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17 चौसिंगाओं की मौत के गुनाहगारों को मिलेगी सजा- केदार कश्यप

प्रमोद मिश्रा

रायपुर, 9 जनवरी 2024|वन विभाग के जिम्मेदार अफ सर भले ही बेजुबान जानवरों के दर्द को न समझें, उन जानवरों की मौत पर पर्दा डालने की कोशिश करें, लेकिन विभागीय मंत्री केदार कश्यप ने इस मामले पर सख्त निर्णय लेने की बात कही है। वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री केदार कश्यप ने बात करते हुए साफ तौर पर कहा कि गुनाहगार बख्शे नहीं जांएगे। मंत्री कश्यप ने कहा कि 17 चौसिंगाओं के मौत का मामला संज्ञान में आया है, हमने विभाग से जानकारी मांगी है। इस पर विशेषज्ञों की टीम से जांच कराई जाएगी।

कब-कब कितने चौसिंगा की हुई मौत
सबसे पहले 25 नवम्बर 2023 को पांच बेजुबान चौसिंगाओं की मौत हुई। उसके बाद 26/11 को 3 की और मौत हो गई। जिम्मेदार अधिकारी तब भी नहीं जागे 27/11 को पांच फिर मर गये। यह सिलसिला यहीं नहीं रुका, 28 नवम्बर और 29 नवम्बर को भी 2-2 चौंसिंगा मर गये। जंगल सफारी में लागातार बेजुबान जानवर मरते रहे, अधिकारी लासों पर पर्दा डालते रहे। इस तरह से 17 बेजुबान जानवर काल के गाल में समा गए।

चौसिंगा एक दुर्लभ जीव है
चौसिंगा एक दुर्लभ जीव है। वन्यजीव अधिनियम संरक्षण 1972 में शामिल है। यह अनुसूची 1 में चिन्हित एक दुर्लभ वन्य प्राणी है। लेकिन उनके विलुप्त होने या उनकी दर्दनांक मौत पर जिम्मेदारों ने जवाबदेही तय करने की बजाय पर्दा डाल दिया।

एशिया के सबसे बडे जंगल सफारी का पीएम मोदी ने किया था लोकार्पण
वाइल्ड लाइफ की कमान सम्भाल रहे अफ सर भले ही वन्यजीवों के प्रति जबावदेही के लिए तैयार नहीं हैं, लेकिन यह एशिया का सबसे बडा जंगल सफारी है। इसका लोकार्पण स्वयं प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने किया था। अब इस सफारी में गितनी के चौसिंगा बचे है। वन विभाग फिर कुछ दिन बाद अन्य जगह से चौसिंगा लाने की कवायत करेगा। चौसिंगा भले ही आ जाएं लेकिन इन दुर्लभ जीव की संख्या सीधे 17 कम हो गई, जो घोर लापरवाही का जीता-जागता उदाहरण है।

प्रभारी डीएफ ओ और सीसीएफ ने नहीं उठाया फ़ोन
मीडिया रिर्पोट और प्राथमिक जानकारी अनुसार इन चौसिंगाओं की मौत खुरहा-चापहा से हुई है, वहीं अन्य सूत्रों को कहना है कि कोई दूसरे वायरस के कारण हुई है। सही जानकारी के लिए प्रभारी डीएफओ से दिनांक 6 जनवरी को संपर्क करने की कोशिश की गई तो उन्होंने फ़ोन नहीं रिसीव किया। वहीं 8 जनवरी को शाम 6 बजकर 35 मिनट में फिर संपर्क करने की कोशिश की गई तो उन्होनें फिर से फ़ोन रिसीव नहीं किया। इसके बाद 6 बजकर 38 मिनट में प्रभारी सीसीएफ मर्सी बेला से बात करने की कोशिश की गई, तो उनका फ़ोन भी नो रिप्लाई आया।

खुरहा-चपहा से मौत तभी जब, उपचार समय पर न हो: डॉ. पद्म जैन
डॉ. पद्म जैन ने बताया कि यदि सही तरीके से और समय पर उपचार किया गया तो खुरहा-चपहा 3 से 4 दिन में ठीक हो जाता है। सामान्य तौर पर समय पर इलाज मिलने से जानवर की मौत की सम्भावना कम ही होती है। जादा दिन होने पर खुर और मुह पक जाता है। जिससे यह अल्सर का रुप धारण कर लेता है, तभी जानवर की मौत हो सकती है। अन्यथा इससे मौत होने के चांस कम होते हैं। डॉ. जैन ने बाताया यह बीमारी एक से दूसरे जानवर के पास लार या प्रभाव में आने से फैलती है।

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By Desk

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