5 Nov 2026, Thu
Breaking

बच्चों की सुरक्षा पर आयोग सख्त: छात्रावासों में रात 9 बजे फेस अटेंडेंस, बुखार आने पर 6 घंटे में जांच और इलाज जरूरी

रायपुर, 04 नवंबर 2026। प्रदेश के आश्रम-छात्रावासों एवं आवासीय विद्यालयों (प्री-मैट्रिक, पोस्ट-मैट्रिक, एकलव्य, प्रयास एवं कन्या शिक्षा परिसर) में निवासरत बच्चों के स्वास्थ्य, सुरक्षा और बाल अधिकारों (POCSO Act, 2012 एवं JJ Act, 2015) के प्रभावी अनुपालन को लेकर आज दिनांक 04/11/2026 को छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा ने आदिम जाति तथा अनुसूचित जाति विकास विभाग के मंत्री रामविचार नेताम से सौजन्य भेंट कर विस्तृत चर्चा की।

बैठक के दौरान आयोग की अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा ने प्रदेश के आश्रमों और छात्रावासों की संवेदनशील व प्रणालीगत कमियों को दूर कर उनके सुरक्षित एवं जवाबदेह संचालन के लिए एक विस्तृत मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) प्रस्तावित की। मंत्री रामविचार नेताम ने आयोग की इन चिंताओं और सुझावों पर उत्साहपूर्वक शीघ्र एवं ठोस कार्रवाई करने की बात कही है।

आयोग द्वारा प्रस्तावित मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) के प्रमुख बिंदु

1. आकस्मिक मृत्यु की रोकथाम व त्वरित उपचार: मलेरिया, डायरिया, पीलिया, सिकलसेल व सर्पदंश से होने वाली बच्चों की आकस्मिक मृत्यु रोकने के लिए प्रत्येक छात्रावास को निकटतम 24×7 स्वास्थ्य केंद्र (PHC/CHC) व 108 संजीवनी एक्सप्रेस से जोड़ा जाए। किसी भी बच्चे को बुखार आने पर 2 से 6 घंटे के भीतर अनिवार्य रक्त जांच और अस्पताल रेफरल की SOP लागू हो।

2. अधीक्षकों का अनिवार्य रात्रि निवास व फेस-अटेंडेंस: अधीक्षकों के मुख्यालय छोड़कर अप-डाउन करने और रसोइए या चौकीदार के भरोसे छात्रावास चलाने पर रोक लगे। परिसर में ही रात्रि निवास अनिवार्य हो तथा रात 9:00 से 9:30 बजे तक जियो-फेंसिंग आधारित फेस-अटेंडेंस और एक व्यक्ति को एक ही छात्रावास का प्रभार देने का नियम लागू किया जाए।

पढ़ें   नवा रायपुर में ट्रिपल-आईटी में डिजिटल प्रोडक्टिविटी और एआई प्रशिक्षण का भव्य शुभारंभ, अधिकारियों-कर्मचारियों को मिले स्मार्ट प्रशासनिक टूल्स<br><br>

3. कन्या छात्रावासों में लैंगिक सुरक्षा (POCSO अनुपालन): कन्या आश्रमों में केवल महिला अधीक्षक, महिला रसोइया और महिला गार्ड की ही तैनाती हो। पुरुषों का प्रवेश पूर्णतः वर्जित रहे तथा सभी प्रवेश द्वारों पर 30 दिन के बैकअप सहित नाइट-विजन CCTV कैमरे, बाल सुरक्षा नीति और शिकायत पेटी स्थापित की जाए।

4. परिसर सुरक्षा ऑडिट व मानसिक स्वास्थ्य समर्थन: मानसून से पहले सभी भवनों का स्ट्रक्चरल और इलेक्ट्रिकल सेफ्टी ऑडिट, मानक बाउंड्रीवॉल निर्माण तथा खिड़कियों में मच्छरदानी (Wire Mesh) लगाई जाए। साथ ही आत्महत्या और ड्रॉपआउट रोकने के लिए नए छात्रों हेतु 15 दिवसीय ओरिएंटेशन एवं संगवारी बडी सिस्टम और क्लस्टर स्तर पर मनोवैज्ञानिक काउंसलर की नियुक्ति की जाए।

5. डिजिटल हेल्थ कार्ड, पौष्टिक आहार व मासिक धर्म स्वच्छता: प्रत्येक छात्र का ABHA ID से लिंक डिजिटल हेल्थ कार्ड बनाया जाए और सिकलसेल पॉजिटिव बच्चों को रेड कार्ड श्रेणी में रखकर नियमित दवा दी जाए। महंगाई के अनुपात में भोजन भत्ता बढ़ाकर डाइट में स्थानीय पौष्टिक अनाज (रागी, कोदो-कुटकी), अंडा, दूध, हरी सब्जियां व गुड़-चना शामिल किए जाएं। कन्या छात्रावासों में सेनेटरी नैपकिन वेंडिंग मशीन, इंसिनरेटर (भस्मक) और साप्ताहिक आयरन-फोलिक एसिड (WIFS) की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।

 

Share

 

 

 

 

 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You Missed