3 Nov 2026, Tue
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महादेव ऐप का मास्टरमाइंड सौरभ चंद्राकर रायपुर पहुंचा: ओमान से प्रत्यर्पण के बाद CBI लाई, कल स्पेशल कोर्ट में होगी पेशी

रायपुर, 3 नवंबर 2026। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित 6,000 करोड़ रुपये के महादेव ऑनलाइन सट्टा ऐप मामले में बड़ी कार्रवाई हुई है। मामले के मुख्य आरोपी और ऐप प्रमोटर सौरभ चंद्राकर को ओमान से प्रत्यर्पित कर रायपुर लाया गया है। सीबीआई की टीम उसे लेकर दिल्ली से रायपुर पहुंची। माना एयरपोर्ट पर सीबीआई की टीम मौजूद रही। अब 4 नवंबर को रायपुर की स्पेशल CBI कोर्ट में उसकी पेशी होगी।

इससे पहले सोमवार को सौरभ चंद्राकर को दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट में पेश किया गया था। कोर्ट ने उसे रायपुर ले जाने के लिए सीबीआई को दो दिन की ट्रांजिट रिमांड दी थी। प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश निखिल चोपड़ा ने आदेश दिया कि आरोपी को 4 नवंबर 2026 या उससे पहले रायपुर की विशेष सीबीआई अदालत में पेश किया जाए।

CBI और ED दोनों कर रही हैं मामले की जांच

महादेव ऑनलाइन सट्टा ऐप से जुड़े मामलों की जांच सीबीआई कर रही है। छत्तीसगढ़ सरकार ने इस मामले से संबंधित 13 एफआईआर जांच के लिए सीबीआई को सौंपी थीं। इनमें से दो मामलों में चार्जशीट दाखिल की जा चुकी है। वहीं, प्रवर्तन निदेशालय (ED) भी मनी लॉन्ड्रिंग के एंगल से जांच कर रही है और सौरभ चंद्राकर के खिलाफ अभियोजन शिकायत दाखिल कर चुकी है।

गिरफ्तारी पर रायपुर की अदालत करेगी फैसला

सीबीआई की ओर से दिल्ली कोर्ट में बताया गया कि आरोपी के खिलाफ रायपुर की विशेष अदालत पहले ही ओपन एंडेड गैर-जमानती वारंट जारी कर चुकी है। ओमान सरकार से मिली जानकारी के आधार पर उसे भारत लाया गया है।

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सीबीआई ने कहा कि ईडी और सीबीआई के मामले एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं। दिल्ली की अदालत के सामने फिलहाल आरोपी को रायपुर की अदालत तक ले जाने के लिए ट्रांजिट रिमांड का सवाल था। प्रत्यर्पण की शर्तों और मुकदमा चलाने के अधिकार से जुड़े मुद्दों पर फैसला रायपुर की विशेष अदालत करेगी।

2022 में दर्ज FIR से जुड़ा है मामला

सीबीआई के मुताबिक, महादेव बुक ऐप को सौरभ चंद्राकर, रवि उप्पल और उनके सहयोगियों ने मिलकर प्रमोट किया था। आरोप है कि ऑनलाइन सट्टा संचालित करने के लिए अलग-अलग प्लेटफॉर्म और पैनल बनाए गए थे। इनके माध्यम से सट्टेबाजी का नेटवर्क चलाया जाता था।

जांच एजेंसी का आरोप है कि सट्टे से मिलने वाली रकम अलग-अलग बैंक खातों में जमा की जाती थी और इसके बाद पैसा UAE तक पहुंचाया जाता था। सौरभ चंद्राकर और उसके सहयोगियों पर दुबई से इस नेटवर्क का संचालन करने का भी आरोप है। जांच में छत्तीसगढ़ के कई युवाओं को इस नेटवर्क में कर्मचारी और मैनेजर के रूप में काम पर रखने की बात भी सामने आई है।

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