रायपुर, 05 नवंबर 2026
दीपावली की चमक-दमक के बीच मिट्टी के दीयों की परंपरा को जीवित रखने और स्थानीय कुम्हारों के चेहरे पर मुस्कान लाने की एक अनूठी पहल सामने आई है। चाइनीज लाइटों की बढ़ती चमक के बीच उर्मिला फाउंडेशन ने स्वदेशी अपनाने और स्थानीय कारीगरों को आर्थिक संबल देने का संदेश दिया है। फाउंडेशन की डायरेक्टर एवं लेखिका नम्रता सिंह की पहल पर मिट्टी के दीयों का वितरण कर लोगों को भारतीय संस्कृति और पारंपरिक विरासत से जुड़ने के लिए प्रेरित किया जा रहा है।

सवाल सिर्फ घर रोशन करने का नहीं, किसी के घर का चूल्हा जलाने का भी है

कभी दीपावली की पहचान मिट्टी के दीयों से हुआ करती थी। घरों के आंगन, मंदिरों और चौखट पर सजे दीप भारतीय संस्कृति और आस्था का प्रतीक होते थे। लेकिन बदलते दौर में इलेक्ट्रॉनिक झालरों और विदेशी सजावटी लाइटों ने बाजार में अपनी जगह बना ली है। इस चमक के बीच मिट्टी के दीये बनाने वाले कुम्हारों की मेहनत और उनका पारंपरिक कारोबार कहीं पीछे छूटता नजर आ रहा है।
नम्रता सिंह का कहना है कि मिट्टी का एक दीया खरीदना महज एक छोटी खरीदारी नहीं, बल्कि किसी कुम्हार परिवार की मेहनत का सम्मान और उसके रोजगार में सहयोग है। महीनों की मेहनत से तैयार किए गए दीयों को जब बाजार में उचित स्थान नहीं मिलता, तो इसका सीधा असर उन परिवारों की आजीविका पर पड़ता है, जिनकी पीढ़ियां इस पारंपरिक कला को आगे बढ़ाती आई हैं।
उर्मिला फाउंडेशन की पहल, स्वदेशी को मिले प्राथमिकता
इसी सोच के साथ उर्मिला फाउंडेशन ने मिट्टी के दीयों के वितरण की पहल की है। इसका उद्देश्य केवल दीये बांटना नहीं, बल्कि समाज में स्वदेशी उत्पादों के प्रति जागरूकता बढ़ाना, स्थानीय कारीगरों को प्रोत्साहित करना और भारतीय परंपराओं को नई पीढ़ी तक पहुंचाना है।
फाउंडेशन का संदेश साफ है कि त्योहार की खुशियां तभी पूरी होंगी, जब हमारी खुशियों में स्थानीय कारीगरों और मेहनतकश परिवारों की भागीदारी भी होगी। स्थानीय उत्पादों को प्राथमिकता देना आत्मनिर्भर भारत की दिशा में आम नागरिक की भी महत्वपूर्ण भूमिका हो सकती है।
इस दीपावली संकल्प स्वदेशी का
चाइनीज लाइटें घरों को रोशन कर सकती हैं, लेकिन मिट्टी का दीया हमारी संस्कृति, आस्था और परंपरा से जुड़ा है। जरूरत आधुनिकता को छोड़ने की नहीं, बल्कि आधुनिकता के साथ अपनी विरासत को बचाए रखने की है।
उर्मिला फाउंडेशन की यह पहल एक बड़ा सामाजिक संदेश देती है कि इस दीपावली घर में मिट्टी का दीया जरूर जलाएं, स्थानीय कुम्हारों से खरीदारी करें और स्वदेशी उत्पादों को अपनाएं।
क्योंकि दीपावली की असली रोशनी सिर्फ घरों की दीवारों पर नहीं, बल्कि उन परिवारों की जिंदगी में भी दिखनी चाहिए, जिनके हुनर और मेहनत से हमारी परंपराएं आज भी जीवित हैं।
इस बार दीया सिर्फ अपने घर के लिए नहीं, किसी कुम्हार के घर में खुशियों का उजाला फैलाने के लिए भी जलाएं।


