनी रहती है।

बाजार के जानकारों और राशन विक्रेताओं का मानना है कि राज्य सरकार को स्थानीय किसानों को बारीक और सुगंधित धान की खेती के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए। इसके लिए बेहतर बीज, आधुनिक तकनीक और कृषि संबंधी मार्गदर्शन उपलब्ध कराया जा सकता है। प्रदेश में इन किस्मों का उत्पादन बढ़ने से दूसरे राज्यों पर निर्भरता और परिवहन लागत कम करने में मदद मिल सकती है।

भिलाई के राशन दुकान संचालक विजय राठी के अनुसार, सरकार को बारीक चावल के उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए किसानों को आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध करानी चाहिए, ताकि स्थानीय स्तर पर गुणवत्तापूर्ण चावल की उपलब्धता बढ़ सके और उपभोक्ताओं को राहत मिल सके।

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