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ध्यान दो सरकार : छत्तीसगढ़ के प्रथम शहीद के गाँव में पशु औषधालय में संचालित हो रहा शासकीय महाविद्यालय, न तो विद्युत व्यवस्था और न हीं इंटरनेट सुविधा

प्रमोद मिश्रा

बलौदाबाजार, 28 जुलाई 2021

छत्तीसगढ़ के प्रथम शहीद शहीद वीर नारायण सिंह के गांव सोनाखान में संचालित शासकीय महाविद्यालय अपने लचर व्यवस्था पर आंसू बहा रहा है, ऐसा हम इसलिए कह रहे हैं कि कांजी हाउस में संचालित होने वाली शासकीय महाविद्यालय में न तो विद्युत की व्यवस्था है और ना ही इंटरनेट की व्यवस्था है । ऐसे में यहां पढ़ने वाले विद्यार्थी कैसे अपना भविष्य करेंगे यह सोचने का विषय है ।विद्युत व्यवस्था न होने से कंप्यूटर संबंधी कार्य भी यहां नहीं हो पाता, सभी अतिथि प्राध्यापक 31 जुलाई से अनुबंध अनुसार अपने घर वापस लौट गए हैं।

शहीद वीर नारायण सिंह की जन्म स्थली सोनाखान को सरकार ने विशेष दर्जा प्रदान कर दिया है, किंतु राज्य बनने के 21 वर्ष बाद भी यहाँ बुनियादी सुविधाओं का अभाव है. सोनाखान में 3 वर्ष पूर्व छत्तीसगढ़ की तत्कालीन रमन सरकार द्वारा महाविद्यालय की स्थापना कर संचालन शुरू कर दिया गया लेकिन 3 वर्ष बाद भी शासकीय संकल्प के अभाव में यहां का महाविद्यालय कांजी हाउस में संचालित किया जा रहा है.
महाविद्यालय की स्थापना 2018 में की गई थी किंतु 3 वर्ष बाद भी शासकीय महाविद्यालय भवन का निर्माण नहीं किया जा सका है. महाविद्यालय में मात्र 4 कमरे हैं जिसमें विज्ञान संकाय में 35 एवं कला संकाय में 48 विद्यार्थी अध्ययनरत है । अध्यापन कार्य सुचारू रूप से संचालित करने के लिए कम से कम 12 कमरे होने चाहिए. राज्य में सत्ता परिवर्तन होने के चलते वर्तमान सरकार इस पर ध्यान नहीं दे रही है. जबकि सोनाखान शहीद वीर नारायण सिंह की जन्म स्थली है एवं बिलाईगढ़ विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत आता है.शासकीय महाविद्यालय सोनाखान में कला एवं विज्ञान विषय की पढ़ाई हो रही है जबकि भवन एवं आवश्यक बुनियादी ढांचे का अभाव के कारण इसका संचालन कांजी हाउस में किया जारहा है. कांजी हाउस के सामने के 3 कमरों में महाविद्यालय के स्टॉप संचालित हो रहा है।
प्राचार्य, क्लर्क एवं प्राध्यापकों के कक्ष है. इसी भवन में दाँये ओर शासकीय पशु चिकित्सालय भी संचालित किया जा रहा है. इस तरह एक ही भवन में शासकीय पशु चिकित्सालय, महाविद्यालय और कांजी हाउस का संचालन हो रहा है।

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महाविद्यालय खोलने के बाद तीन अध्यपको नियुक्ति की गई थी किंतु इनमें से किसी नही आया. सभी ने अपनी पोस्टिंग रुकवा ली. वर्तमान में महाविद्यालय के अध्यापन की व्यवस्था अतिथि प्राध्यापकों के भरोसे चल रही है. यह सभी अतिथि प्राध्यापक 31 जुलाई से अनुबंध अनुसार सेवा से पृथक हो जाएंगे. इसके पश्चात महाविद्यालय के अध्यापन की व्यवस्था भगवान भरोसे हो जाएगी. महाविद्यालय में विद्युत की व्यवस्था भी नहीं है. विद्युत व्यवस्था न होने के कारण कंप्यूटर संबंधी कार्य भी यहां नहीं हो पाता. अंचल वासियों ने शासन प्रशासन से यथाशीघ्र ही महाविद्यालय भवन निर्माण कराने की मांग की है ।

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