प्रमोद मिश्रा
रायपुर, 24 अगस्त 2025
छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में रविवार को एक ऐतिहासिक दृश्य देखने को मिला, जब नारायण सेवा संस्थान, उदयपुर द्वारा विशाल नगर स्थित शगुन फार्म में आयोजित निशुल्क नारायण लिंब एवं कैलिपर्स फ़िटमेंट शिविर में 382 से अधिक दिव्यांगजन कृत्रिम अंग पाकर अपने पैरों पर खड़े हुए।

यह आयोजन केवल चिकित्सा शिविर नहीं, बल्कि टूटे सपनों को नया सहारा देने और ठहरी हुई ज़िंदगी को गति प्रदान करने का महापर्व साबित हुआ।
कार्यक्रम में भावनात्मक पल
- उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने कहा— “नर सेवा ही नारायण सेवा है। जब परिवार का असहाय सदस्य फिर से अपने पैरों पर खड़ा हो जाता है, तो पूरा परिवार जीवन से भर उठता है। आज के यह पल अद्भुत और हृदयस्पर्शी हैं।”
- अल्पसंख्यक आयोग अध्यक्ष अमरजीत सिंह छाबड़ा ने इसे धरती पर देवताओं का कार्य बताते हुए कहा कि— “जो हाथ कभी लिख नहीं सकते थे, वे अब लिख सकेंगे और जो पैर चलना भूल गए थे, वे फिर से डग भरेंगे।”
आयोजन की मुख्य झलकियां
- शिविर की शुरुआत दीप प्रज्ज्वलन से हुई।
- समाजसेवी ओपी निगम, संजय पारख, मीरा राव, डॉ अशोक भट्टड, सीताराम अग्रवाल, पंकज शर्मा व अनंत श्रीवास्तव सहित अनेक गणमान्य उपस्थित रहे।
- 45 सदस्यीय विशेषज्ञ टीम ने जर्मन तकनीक से बने नारायण लिंब का फ़िटमेंट किया।
- डॉक्टरों ने न केवल कृत्रिम अंग लगाए बल्कि उपयोग व देखभाल का प्रशिक्षण भी दिया।
- दिव्यांगों की परेड ने कार्यक्रम स्थल पर उपस्थित सभी की आंखें नम कर दीं।
संस्थान का योगदान
संस्थान के संरक्षक महेश अग्रवाल ने बताया कि अप्रैल में हुए चयन शिविर में 500 से अधिक दिव्यांग आए थे, जिनमें से 382 को आज नया जीवन मिला।
1985 से अब तक नारायण सेवा संस्थान ने 40 हज़ार से अधिक कृत्रिम अंग नि:शुल्क लगाए हैं। संस्थापक कैलाश मानव को पद्मश्री एवं कई राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय सम्मान प्राप्त हो चुके हैं, जबकि अध्यक्ष प्रशांत अग्रवाल ने शिक्षा, कौशल विकास और खेल अकादमी के माध्यम से लाखों दिव्यांगों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ा है।
रायपुर का यह शिविर साबित करता है कि सामूहिक सेवा और मानवीय संवेदना मिलकर किसी भी असंभव को संभव बना सकती है। यह आयोजन छत्तीसगढ़ के दिव्यांगजनों के जीवन में नई उम्मीद की किरण लेकर आया है।





