7 Mar 2026, Sat

1 अक्टूबर अंतरराष्ट्रीय वृद्धजन दिवस : ’वर्तमान पीढ़ी बुजुर्गों का करें सम्मान, अपनत्व के साथ जरूरत का रखें ध्यान’


रायपुर, 30 सितम्बर 2023
‘बेटा जब भी काम में जाओगे तो बस यही कह देना कि मैं काम में जा रहा हूं और काम से लौटने के बाद भोजन के समय पूछ लेना कि भोजन कर लिए क्या ? इससे ज्यादा मुझे कुछ और नहीं चाहिए बेटा। मैं पैसे या अन्य वस्तुओं के लिए कोई मांग भी नहीं करूंगा। अब इस दुनिया तुम्हारी माँ नहीं है, तुमको मालूम बेटी ससुराल चली गई है, जो कुछ हो अब तुम ही लोग हो। यह कोई कहानी का अंश नहीं है बल्कि इस तरह एक वृद्ध पिता की अपेक्षा अपने बच्चों से होती है।’ संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने कहा है कि ‘वृद्ध व्यक्ति ज्ञान और अनुभव के अमूल्य स्रोत हैं और उनके पास शांति, सतत विकास और हमारे गृह की सुरक्षा में योगदान करने के लिए बहुत कुछ है।’
यह महत्वपूर्ण संयोग है कि हिंदू पंचांग के अनुसार, पितृपक्ष शुरू हो चुका है। और आज अंतरराष्ट्रीय वृद्धजन दिवस है। बुजुर्गों का सम्मान, प्रेम, सहयोग और आत्मीयता और उनकी जरूरतों को समझना आज की पीढ़ी के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। आए दिन खबर पढ़ने, सुनने को मिल जाता है कि परिवार, समाज में बुजुर्गों का अपमान और उनके स्वास्थ्य, जरूरतों को अनदेखी किया जाता है, ऐसे में हम सबकी जिम्मेदारी है कि किसी भी परिस्थितियांे में अपने वृद्धजन का सम्मान में कोई कसर नहीं छोड़ना चाहिए। एक तरफ पितृ पक्ष चल रही है, जिसमें मृत व मोक्ष प्राप्त रिश्ते को जल अर्पण किया जा रहा है, ऐसे में हम जीवित दादा-दादी, नाना-नानी, माता-पिता व घर परिवार में रहने वाले वृद्धजन का ध्यान रखने की आवश्यकता है। वे अपने दुःख-दर्द को किसके पास साझा करें यह सोचते हुए दिन काट रहे हैं। विदित हो कि 14 दिसंबर 1990 को संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 1 अक्टूबर को अंतरराष्ट्रीय वृद्धजन दिवस के रूप में नामित किया था।
जैसे कि प्रत्येक जीवधारी उत्पन्न होने के पश्चात् क्रमशः, बाल्यावस्था, किशोरावस्था, युवावस्था, अधेड़ावस्था एवं वृद्धावस्था से गुजरता है। वृद्धावस्था को जीवन संध्या भी कहा जाता है, क्योंकि यह जीवन का अंतिम पड़ाव होता है। इस अवस्था तक आते आते मानव शरीर थकने लगता है, शारीरिक क्रियाएं उम्र के साथ साथ शरीर को शिथिल करने लगती हैं। वैसे तो चिकत्सा जगत में आश्चर्य जनक प्रगति हुई है, परन्तु  कोई बुजुर्ग आर्थिक रूप से पराधीन है अथवा निम्न स्रोत का उपभोक्ता है, तो निश्चित तौर पर उसके लिए रोग का निदान कर पाना मुश्किल हो जाता है। संवेदन हीनता, किसी बीमार को आश्रय और सुकून देने में सक्षम नहीं हैं। यह तो सत्य है की प्रत्येक इन्सान को मौत आनी है, परन्तु यह भी सत्य है ऐसा कोई निश्चित नहीं है की पति और पत्नी एक साथ दुनिया से विदा लें, अर्थात दोनों की मृत्यु एक समय पर हो किसी एक को पहले जाना होता है। दाम्पत्य जीवन में अकेला रहने वाला व्यक्ति एकाकी पन का शिकार होता है। किसी भी व्यक्ति को अपने जीवन साथी की सबसे अधिक आवश्यकता प्रौढ़ अवस्था में होती है। प्रौढ़ावस्था में अपने विचारों के आदान प्रदान का एक मात्र मध्यम जीवन साथी ही बनता है। वृद्धवस्था में बीमारी एवं दुःख दर्द में सेवा, सहानुभूति, सहयोग मुख्यतः जीवन साथी से प्राप्त होता है। इसलिए वृद्ध व्यक्ति को भी अपनी भावनाएं व्यक्त करने के लिए उसी विचारधारा के लोगों की जरूरत होती है।
प्रत्येक वृद्ध इतना सौभाग्यशाली नहीं होता, की वह जीवन के अंतिम पड़ाव तक आत्मनिर्भर बना रहे, अर्थात उसका आए स्रोत उसके भरण पोषण के लायक जीवन पर्यंत बने रहें। अनेक वृद्धों को आर्थिक रूप से अपने परिजनों जैसे पुत्र, पुत्री, भाई इत्यादि पर निर्भर रहना पड़ता है। उसके व्यक्तिगत खर्चे परिजनों की आय से पूरे होते हैं, जिसमे अनेक बार असहज स्थितियों का सामना इन वृद्धजनों को करना पड़ता है। व्यक्ति का आत्मसम्मान भी दांव पर लग जाता है। कभी कभी आवश्यकताएं पूर्ण भी नहीं हो पातीं। बीमारी, इत्यादि में साधनों का अभाव कचोटता है। उसे मानसिक वेदनाओं का शिकार होना पड़ता है। कभी उसे आत्मग्लानी होती है, उसे अपना जीवन निरर्थक लगने लगता है। महिला वृद्ध जो पहले गृहणी रही हैं उनके लिए आर्थिक निर्भरता कोई व्यथा का कारण नहीं बनती क्योंकि वह पहले भी अपने पति पर निर्भर थी उसके पश्चात् अन्य परिजन पर निर्भर हो जाती है। परन्तु पुरुष जिसका पहले परिवार का पालनहार था और अब उसे स्वयं किसी अन्य परिजन की आय पर निर्भर होना पड़ता है।
सामाजिक व्यवस्था ने बुजुर्गों के लिए अपनी सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है। संयुक्त परिवार बिखर कर एकल परिवार बन चुके हैं। बढती जनसंख्या की समस्या, बढ़ता जीवन स्तर एवं बढती प्रतिस्पर्द्धा के कारण प्रत्येक दम्पति के लिए सीमित परिवार की अवधारणा को स्वीकार करना आवश्यक हो गया है। पुत्री को विवाह कर ससुराल विदा करना होता है और पुत्र को अपने अच्छे भविष्य की तलाश में अपने परिवार, अपने शहर से दूर जाना पड़ता है। अंत में परिवार में रह जाते हैं सिर्फ बुजुर्ग पति और पत्नी। ऐसे बुजुर्ग दम्पति को अपने स्वास्थ्य की देख भाल स्वयं ही करनी पड़ती है, अपनी सुरक्षा को लेकर चिंता सताने लगती है। विकलांगता और वह भी वृद्धावस्था में सिर्फ निराशा, हताशा, उपेक्षा का कारण बनती है और जीवन को बोझिल बनाती है।
इसलिए वर्तमान व नव पीढी को यह प्रशिक्षित होना भी जरूरी है कि घर, परिवार व समाज में रहने वाले तमाम वृद्धजनों का देखभाल, अपनत्व व आवश्यक जरूरतों का विशेष ध्यान रखना चाहिए। वैसे तो सरकार वृद्वजनों के लिए अनेक योजनाएं संचालित की इसके बावजूद उन्हें प्यार औऱ सम्मान जो घर, परिवार से मिल जाए तो उनका बुढापा निश्चय ही अनेक बाधाओ को पार करते हुए कट जाएगा। इसलिए हम सबकी जिम्मेदारी है कि बुजुर्गों का करें सम्मान, उन्हें दे भरपूर प्यार औऱ रखें ध्यान।

Share
पढ़ें   वॉयस ऑफ इंडिया फेम जाकिर हुसैन का निधन: बिलासपुर में पड़ा दिल का दौरा; थम गई छत्तीसगढ़ की खनकती आवाज

 

 

 

 

 

By Desk

Media24 News is an online news portal based in Raipur, Chhattisgarh, India. It publishes local and regional news, covering a wide range of topics including politics, crime, social issues, development, events, and community stories from across Chhattisgarh. The website provides regularly updated news content in Hindi, aimed at informing the public with timely and relevant reports from the state’s districts and cities like Raipur, Durg, Mahasamund and others. This newsroom focuses on grassroots journalism and regional happenings, serving audiences who want updates about local governance, public affairs, social developments, and community issues specific to Chhattisgarh. The platform is designed to meet the news needs of its readers with frequent headlines and local reporting, helping citizens stay informed about events and issues close to their daily lives.